Friday, 29 June 2018

HTTP और HTTPS क्या है? ये कैसे काम करते हैं? दोनों में क्या अंतर है?

क्या आप जानते हैं की HTTP क्या है (What is HTTP in Hindi) और HTTPS क्या है? आपने इन दोनों words को अपने browser के address bar में जरुर देखा होगा, आपने इसे किसी website के url के शुरुआत में जरुर देखा होगा। आपके मन में कभी न कभी यह सवाल आया होगा की आखिर ये हैं क्या, ये काम कैसे करते हैं और HTTP और HTTPS के बीच क्या अंतर है।
what-is-http-and-https-in-hindi

आज इस article में हमने HTTP और HTTPS के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है हमें उम्मीद इसे पढ़ कर HTTP और HTTPS से जुड़े आपके सारे सवालों का जवाब आपको मिल जाएगा।

HTTP क्या है? HTTP का full form "HyperText Transfer Protocol" है। यह एक प्रकार का network protocol है जो की World Wide Web में उपयोग होता है, यहाँ पर protocol का मतलब set of rules से है जो की web browser और server के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान के समय उपयोग होते हैं।

जब भी किसी website के address के पहले http लिखा जाता है (जैसे http://www.webinhindi.com) तो web browser और server के बीच किसी भी प्रकार का data (जैसे text, image, audio, video file आदि) transfer होने पर इन्हें कुछ नियमों का पालन करना होता है और ये नियम HTTP protocol द्वारा निर्धारित होंते हैं।

यह protocol यह निर्धारित करता है की transfer होने वाले data का format कैसा होगा, उसका transmission किस तरीके से होगा और अलग-अलग commands पर ब्राउज़र और सर्वर का response कैसा होगा।

आजकल browser में http type करने की जरुरत नही होती क्योंकि ब्राउज़र by default HTTP का उपयोग करता है इसलिए जब आप सीधे वेबसाइट का address enter करते हैं तो उसके सामने automatically http:// आ जाता है।

HTTP कैसे काम करता है? HTTP एक request-response protocol है जो की client और server के बीच communication का एक माध्यम बनता है। यहाँ पर हमारा web browser एक client की तरह और web-server जैसे Apache या IIS एक server की तरह काम करते हैं।

Server में सारे files store रहते हैं और client के request के अनुसार ही server client को response करता है।

HTTP stateless protocol है यानि की client द्वारा भेजे गये सारे requests अपने आप में अलग-अलग execute होते हैं और request का response देने के बाद connection close हो जाता है।

Client को जिस file की जरुरत होती है उसका request वह server को भेजता है और server उस file को ढूँढने के बाद उसे client को send कर देता है।
how-http-works-in-Hindi

HTTP Request Message
Client किसी भी file को access करने के लिए उससे सम्बंधित server को request message send करता है जो की request line, header, और body (optional) से मिलकर बना होता है।

1. Request line: इसमें request method, URL और HTTP version की जानकारी होती है।
  • Request type (method) के कई प्रकार होते हैं, जैसे:
    • GET: इससे server द्वारा भेजे गये response को receive किया जाता है।
    • POST: इसके जरिये HTML form का use करके server को data send किया जाता है।
    • HEAD: इससे response header को receive किया जाता है।
    • PUT: किसी resource को upload किया जाता है।
    • PATCH: Resource को edit किया जाता है।
    • DELETE: Resource को delete करने के लिए।
    • TRACE: Server को test करने के लिए इसका use होता।
  • URL: सर्वर पर उपलब्ध किसी file या web page का address.
  • HTTP version: इसमें यह define होता है की HTTP का कौनसा version (HTTP 1.1 या HTTP 2) use किया जा रहा है।
2. Request Header Line: इसके जरिये कुछ additional information send किये जाते हैं जैसे की date, user agent यानि की client द्वारा use होने वाला software program का detail, referrer आदि।

3. Message Body:  यह एक optional field है इसके जरिये कोई comment के रूप में message send किया जा सकता है।

HTTP Response Message
Client की तरफ से request मिलने के बाद server को request के अनुसार response करना होता है। Response message status line, header lines और body से मिलकर बना होता है।

1. Status line: इसमें protocol version, status code और phrase दिया होता है।
  • Protocol version: इसमें current HTTP version की जानकारी होती है।
  • Status code: यह 3 digit code होता है इससे request का status पता चलता है।
  • Phrase: यह status code को define करता है text के format में।
2. Header line: इससे client को कुछ additional information send किये जाते हैं।

3. Body: body में वह file या document होता है जिसके लिए client ने request किया है। यदि response में error message हो तो body blank होती है।

HTTP Error Codes in Hindi Internet surfing के दौरान आपने कभी न कभी अपने browser पर error का सामना जरूर किया होगा। कई बार यह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या बन जाता है खास तौर पर तब जब हमें इन error के पीछे की वजह समझ न आये।

HTTP से related errors को समझने के लिए कुछ error codes बनाये गये हैं जिन्हें HTTP status code भी कहा जाता है जिनके जरिये हमें error के पीछे के कारण को समझने में मदद करता है।

HTTP से जुड़े कुछ common error codes इस प्रकार हैं:
  • 400 Bad File Request: यह error code तब दिखाई देता है जब हमारा URL गलत हो जैसे की small की जगह capital letter use करना, चिन्हों को type करने में गलती करना आदि।
  • 401 Unauthorized: गलत password enter करने की वजह से यह एरर आ सकता है।
  • 403 Forbidden/Access Denied: जब आप किसी ऐसे page को open कर रहें हों जिसकी permission आपको नही है तो ऐसी स्थिति में यह response code दिखाई दे सकता है।
  • 404 File Not Found:  यह सबसे common error है। जब आप किसी ऐसे file या document के लिए request कर रहें हो जो कि server पर उपलब्ध नही है, या तो delete कर दिया गया है या किसी दुसरे location पर move कर दिया गया है तब ऐसी स्थिति में 404 error आता है।
  • 408 Request Timeout: यह error ज्यादातर उस समय occur होता है जब server का speed slow हो या request किये गये file की size ज्यादा हो।
  • 500 Internal Error: जब sever के configuration में कुछ problem हो तब file को access करने में परेशानी होती है और internal error का status code दिखाई देता है।
  • 503 Service Unavailable: Internet connection में problem हो, server busy हो, या site किसी अन्य address पर move हो गया हो तब इस प्रकार का error आ सकता है।

HTTP Secure क्यों नही है? क्या आपको पता है की HTTP protocol secured नही होता? जी हाँ, HTTP connection के जरिये transfer किये गये data सुरक्षित नही होते इसे आसानी से hack किया जा सकता है। चलिए जानते हैं की आखिर HTTP secured क्यों नही है:

HTTP में data unencrypted form में होता है यानी की ऐसे format में जिसे कोई भी आसानी से समझ सकता है।
HTTP request को बीच में किसी hacker द्वारा read किया जा सकता है।
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HTTP में server identification की जरुरत नही होती इसलिए hacker server की तरफ से response भी कर सकता है। इन्ही सभी कारणों की वजह से यह सुरक्षित नही है इसलिए HTTP के जरिये sensitive information जैसे की password, credit card details आदि transfer नही किये जाते।

HTTPS क्या है?
HTTPS का full form "HyperText Transfer Protocol Secured"  है। यह HTTP का secured version है इसमें SSL (Secured Socket Layer) का use होता है जो की browser और server के बीच encrypted form में data transfer करता है।

HTTPS के तीन main goals होते हैं:
  1. Privacy: Data को encrypt करना जिससे की client और server के बीच कोई भी middleman data को read न कर सके।
  2. Integrity: यह ensure करना की data दोनों end के बीच में कहीं change न हुआ हो।
  3. Authentication: इस system में client-server दोनों को एक दुसरे को अपनी-अपनी identity prove करनी पड़ती है इससे यह निश्चित किया जाता है की जिससे communication हो रहा है क्या उसकी पहचान सच में वही है जो वह बता रहा है।
HTTPS connection में सारे data को cryptography के द्वारा encrypt कर दिया जाता है यानि एक ऐसे format में बदल दिया जाता है जिसे बिना decryption key के decode कर पाना मुश्किल होता है और इसी तरह transfer हो रहे sensitive information को protect किया जाता है।

आपने किसी website के URL के शुरुआत में https:// लगा हुआ देखा होगा, इसका मतलब यह है आपका data SSL के trough secured किया गया है। आप Chrome के address bar में ऐसे URL के सामने green color में lock icon के साथ Secure लिखा हुआ देख सकते हैं।

उदाहरण:

HTTPS कैसे काम करता है? जैसा की हमने आपको पहले ही बताया की HTTPS में सारे data encrypt होकर एक end से दुसरे end तक transfer होते हैं इसलिए यदि आपको यह समझना है की HTTPS कैसे काम करता है तो आपको इसके लिए cryptography का concept समझना पड़ेगा।

इसे समझने के लिए आपको निचे दिए गये कुछ terms की जानकारी होनी चाहिए:

Cryptography क्या है?
यह एक method है जिसके जरिये ordinary information (plan text) को unreadable format में convert किया जाता है जिसे केवल authorized user ही read कर सकता है।

Public and Private Keys क्या हैं?
Cryptography में communication को private और secure रखने के लिए दो प्रकार के keys का बहुत ज्यादा उपयोग किया जाता है एक "public key" और दूसरा "private key" जिनका use करके data encryption और decryption किया जाता है।

इस काम के लिए कुछ algorithms बने हुए हैं जिनसे keys generate किया जाता है; private key को अपने पास रखा जाता है और वहीं public key को publicly distribute कर दिया जाता है।

यदि कोई आपको secrete message send करना चाहता है वह आपके द्वारा दिए गये public key से message को encrypt कर देता है जिसे आपको read करने के लिए अपने private key से decrypt करना होगा।

Session Key क्या है?
यह भी एक प्रकार का encryption decryption key है जो की randomly generate होता है और एक निश्चित session यानि की निश्चित समय लिए valid रहता है और फिर इसकी validity खत्म हो जाती है।

Symmetric Encryption क्या है?
जब आप user और website दोनों तरफ से same key के जरिये encryption करते हैं तो इसे symmetric encryption कहते हैं और उस key को symmetric key कहते हैं।

चलिए इतना कुछ समझने के बाद वापस अपने topic पर आते हैं और step by step यह समझने की कोशिश करते हैं की आखिर HTTPS encryption कैसे काम करता है:
  1. मान के चलिए आप browser में Facebook किसी वेबसाइट का address type करते हैं और enter press करते हैं।
  2. आपका browser Facebook के server को HTTPS connection के लिए request करता है।
  3. Facebook अपना public key आपको send करता है और private key अपने पास रखता है।
  4. आपका browser एक तीसरा key generate करता है जिसे session key कहते हैं।
  5. आपका system session key को Facebook द्वारा दिए गये public key से encrypt करता है और उसे Facebook को send कर देता है।
  6. अब उस session key को Facebook का server अपने private key से decrypt करता है। अब आपके browser और server दोनों के पास session key उपलब्ध है।
  7. अब यहाँ पर session key एक तरह से symmetric key की तरह काम करेगा और symmetric encryption के जरिये आपका connection तब तक स्थापित रहेगा जब तक आप साईट close न कर दें।
How-https-work-in-hindi


HTTP और HTTPS में क्या अंतर है?
  • HTTP URL की शुरुआत http:// से होती है जबकि HTTPS URL https:// से शुरू होता है।
  • HTTP एक unsecured protocol है जबकि HTTPS secured है।
  • HTTP में encryption नही होता लेकिन HTTPS connection के लिए encryption जरुरी है।
  • Security certificate की हम बात करें तो HTTP में इसकी जरुरत नही होती लेकिन HTTPS में website की identity के लिए यह जरुरी है।
  • HTTP में data transfer port 80 के जरिये होता है जबकि HTTPS में port 443 का उपयोग होता है।
  • किसी blog या school, college जैसे website जो की information share करने के लिए बनाये गये हैं HTTP का use कर सकते हैं लेकिन shopping sites, social sites, banking जैसे sites को HTTPS use करना चाहिए है ताकि sensitive data जैसे password, credit card detail आदि सुरक्षित रहें।

आज के समय में हर कोई internet का उपयोग करता है ऐसे में हर किसी को पता होना चाहिए की HTTP और HTTPS क्या हैं इनका क्या उपयोग है। इसके अलावा HTTP और HTTPS में क्या अंतर है यह भी पता होना चाहिए ताकि हम अपने data को internet पर securely एक end से दुसरे end तक transfer कर सकें।

आपको यह जानकारी कैसी लगी हमें comment के माध्यम से जरुर बताएं।

Saturday, 16 June 2018

JavaScript में var, let और const Keywords के बीच क्या अंतर है?

Js-variable-var-let-const

हमने JavaScript basic tutorial में var keyword का use करके variable create करने का तरीका बताया था लेकिन var के अलावा let और const keywords के जरिये भी वेरिएबल बनाये जा सकते हैं। लेकिन इन तीनो keywords से बनाये गये variables के बीच कुछ अंतर होता है, जिनके बारे में आज हम इस article में चर्चा करने वाले हैं।

JavaScript var vs let vs const


Var Keyword
Var का use करके variable बनाने का तरीका बहुत पुराना है और आजकल modern scripts में आपको यह देखने को कम ही मिलेगा हाँ यदि आप किसी पुराने programs को देखें तो वहां इसका उपयोग जरुर देखने को मिलेगा इस लिए आपको इसकी जानकारी भी होनी चाहिए।

Var का Scope:  किसी variable के scope का मतबल एक ऐसे area से है जहाँ उस वेरिएबल को access किया जा सकता है। 
  • var keyword से create किये गये variable का scope global भी हो सकता है और local भी 
  • Global scope का मतलब उस वेरिएबल को declare करने के बाद script में कहीं पर भी use किया जा सकता है।
  • Local variable का मतलब यह उस वेरिएबल को script के किसी particular area में ही उपयोग किया जा सकता है।
  • var keyword से यदि किसी function के बाहर variable को declare किया जाए तो वह global variable होगा, वहीँ यदि किसी function के अंदर वेरिएबल बनाया जाय तो उसका scope केवल उसी function के अंदर ही होगा और वह एक local variable कहलायेगा।
  • var variable को script में एक से अधिक बार re-declare किया जा सकता है और उसकी value को बार-बार update में कर सकते हैं।
इन सारे points को समझने के लिए आप नीचे दिये गये examples को देखें:

var im_global = "Hello everyone";
function sayhi(){
var im_local = "Hi";
}
इस उदाहरण में हमने var keyword का use करके im_global और im_local नाम के दो variables create किया है।

im_global को function के बाहर declare किया है इसलिए यह global variable है जबकि im_local को function के अंदर declare किया गया है जिसका scope उस function के अंदर ही है और इसे function के बाहर use नही किया जा सकता इसलिए यह एक local variable है।

यदि हम im_local को function के बाहर access करें तो क्या होगा?
var im_global = "Hello everyone";
function sayhi(){
var im_local = "Hi";
}
alert(im_local);  // Error: im_local is undefined
Local variable को उसके scope से बाहर access नही किया जा सकता, ऐसा करने पर error आएगा।

Var variable को re-declare भी किया जा सकता है। जैसे:
var website = "google.com";
var website = "webinhindi.com";
इसके अलावा इसे एक बार declare करके इसकी value को बार-बार update भी कर सकते हैं। जैसे:
var language = "English";
language = "Hindi";

Var की कमजोरी यह है की यदि किसी global variable को if statement block के अंदर re-declare करके value assign किया जाता है तो global variable की value भी update हो जाती है। 

इसका उदाहरण देखें:
var value=10;
if(true){
value=20;
}
alert(value); // 20
अब नीचे के उदाहरण में देखें यदि variable को if block के अंदर declare किया जाय तो वह उस block से बाहर भी visible होगा।
if(true){
var marks=30;
}
alert(marks); // 30
ठीक ऐसा ही loop के साथ भी होता है।
for (var i = 0; i < 10; i++){
 // ...
}
alert(i); // 10, i ki value loop se bahar bhi visible hai. yah global variable ban jata hai.

हालांकि यह कोई समस्या नही है लेकिन ऐसी स्थिति में आपको विशेष ध्यान रखना होगा की variable की value बिना गलती से override ना हो जाए।

Let Keyword Let भी var की तरह ही है लेकिन आजकल var की जगह let का use होता है क्योंकि var में जो कमियां थीं उन्हें let keyword में दूर किया गया है।
  • let के जरिये हम block scoped variable बना सकते हैं। यहाँ block का मतलब उस हिस्से से है जो की curly braces {} के अंदर होता है। block के अंदर let keyword से declare किया गया variable सिर्फ उसी block के अंदर ही available होगा।
  • let variable को update तो किया जा सकता है लेकिन var की तरह एक ही block में बार-बार re-declare नही किया जा सकता। हाँ हम same variable को अलग-अलग block में declare कर सकते हैं।
चलिए अब इन points को समझने के लिए कुछ examples देखते हैं:

if(true){
let marks = 60;
alert(marks); //output 60
}
alert(marks); // error: marks is not defined
इस उदाहरण में आप देख सकते हैं की हम if block के अंदर declare किये गये variable को block से बाहर access नही कर सकते जबकि var के साथ ऐसा किया जा सकता था।

हम variable को same block में update तो कर सकते हैं लेकिन re-declare नही कर सकते:
let marks = 50;
marks = 60;

लेकिन नीचे के उदाहरण में error आएगा क्योंकि हम यहाँ एक ही block में दो बार variable declare कर रहें हैं जो की let में allow नही है।
let time = 2;
let time = 3; // syntax error
लेकिन हम अलग-अलग scope में same name के variable को re-declare कर सकते हैं जैसे:
let quantity = 10;
if(true){
let quantity =11;
alert(quantity); // output 11
}
alert(quantity); // output 10
यहाँ पर हमने quantity नाम से दो variables declare किये हैं लेकिन फिर भी कोई error नही है क्योंकि इन दोनों के scope अलग-अलग हैं और इसी वजह से इन्हें अलग-अलग समझा जाता है भले ही इनके नाम एक जैसे क्यों न हों।

Const Keyword यदि किसी variable की value हमेशा constant रखनी है यानि की change नही करनी है तो ऐसी स्थिति में constant variable का use किया जाता है और ऐसे वेरिएबल को बनाने के लिए const keyword का उपयोग होता है।
  • Const variable में एक बार value assign करने के बाद दुबारा उसे update नही किया जा सकता।
  • इसे re-declare भी नही किया जा सकता।
  • Const variable को declare करते समय उसे initialize यानि value assign करना जरुरी है।
  • Let की तरह const variable भी block scoped होता है यानि जिस block अंदर declare किया गया हो उसी block में ही उसे access किया जा सकता है।
चलिए अब const variable के उदाहरण देखते हैं:

Const variable को update और re-declare नही कर सकते ऐसा करने से error आएगा जैसे:
const DOB = '22.05.1993';
DOB = '25.05.1992'; // error can't reassign the constant
इसे दोबारा declare भी नही किया जा सकता:
const ADMIN = 'Amit';
const ADMIN = 'Vinay'; // error can't re-declare the constant


उम्मीद है आपको JavaScript में var, let और const keywords के बीच क्या अंतर है और variable बनाते समय इनमे से कौन से keyword का कब और क्यों use करना चाहिए यह समझ आ गया होगा।

यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं  या सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे comment box का जरुर उपयोग करें।

Friday, 8 June 2018

10 कारण आपको JavaScript क्यों सीखना चाहिए?

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आज गूगल, फेसबुक, Youtube से लेकर दुनिया में जितनी भी websites हैं उनमे से लगभग 95% sites पर किसी न किसी रूप में Javascript का use हो रहा है। यदि आप कोई interactive website बनाना चाहते हैं तो आपको जावास्क्रिप्ट में कोडिंग जरूर आनी चाहिए। इसे सीखने के बाद आप सिर्फ वेबसाइट ही नही बल्कि Mobile apps, desktop applications, browser extensions जैसे कई सारी चीजें भी बना सकते हैं।

तो चलिए आज हम ऐसे 10 कारणों के बारे में बात करते हैं जिनकी वजह से Javascript सीखना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है:

JavaScript क्यों सीखें? 10 कारण 

1. सीखना आसान है आपके पास किसी programming language का पहले से कोई experience हो या न हो आप JavaScript आसानी से सीख सकते हैं। हाँ यदि आपने कभी C, C++ जैसे languages में coding की है तो जावास्क्रिप्ट सीखना आपके लिए बहुत ही आसान होगा क्योंकि इनमें code लिखने के तरीके और syntax काफी मिलते-जुलते हैं।

यदि आप JavaScript की basics सीख लेते हैं और इसके fundamentals को अच्छी तरह से समझ लेते हैं तो JavaScript में advanced level की programming कर पाना भी आपके लिए आसान हो जायेगा।

2. सबसे ज्यादा Popular Programming Language Stackoverflow के द्वारा 2018 में पूरी दुनिया के 100,000 developers के बीच किये गये survey के अनुसार most popular programming languages की list में Javascript सबसे ऊपर है।

Stackoverflow की बात करें तो यह programmers और developers की एक बहुत बड़ी community है जहाँ coding से related question answers किये जाते हैं। इस platform पर हर 3 seconds में JS से related एक question पूछे जाते हैं इससे पता चलता है की जावास्क्रिप्ट पर कितने लोग काम कर रहें हैं और यह कितना popular है।
top 10 programming languages


3. बिलकुल मुफ्त अगर आप जावास्क्रिप्ट में coding करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए किसी भी प्रकार से पैसे खर्च करने की जरुरत नही है। इसके लिए किसी महंगे tool को खरीदने या किसी को पैसे देने की जरूरत नही है आप एक simple text editor में कोडिंग कर सकते हैं और web browser (जो की हर किसी के system में पहले से मौजूद होता है) से शुरुआत कर सकते हैं।

4. Web Browser ही काफी है किसी अन्य programming languages की तरह JS में किसी भी तरह का compiler install करने, software download करने या environment set करने की बिलकुल जरुरत नही है। यह एक interpreted language है, इसके लिए किसी विशेष editor की जरुरत नही है आप notepad में कोड लिखिए और सीधे browser में run कर दीजिये। सारे modern browsers JS support करते हैं।

5. Server-Side Programming भी कर सकते हैं शुरुआत में JS का use केवल front-end या client side programming के रूप में किया जाता था लेकिन अब Node.js जैसे frameworks के जरिये जावास्क्रिप्ट को एक server side scripting के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।

यहाँ पर client side scripting का मतलब ऐसे script या program से है जो की browser पर run होता है लेकिन server side scripting में इसके विपरीत यानी की हमारा program server पर execute होता है और उसके जो भी output होते हैं वे html page के रूप में browser पर दिखाई देते हैं।

6. Frameworks & Libraries की सुविधा जावास्क्रिप्ट की एक और अच्छी बात यह है की इसमें किसी भी काम को करने के लिए आपको पहले से बने हुए frameworks और libraries मिल जायेंगे और वो भी बिलकुल मुफ्त में जिनकी वजह से JS में काम करना और भी आसान हो जाता है।
JS Frameworks

7. Mobile Apps बनायें जैसा की आपको पता होगा एक Android app बनाने के लिए Java में प्रोग्राम लिखा जाता है, वहीं iOS app के लिए आपको Objective-C आनी चाहिए और Windows apps बनाने के लिए आपको .NET ज्ञान होना चाहिए।

लेकिन क्या आपको पता है Javascript से mobile apps भी बनाये जा सकते हैं और वो भी cross-platform यानि की ऐसे apps जो की Android, iOS और Windows सभी तरह के platforms पर चल सकते हैं।

इसके लिए आपको एक framework की जरुरत होगी जैसे Ionic, React Native, PhoneGap आदि जिसमें आप Javascript, HTML और CSS की coding करके cross-platform mobile apps तैयार कर सकते हैं।

8. Video Games भी बना सकते हैं जी हाँ! आप जावास्क्रिप्ट से video games भी बना सकते हैं। इसके लिए कई सारे frameworks हैं जैसे Pixi.js, Babylone.js, Phaser.js आदि  जिनके जरिये browser games develop किया जा सकता है जो की computer, mobile से लेकर tablets पर भी चलाये जा सकते हैं। इसके अलावा कुछ और भी game engines हैं जो की JS की कोडिंग के जरिये गेम बनाने की सुविधा प्रदान करते हैं।
JS Game

9. हर जगह जावास्क्रिप्ट Website का UI हो या server side script, desktop application बनाना हो या mobile apps यहाँ तक की smart tv जैसे devices को चलाने के लिए भी Javascript का use हो रहा है।

10. Jobs/ Career Opportunities ऊपर के points पढने के बाद आपको यह तो clear हो ही गया होगा की यदि Javascript सीख लिया जाय तो काम की कमी नही होगी क्योंकि इसका use लगभग हर जगह हो रहा है। आज के समय में बिना जावास्क्रिप्ट सीखे web development का काम करना बहुत मुश्किल है।

इसे सीखने के बाद आपके पास कई सारे career opportunities होंगे। छोट-बड़ी लगभग हर IT company में Javascript developer की demand होती है आप चाहें तो किसी company में job के लिए apply कर सकते हैं या घर बैठे freelancing भी कर सकते हैं।

लेकिन ध्यान रहे यदि आपको इस क्षेत्र में बेहतर career बनाना है तो Javascript के साथ कम से कम HTML, CSS और किसी एक framework का अच्छा knowledge रखना जरुरी है।

यदि आप Javascript, HTML, CSS और jQuery सीखना चाहते हैं तो निचे दिए गये कुछ tutorials आपको जरुर पढने चाहिए:
तो आज इन 10 कारणों को जानने के बाद आपको यह पता चल गया होगा की आज के समय में आपको Javascript क्यों सीखना चाहिए। उम्मीद है आपको यह जानकारियाँ पसंद आई होंगी। इस बारे में आप अपनी राय नीचे comment के जरिये जरूर रखें।

Wednesday, 30 May 2018

JavaScript Tutorial in Hindi - सिर्फ 20 मिनट में Basic जावास्क्रिप्ट सीखें हिंदी में

Javascript Tutorial in Hindi

Learn JavaScript in Hindi: कुछ दिनों पहले हमने एक article लिखा था जिसमे हमने आपको जावास्क्रिप्ट के बारे में बताया था की आखिर Javascript क्या है और इसके क्या उपयोग हैं। आज इस article में हम आपके लिए Javascript की basic tutorial लेकर आये हैं जिससे आप जावास्क्रिप्ट की basic fundamentals सीख सकते हैं।
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Thursday, 10 May 2018

Raster और Vector Graphics क्या है? दोनों में क्या अंतर है? कब किसका use करें?

raster vs vector image in hindi
Digital graphics को हम दो categories में divide कर सकते हैं: raster और vector. अगर आप इन दोनों graphics को लेकर confusion में हैं तो आपको यह article जरूर पढना चाहिए क्योंकि आज हम इन्ही दोनो के बारे में बातें करने वाले हैं।