Wednesday, 25 July 2018

Protocol क्या हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?



यदि आप जानना चाहते हैं की computer network में protocol क्या होता है? (What is Protocol in Hindi), यह कितने प्रकार के होते हैं इसके क्या उपयोग और क्या फायदे हैं तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं इस  article को पढने के बाद आप नेटवर्क प्रोटोकॉल को अच्छी तरह से समझ पायेंगे।

protocol kya hai?

Protocol क्या है? कंप्यूटर नेटवर्क में सूचनाओं के सही तरीके से आदान-प्रदान के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं इन नियमों के समूह को प्रोटोकॉल कहा जाता है। किसी नेटवर्क से जुड़े डिवाइस आपस में कैसे communicate करेंगे, उनके बीच डाटा किस format में और किस तरह से ट्रान्सफर होगा और डाटा receive होने के बाद क्या होगा यह  protocol द्वारा ही निर्धारित होता है।

बिना प्रोटोकॉल के कोई भी कंप्यूटर नेटवर्क ठीक तरह से काम नही कर सकता यहाँ तक की इसके बिना इंटरनेट की कल्पना भी नही की जा सकती।

आपने अपने ब्राउज़र के address bar में किसी भी URL से पहले http:// या https:// जरुर लिखा हुआ देखा होगा, दरअसल यह भी एक प्रकार का नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो की सर्वर से किसी वेबसाइट या वेबपेज को लाकर आपके कंप्यूटर स्क्रीन परदिखाने में आपकी मदद करता है।



प्रोटोकॉल का क्या उपयोग है? Protocol कई प्रकार के होते हैं और सभी के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है इसलिए जरूरत के अनुसार अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग प्रकार के प्रोटोकॉल उपयोग किये जाते हैं। प्रोटोकॉल के कुछ common uses इस प्रकार हैं:
  • नेटवर्क में दो devices आपस में कैसे जुड़ेंगे इसका निर्धारण करना 
  • डाटा ट्रान्सफर का method तय करना
  • डाटा का structure या format निर्धारित करना 
  • Transmission की speed तय करना
  • किसी एरर के आने पर उसे मैनेज करना

प्रोटोकॉल कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Protocol)
कंप्यूटर नेटवर्किंग के लिए सॉफ्टवेर तथा हार्डवेयर लेवल पर कई प्रकार के प्रोटोकॉल उपयोग किये जाते हैं जिनमे से कुछ common network protocols कुछ इस प्रकार से हैं:
  • TCP (Transmission Control Protocol): इसका काम इन्टरनेट पर data transfer करने के लिए होता है। यह डाटा को छोटे-छोटे पैकेट्स में विभाजित करके नेटवर्क के जरिये destination तक send कर देता है जहाँ इसे वापस जोड़ लिया जाता है।
  • IP (Internet Protocol): इसके बारे में आपने जरूर सुना होगा यह TCP के साथ मिलकर काम करता है packets को ट्रान्सफर करने के लिए IP का उपयोग एक तरह से addressing के लिए किया जाता है जिसके जरिये final destination तक data को पहुँचाया जाता है।
  • HTTP (HyperText Transfer Protocol): यह client और server के बीच connection स्थापित करता है और world wide web पर document exchange करने के काम आता है। आप अपने browser पर किसी website को इसी प्रोटोकॉल की मदद से access कर पाते हैं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए यह पढ़ें: HTTP और HTTPS क्या है? ये कैसे काम करते हैं? दोनों में क्या अंतर है?
  • FTP (File Transfer Protocol): इसका use client और FTP server के बीच फाइल ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है। किसी अन्य method के मुकाबले FTP द्वारा तेज़ गति से फाइल ट्रान्सफर किया जा सकता है। एफटीपी के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यह पढ़ें: FTP क्या है? यह कैसे काम करता है? पूरी जानकारी हिंदी में
  • SMTP (Simple Mail Transfer Protocol): जैसा की नाम से पता चल रहा है इसका उपयोग इन्टरनेट पर ईमेल भेजने और प्राप्त करने के लिए होता है। 
  • Telnet: किसी एक कंप्यूटर को दूर बैठ कर किसी अन्य कंप्यूटर से संचालित किया जा सकता है इसके लिए remote login की जरुरत होती है और इस प्रकार के connection को establish करने के लिए telenet protocol का उपयोग होता है। Teamviewer software इसका एक अच्छा उदाहरण है।
  • Ethernet Protocol: इस प्रोटोकॉल का बहुत ज्यादा उपयोग होता है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस आदि में LAN connection का उपयोग होता है और इस प्रकार के कनेक्शन के लिए Ethernet का use किया जाता है किसी computer को LAN से connect करने के लिए उसमे Ethernet Network Interface Card (NIC) होना जरूरी होता है।
इसके अलावा और भी कई सारे network protocols हैं जैसे:
  • IMAP (Internet Message Access Protocol)
  • POP (Post Office Protocol)
  • UDP (User Datagram Protocol)
  • MAC (Media Access Control protocol)
  • ARP (Address Resolution Protocol)
  • DNS (Domain Name System protocol)
  • IGMP (Internet Group Management Protocol)
  • SSH (Secure Shell)
  • SSL (Secure Sockets Layer)

प्रोटोकॉल के क्या फायदे हैं? (Advantages of Protocol)
  • अलग-अलग hardware को नेटवर्क से जोड़ना और उनके बीच information share करना और instruction देना काफी मुश्किल काम होता है इसके लिए जरूरी है की sender और receiver दोनों एक ही language में communicate करें और यह काम प्रोटोकॉल द्वारा ही संभव है।
  • इसके international standard की वजह से कई सारे computers को एक साथ जोड़ा जा सकता है और उनके बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में स्थित क्यों न हों।
  • प्रोटोकॉल की वजह से maintenance और installation का काम भी आसान हो जाता है।

प्रोटोकॉल के क्या नुकसान हैं? (Disadvantages of Protocol)
  • जहाँ प्रोटोकॉल का international standard होना फायदेमंद हैं वहीँ इसके standard में कुछ कमियां हों तो यह एक international समस्या भी बन सकता है।
  • Fixed standard होने की वजह से सभी companies और manufacturers को इसे follow करना होता है और इसकी वजह से खुद की कोई नयी technique use करने में परेशानी आ सकती है।
उम्मीद है network protocol के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आप कोई सवाल पूछना या सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट के माध्यम से अपनी बात हम तक जरूर पहुंचाएं।

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