Monday, 27 August 2018

प्रॉक्सी सर्वर क्या है? इसका कैसे उपयोग करें? पूरी जानकारी - Proxy Server in Hindi

क्या आपके स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया गया है? अगर हाँ तो आप उसे प्रॉक्सी के माध्यम से बड़ी आसानी से खोल सकते हैं। हालांकि हम आपको ऐसा करने का सुझाव तो नही देते लेकिन आज हम आपको यह जरुर बताएँगे की प्रॉक्सी सर्वर क्या है? यह किस काम आता है? इसके कितने प्रकार होते हैं? साथ ही हम आपको यह भी बताएँगे की इसके उपयोग से आपको क्या फायदे और क्या नुकसान हो सकते  हैं।
प्रॉक्सी सर्वर क्या है इसका कैसे उपयोग करें पूरी जानकारी - Proxy Server in Hindi


प्रॉक्सी सर्वर क्या है? (What is Proxy Server in Hindi?) आपने प्रॉक्सी वोटिंग का नाम जरूर सुना होगा जिसमे चुनाव के समय यदि कोई व्यक्ति उपस्थित न हो तो वह अपना वोट अपने परिवार के किसी दुसरे सदस्य द्वारा डाल सकता है। हम इन्टरनेट पर मौजूद किसी वेबसाइट को देखने के लिए भी ठीक ऐसा ही कर सकते हैं। हम website को अपने computer system पर देख तो सकते हैं लेकिन वेबसाइट के server से connect होने वाला system कोई और ही होता है जिसे proxy server कहा जाता है।

हम किसी website को सीधे अपने कंप्यूटर से access न कर के किसी proxy server के द्वारा access कर सकते हैं। यहाँ पर प्रॉक्सी सर्वर user और website के server के बीच एक माध्यम या प्रतिनिधि का काम करता है।

proxy kya hai

जब आप कोई request send करते हैं तो वह proxy server से होते हुए वेबसाइट तक पहुँचता है और वेबसाइट की तरफ से किसी प्रकार का response या content प्रॉक्सी सर्वर से होते हुए आपके कंप्यूटर तक पहुँचता है।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा की यदि प्रॉक्सी का यही काम है तो हम इसका उपयोग क्यों करते हैं? हम सीधे अपने कंप्यूटर से वेबसाइट को एक्सेस क्यों नही कर लेते?

दरअसल प्रॉक्सी का काम सिर्फ यही नही है इसके अलावा यह security और network performance से जुड़े और भी कई सारी सुविधाएँ प्रदान करता है जिनके बारे में आप नीचे पढ़ेंगे।


प्रॉक्सी सर्वर कैसे काम करता है? (How Proxy Server works in Hindi?) जैसा की आप जानते हैं की इंटरनेट से जुड़े सभी computers के अपने-अपने unique IP address होते हैं जो की उन computers का identification बताते हैं और इसी आईपी एड्रेस के जरिये ही इन्टरनेट को पता चलता है की कौनसा कंप्यूटर किस location पर है ताकि सही data सही computer तक पहुँचाया जा सके।

Proxy server भी एक प्रकार का computer होता है और इसका भी एक unique IP address होता है। आपको जब कोई resource (जैसे कोई वेबसाइट या फाइल) चाहिए होता है तो उसके लिए आपका कंप्यूटर सबसे पहले proxy server को request (http, https, ftp) भेजता है।

प्रॉक्सी सर्वर को request मिलते ही वह आपके लिए वही request उस destination server को भेज देता है जहाँ पर वह resource (website या file) store रहता है। आपके कंप्यूटर और सर्वर के बीच सीधे तौर पर कोई communication नही होता इसलिए सर्वर को आपकी IP का पता नही चल पता इससे आपके सिस्टम की पहचान छुप जाती है।

प्रॉक्सी सर्वर का क्या उपयोग है? (Use of Proxy Server in Hindi) Proxy का उपयोग ज्यादातर security reason से अपना IP address hide करने के लिए किया जाता है इसके अलावा किसी blocked website को access करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। चलिए अब विस्तार से जानते हैं की आखिर प्रॉक्सी सर्वर का क्या काम होता है और इसका क्यों उपयोग किया जाता है:
  • इंटरनेट की स्पीड बढाने के लिए: किसी organization में एक अच्छा proxy server लगा कर network performance को increase किया जा सकता है। प्रॉक्सी सर्वर किसी वेबसाइट या फाइल को अपने cache memory में store कर लेता है इससे जब भी आप उस website को देखना चाहें तो वह सीधे प्रॉक्सी सर्वर के local storage से आप तक पहुँच सकता है यानी वेबसाइट के server को request भेजने की जरूरत नही पड़ेगी, इससे समय और bandwidth की बचत होगी। 
  • आईपी एड्रेस को छिपाने के लिए: यदि आप किसी वेबसाइट को सीधे अपने computer से access करते हैं वह सर्वर जहाँ उस website को host किया गया है उस तक आपका IP address पहुँच जाता है जिससे आपके location के अलावा आपके बारे में कुछ अन्य personal जानकारियाँ जुटाई जा सकती हैं। लेकिन आप procy की मदद से अपनी IP और अन्य identiy छिपा सकते हैं।
  • मोनिटरिंग के लिए: आप अपने ऑफिस में प्रॉक्सी सर्वर लगा कर उसकी मदद अपने employee द्वारा इन्टरनेट उपयोग पर नजर रख सकते हैं इसके अलावा अभिभावक अपने घर में इसे लगाकर यह पता लगा सकते हैं की उनके बच्चे कौन-कौन सी website पर visit करते हैं।
  • ब्लॉक किये गये वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए: आपने देखा होगा की आपके स्कूल, कॉलेज, या ऑफिस के computer में कुछ restrictions लगे होते हैं जिससे आप इन्टरनेट पर कुछ चीजों को देख नही पाते हैं इसके अलावा geographic location या country के अनुसार कंपनी या सरकार द्वारा भी कई websites पर ban लगे होते हैं इन सारी security restrictions और filters को bypass करने के लिए proxy का use किया जा सकता है।
  • सिस्टम की सुरक्षा बढाने के लिए:  किसी भी organization के लिए अपने server hack होने और data loss होने खतरा हमेशा बना रहता है। इस मामले में proxy काफी हद तक कुछ benefit provide करता है। आप अपने प्रॉक्सी सर्वर को configure करके client और server के साथ हो रहे communication को encrypt कर सकते हैं जिससे कोई third party उसे read न कर सके। आप malicious websites को block भी कर सकते हैं। Proxy server आपके सर्वर और outside traffic के बीच एक extra security layer जोड़ देता है। Hackers आपकी प्रॉक्सी सर्वर तक पहुँच तो सकते हैं लेकिन आपके actual server जहाँ सारा data store है वहां पहुँचने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि प्रॉक्सी सर्वर लगा लेने और IP बदल लेने से ही आपका system हैक होने से पूरी तरह बचा रहेगा यह मुमकिन नही है लेकिन प्रॉक्सी से आप कुछ हद तक सुरक्षा तो बढ़ा ही सकते हैं।
प्रॉक्सी सर्वर कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Proxy Server in Hindi)
  1. Forward Proxy: यह client के request को target server में forward कर देता है जिससे दोनों के बीच communication हो सके। यहाँ पर client proxy sever को यह specify करता है की उसे कौन सा resource चाहिए और इस रिक्वेस्ट को प्रॉक्सी उस टारगेट सर्वर तक पहुँचा देता है जहाँ वह resource उपलब्ध होता है। 
  2. Open Proxy: Open proxy भी एक प्रकार का forwarding proxy होता है जो की publicly available होता है जिससे कोई भी internet user अपना ip hide करके anonymous browsing कर सकता है। नीचे open proxy के कुछ प्रकार दिए गये हैं:
    1. Anonymous Proxy: यह simply client के IP को छिपा देता है ताकि टारगेट सर्वर को client के origin के बारे में पता न चल सके। लेकिन इससे target server को proxy की identiy मिल जाती है।
    2. Distorting Proxy: यह website को अपनी identity तो बताता है लेकिन client के लिए false IP address pass करता है।
    3. High Anonymity Proxy: इस प्रकार की प्रॉक्सी को track कर पाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि यह वेबसाइट को न तो अपनी identity देता है और न ही client की IP pass करता है और बार-बार IP बदलता रहता है। यह इन्टरनेट पर अपनी पहचान छिपाने का सबसे सुरक्षित तरीका है इसका एक उदाहरण TOR network है।
  3. Reverse Proxy: यह ऊपर दिए गये सभी proxies से उल्टा होता है यहाँ पर client को यह पता नही होता की वह proxy से communicate कर रहा है उसे लगता है की वह सीधे actual server से contect कर रहा है जबकि सारे request और response proxy से हो कर गुजरते हैं। इसका उपयोग बड़ी-बड़ी companies जैसे की Google आदि द्वारा अपने server की security improve करने, load को कम करने, और speed बढ़ाने के लिए किया जाता है।

प्रॉक्सी सर्वर से क्या खतरा हो सकता है? (Risks of Proxy Server in Hindi)
प्रॉक्सी का उपयोग करके आप अपनी पहचान छिपाकर इन्टरनेट पर घूम-फिर सकते हैं और कई तरह के फायदे ले सकते हैं लेकिन ध्यान रहे आप जिस प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग कर रहें हैं उसके पास आपके सारे information हो सकते हैं इसलिए इसके उपयोग से आपको कई प्रकार के खतरे का भी सामना करना पड़ सकता है आपका connection सुरक्षित है या नही यह निर्भर करता है की आपका प्रॉक्सी सर्वर किस प्रकार से configure किया गया है और उसे कौन monitor कर रहा है।

इसके उपयोग से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं इस बारे में हमने नीचे बताने की कोशिश की है:
  • Data चोरी होने का खतरा: आप किसी वेबसाइट को अपना data दे रहें हैं तो यह डाटा आपके device और website के सर्वर के बीच मौजूद proxy server से हो कर गुजरेगा इस data में आपके sensitive information जैसे user name और password भी हो सकते हैं। ऐसे में यदि आप किसी गलत proxy का चुनाव करते हैं तो आप समझ सकते हैं की आपको कितना नुकसान हो सकता है।
  • Spam और virus attack का खतरा: ऐसा भी हो सकता है जब आप प्रॉक्सी सर्वर से जुड़ें तो आपके screen पर कई सारे ads दिखाई दें कई बार पैसे कमाने के लिए ये proxy servers आपके system में spam और viraus program भी install करने की कोशिश कर सकते हैं।    
  • Identity Theft: आप अपनी identity छिपा कर internet पर मौजूद किसी भी वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं यदि दुसरे शब्दों में कहें तो आप अपने system की IP के बजाय किसी दुसरे की IP address use कर रहे होते हैं। लेकिन आपकी IP और अन्य identity के बारे में उस प्रॉक्सी को पता होता है। जिस प्रकार आप किसी दुसरे की IP use कर रहे होते हैं ठीक ऐसे ही यदि आपकी identity का उपयोग इंटरनेट पर किसी illegal activity के लिए किया जाय तो इससे आपको काफी परेशानी हो सकती है।
प्रॉक्सी सर्वर का कैसे उपयोग करें? (How to use Proxy Server in Hindi?)
चलिए अब जानते हैं की यदि आपको प्रॉक्सी सर्वर से अपने system को connect करना है तो इसके लिए क्या करना होगा। Anonymous browing के लिए आप नीचे दिए गये दो आसान तरीकों से proxy server का उपयोग कर सकते हैं:

1. Web based proxy का उपयोग करके:
यह सबसे आसान तरीका होता है, इसमें आपको किसी proxy website का उपयोग करना होता है। इसके लिए सबसे पहले Google में "Best free online proxy" लिखकर सर्च करें आपको ऐसे कई वेबसाइट मिलेंगे जो मुफ्त में प्रॉक्सी की सुविधा प्रदान करते हैं।

यह बहुत ही आसान तरीका होता है की आप किसी proxy website का उपयोग करें जहाँ पर सिर्फ आपको एक textbox में उस website का address डालना होता है जिसे आप visit करना चाहते हैं।

उदाहरण के लिए आप नीचे एक screenshot देख सकते हैं:

Free proxy website

2. Web browser का उपयोग करके:
इस method में आप अपने ब्राउज़र का उपयोग करते हैं लेकिन यहाँ पर आपको किसी भी प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्ट होने के लिए आपको सबसे पहले उसकी IP address और port number की जानकारी होनी चाहिए इसके लिए आप गूगल में सर्च कर सकते हैं। IP और port मिलने के बाद आप अपने browser की setting में जाएँ proxy setting को configure करें।

Google Chrome में proxy कैसे use करें?
  • सबसे पहले आप settings में जाएँ 
  • "Advanced" पर क्लिक करें
  • नीचे स्क्रॉल करें और "System" वाले section में जाएँ 
  • "Open proxy settings" पर click करें 
  • "LAN Settings" के button को दबाएँ 
  • "Use a proxy server for your LAN" के checkbox को enable करें
  • Address में proxy का IP address और port वाले बॉक्स में port number डालें
  • Save करके Apply करें
  • अब आप Google Chrome में anonymous browsing कर सकते हैं 
Firefox में proxy कैसे use करें?
  • Options (Windows) या Preference (Mac) में जाएँ 
  • "Advanced" पर click करें 
  • "Network" tab में जाएँ 
  • "Connection" section में जाकर "Settings" पर क्लिक करें 
  • "Manual Proxy Configuration" को select करें 
  • अब proxy का address और port number enter करें 
  • "Use this proxy server for all server protocols" को enable करें 
  • सेटिंग को save करें 

Conclusion
जैसा की आपने ऊपर पढ़ा की proxy server के कई सारे फायदे हैं लेकिन इसके कुछ disadvantages भी हैं लेकिन ऐसा भी नही है की सारे प्रॉक्सी में ऊपर दिए गये सारे फायदे या नुकसान हो यह निर्भर करता है उसके configuration और administrator पर। किसी भी प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग करने से पहले आपको उसकी सारी जानकारियाँ होनी चाहिए, आपको यह पता होना चाहिए की उस पर trust किया जा सकता है या नही। हमारी आपसे यही सलाह है की किसी भी public proxy का उपयोग करते समय सावधानी से काम लें और अपने sensetive information जैसे user name, password, credit card detail आदि provide न करें।

हमें उम्मीद है आपको Proxy server की यह जानकारियाँ पसंद आई होंगी। ऐसे ही और भी जानकारियों के लिए आप हमारी इस वेबसाइट WebinHindi पर आते रहें। आप नीचे comment box में अपने विचार या सुझाव भी रख सकते हैं।

Monday, 6 August 2018

Top 40 CSS Interview Questions and Answers in Hindi

CSS Interview Questions in Hindi- आज हम आपके लिए CSS के top 40 questions और उनके answers ले कर आये हैं जो की अधिकतर web designers और developers से interview या exam में पूछे जाते हैं। हमने इसे हिंदी में सिर्फ इसलिए तैयार किया है ताकि इसे आसानी से समझा जा सके। यदि आपका कोई इंटरव्यू नही है तो भी आप इसे पढ़ सकते हैं इससे आपको CSS के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी। हमें उम्मीद है CSS से जुड़े ये सारे सवाल और जवाब आपके जरूर काम आयेंगे।

CSS interview questions in Hindi


CSS Interview Questions in Hindi - सीएसएस से जुड़े सवाल और उनके जवाब हिंदी में


1. CSS क्या है?
CSS का full form Cascading Style Sheets है। इसका उपयोग वेब डिजाईन में web page को design करने के लिए किया जाता है। CSS के जरिये HTML element पर style apply किया जाता है। CSS के जरिये कई सारे web pages के layout को एक साथ control किया जा सकता है।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS क्या है? इसके क्या फायदे हैं?

2. CSS को अपने web page पर कितने तरीके से apply किया जा सकता है?
आप तीन तरीके से CSS को अपने पेज पर integrate कर सकते हैं:
  1. Inline method
  2. Internal method
  3. External method

3. CSS के क्या advantages हैं?
  • Website की loading speed fast हो जाती है
  • Design और content को separate किया जा सकता है 
  • Design को manage करना आसान होता है
  • डिजाईन को consistent रखने में मदद मिलती है 
  • Offline browsing किया जा सकता है 

4. External style sheet use करने के क्या-क्या फायदे और नुकसान हैं?
Advantages:
  • एक ही style sheet को अलग-अलग कई documents पर use किया जा सकता है। 
  • एक ही फाइल से आप अलग-अलग page के design को control कर सकते हैं। 
  • Large website को manage करना आसान होता है। 
  • एक बार यह file cache में लोड हो जाए तो अगली बार वेबसाइट की स्पीड बढ़ जाती है।  
Disadvantages:
  • Website को extra file download करना पड़ता है। 
  • जब तब external style sheet load नही हो जाता पेज पर styles apply नही होंगे।  
  • अगर बहुत ही कम CSS codes use हो रहें हैं तो इसके लिए external style sheet बनाने का कोई फायदा नही है। 


5. External style sheet को link करने के का क्या syntax है?
<link rel="stylesheet" href="cssfile.css" style="text/css">


6. Embedded style sheet के लिए कौनसा syntax use होता है? 
Embedded style sheet यानि internal CSS में CSS के कोड को HTML page के <head> section में <style> tag के अंदर लिखा जाता है जैसे:
<head>
<style>
p{
color: red;
}
h1{
background-color: green;
}
</style>
</head>

7. CSS में selector क्या है यह कितने प्रकार का होता है?
CSS में selector यह बताता हम किस element पर style apply करना चाहते हैं। कुछ प्रमुख selectors इस प्रकार हैं:
  • Tag selector
  • Universal selector
  • Class selector
  • ID selector
  • Descendant selector
  • Adjacent sibling selector:
  • Child selector
  • Attribute selectors
और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में code कैसे लिखें? Selectors क्या होते हैं?

8. Class selector और ID selector में क्या अंतर है?
  • Class को define करने के लिए dot (.) का use करते हैं जबकि id के लिए hash (#) use होता है। 
  • Class को किसी html element पर apply करने के लिए class attribute use होता है जबकि id के लिए id attribute का उपयोग होता है।
  • Class को multiple elements पर apply कर सकते हैं जबकि id को सिर्फ एक ही एलिमेंट पर apply करना चाहिए।

9. Attribute selector का क्या काम है?
हम किसी element को उसके attribute के द्वारा भी select कर सकते हैं इसके लिए attribute selector use किया जाता है।
Example:

[href]{color:green;}


10. Universal selector क्या है?
किसी पेज के सभी elements को select करने के लिए इसका use होता है।
*{
margin:0;
padding:0;
}

11. Descendant selector को समझाईये?
अगर किसी ऐसे एलिमेंट पर स्टाइल अप्लाई करना हो जो की किसी दुसरे element के अंदर हो तब इसका use होता है। example के लिए यदि <p> के अंदर <b> element है और हमें इस <b> पर स्टाइल apply करना है तो इसके लिए कुछ इस प्रकार कोड लिखेंगे:
p b{ color: green; }

12. CSS में comments कैसे लिखते हैं? कमेंट लिखने का syntax कुछ ऐसा होता है:
/* your comment here. */

13. किसी element के background में color set करने के लिए कौनसी property use की जाती है? इसके लिए background-color property use किया जाता है।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में Background Properties क्या हैं? इसे कैसे use करें

14. किसी element के background में image set करने के लिए कौनसी property use की जाती है? इस काम के लिए background-image property use होता है।

15. Background image की position को कैसे control किया जाता है? background-position property से हम बैकग्राउंड इमेज के position को change कर सकते हैं।

16. किसी element को rounded shape में कैसे बदलें? आप border-radius में जरुरत के हिसाब से value दे कर किसी भी element के corner को rounded बना सकते हैं।

17. कौन से property से letters के बीच के space को control किया जा सकता है? Letters के बीच space देने के लिए letter-spacing का use किया जाता है।

18. CSS में text-decoration property का क्या काम है? इससे आप किसी text पर underline, overline, strike-through लगा सकते हैं।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में Text Formatting कैसे करें

19. CSS में text-transform property का क्या उपयोग है? Text को uppercase, lowercase आदि में बदलने के लिए इसका उपयोग होता है।

20. CSS में float property का क्या काम है? Float के जरिये आप किसी एलिमेंट को horizontally align कर सकते हैं।

21. Position property की क्या-क्या value हो सकते हैं? इसके 4 value हो सकते हैं:
  1. static
  2. relative
  3. absolute
  4. fixed
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Positioning - Elements की Position कैसे set करें?

22. CSS में Font face कैसे change किया जाता है? Text का font face change करने के लिए font-family use होता है।

23. Pseudo elements क्या हैं? Pseudo elements के जरिये आप किसी element के particular part को style कर सकते हैं। जैसे यदि आप किसी paragraph के पहले लाइन को किसी अलग color में दिखाना चाहते हैं या किसी एलिमेंट के पहले या बाद में कुछ text या symbol add करना चाहते हैं तो Pseudo element यह काम कर सकते हैं।
p::first-line { ... }
.button::after { ... }

24. Pseudo classes क्या हैं? यह Pseudo element जैसा ही है बस अंतर यह है की इससे किसी element पर style तब apply किया जाता है जब वह किसी निश्चित state पर हो। example के लिए किसी hyperlink को आप अलग-अलग states जैसे जब उसपर mouse hover किया गया हो, जब उस पर क्लिक किया जाय, जब वह active state पर हो आदि के अनुसार अलग-अलग कलर दे सकते हैं।
.link:hover { ... }
.link:active { ... }

25. Web page में किसी link का color कैसे change करें?
a:link{ color: red;}

26. !important का क्या काम है? !important के जरिये आप किसी property की value को override कर सकते हैं।
उदाहरण:

a{

color:red;

}

p a{ color:blue !important;}

27. Web safe fonts और fallback fonts क्या हैं? सभी ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउज़रों में सभी fonts install नही होते। web safe fonts वे common fonts हैं जो लगभग सभी system में उपलब्ध रहते हैं आप इन्हें उपयोग कर सकते हैं। लेकिन यदि आप कोई ऐसा font use कर रहे हैं जो सभी के पास नही होता तो इस स्थिति में आपको fallback fonts जरुर specify करना चाहिए ताकि पहला font अगर न installed न हो तो उसकी जगह fallback font display हो सके।

28. CSS box model क्या है? किसी वेब पेज के सारे HTML elements rectangular shape में होते हैं और इनको design करने के लिए CSS में box model का उपयोग होता है इसके 4 parts होते हैं:
  1. Margin
  2. Padding
  3. Border
  4. Content
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Box Model और उनके Properties Hindi में

29. Z-index का use क्यों किया जाता है?
कई बार हमें कुछ elements को एक के ऊपर एक display करना होता है इसके लिए position property use होता है और किस element किसके बाद दिखाना यह z-index से तय किया जाता है जिसकी z-index value सबसे highest होती है वह सबसे ऊपर दिखाई देता है

30. किसी element को inline या block element बनाने के लिए कौन सी property use की जाती है?
इसके लिए display:block; और display:inline; का use होगा।

31. Inline और block element में क्या अंतर है?
  • Inline element: element की जितनी width होती है यह उतना ही space लेता है। ex: <span>, <a>
  • Block element: element उस line की पूरी width का use करता है इसके बार एक line break आ जाता है यानी उस line पर सिर्फ वही content दिखाई देता है। जैसे: <h1>, <div>

32. CSS के जरिये किसी element को hide करने के लिए क्या किया जाता है? इसके लिए तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं:
  1. display:none;
  2. visibility:hidden;
  3. opacity:0;

33. Box shadow और text shadow का code कैसे लिखें? इसके लिए कुछ इस प्रकार कोड लिखें:
box-shadow: 7px 5px 3px #fffff;
text-shadow: 7px 5px 3px #fffff;

34. किसी element की opacity कैसे change करें? इसके लिए opacity property use करें इसकी value 0 से 1 तक होती है। 0 value वह content hide होजाता है जबकि 1 से वह पूरी तरह दिखाई देता है।

35. Cell padding और cell spacing में क्या अंतर है?
  • Cell-padding: इससे content और cell के border के बीच space दिया जा सकता है।
  • Cell-spacing: cells के बीच में space देने के लिए उपयोग होता है।

36. Media query क्या है? इसका क्या काम है? CSS में media query का उपयोग responsive design बनाने के लिए किया जाता है। इसका काम कुछ इस प्रकार होता है:
  • Device की height और width पता करना 
  • Viewport की height और width पता करना 
  • Orientation check करना 
  • Resolution check करना 
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Media Queries - Inroduction in Hindi

37. किसी element से border को कैसे remove करें  इसके लिए border:none; उपयोग करें।

38. Cursor के type को बदलने के लिए क्या करें? इसके लिए cursor property use करें।

39. CSS image sprite क्या है? किसी website में कई सारे अलग-अलग images use करने से उसकी loading speed कम हो जाती है। इस लिए Image sprite का उपयोग करते हैं। इससे कई सारे images को एक ही image में add कर दिया जाता है।

40. Hyperlink से underline कैसे हटायें?
a{
text-decoration:none;
}


उम्मीद है ये CSS interview questions and answers आपके लिए उपयोगी साबित होंगे और आपको इससे अपनी इंटरव्यू की तैयारी करने में मदद मिलेगी। आपको आपके आने वाले इंटरव्यू या exam के लिए हमारी ओर से शुभकामनाएं।

Thursday, 2 August 2018

Server क्या है? इसका क्या उपयोग है? यह कैसे काम करता है?

Server क्या है? what is server in Hindi? आपने सर्वर शब्द कहीं न कहीं जरुर सुना होगा यदि आप ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं तो आपको यह जरुर पता होगा की फॉर्म भरने की अंतिम तारीख में फॉर्म भरने की वेबसाइट का server down हो जाता है। बैंक में लेन-देन करने जाते हैं तो आपने कभी-न-कभी बैंक के कर्मचारी से यह कहते जरुर सुना होगा की आज बैंक का सर्वर डाउन है। आज हम इसी computer server के बारे में बात करेंगे की आखिर सर्वर क्या होता है और इसका क्या काम है? यह कितने प्रकार का होता है? यह कैसे काम करता है? इसके लिए कौनसे hardware और operating system की जरूरत होती है? server की पूरी जानकारी के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें।

server kya hai
सर्वर क्या है? What is server in Hindi? Networking में server एक प्रकार का कंप्यूटर होता है जिसका काम data store करना और network से connected दुसरे computers और devices (जिन्हें client कहा जाता है) को service provide करना होता है।

जब client को किसी प्रकार की जानकारी या data की जरूरत होती है तो वह उससे सम्बंधित सर्वर से संपर्क स्थापित करके उसे उस जानकारी को प्राप्त करने के लिए request भेजता है, रिक्वेस्ट मिलते ही सर्वर कुछ जरुरी process करने के बाद क्लाइंट को जवाब में वह डाटा भेज देता है।

Server का मतलब किसी hardware से भी हो सकता है या software से भी या यह दोनों भी हो सकते हैं। हार्डवेयर की बात करें तो एक powerful processor और स्टोरेज के लिए hard disk सबसे मुख्य भाग होते हैं वहीं सॉफ्टवेयर की बात करें तो ये कुछ ऐसे programs होते हैं जो कि सर्वर के हार्डवेयर का सही तरीके से उपयोग करके अलग-अलग प्रकार के functions और services provide करते हैं।

सर्वर अधिकतर dedicated होते हैं यानी की ये 24 घंटे हमेशा internet से connected रहते हैं और अधिकतर सिर्फ सर्वर का ही काम करते हैं इसके अलावा इस system से कोई भी दूसरा काम नही लिया जाता।

आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में server software install करके उसे भी सर्वर बना सकते हैं लेकिन इस प्रकार के सर्वर को non-dedicated server कहेंगे क्योंकि ये बिना बंद हुए लगातार 24 घंटे काम नही कर सकते।


सर्वर का क्या उपयोग है? किसी भी organization में server का बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य होता है और यह कई सारे जरुरी काम को आसान तरीके से करने में मदद करता है। इसमें install किये गये powerful programs कई तरह के complex tasks जैसे calculation, transactions, billing आदि को security और privacy का ध्यान में रखते हुए कुछ ही seconds में perform कर देते हैं।

सर्वर का मुख्य काम नेटवर्क से जुड़े devices के बीच data या resource शेयर करना होता है इसके अलावा जरुरत के हिसाब से यह कुछ special task को perform करने के लिए किसी विशेष program को run कर सकता है। वैसे तो इसके कई सारे काम होते हैं लेकिन उनमे से कुछ काम इस प्रकार हैं:
  • Client के request को handle करना 
  • Network resources को मैनेज करना 
  • Data storage और transmission के लिए
  • Website hosting के लिए
  • Online video streaming के लिए 
  • Online gaming के लिए
  • Bank में complex transactions के लिए 
आजकल लगभग हर industry, हर office में कम से कम एक सर्वर जरुर इनस्टॉल किया जाता है और उससे ऑफिस के सारे divides को manage किया जाता है इसके अलावा इसके जरिये एक ही डिवाइस जैसे किसी प्रिंटर को वहाँ नेटवर्क से connected कोई भी computer print command दे सकता है।

सर्वर कितने प्रकार के होते हैं? Types of server in Hindi Server के कई सारे प्रकार होते हैं और सभी अलग-अलग काम के लिए उपयोग किये जाते हैं। इनमे से कुछ ज्यादातर use होने वाले servers के बारे में आप नीचे पढ़ सकते हैं:
  • Web Server: वेब सर्वर HTTP protocol के जरिये किसी web page को आपके browser पर दिखाने का काम करता है। अभी आप एक वेब सर्वर से connected हैं जिसकी वजह से आप यह पेज देख पा रहे हैं।
  • Application Server: यह computer program होता है जो की user और database के बीच चलने वाले applications को manage करता है इसका उपयोग ज्यादातर complex transaction-based application में किया जाता है जब आप बैंक से लेन-देन कर रहे होते हैं तब आप application server का use कर रहे होते हैं।
  • Mail Server: mail send और receive करने के लिए मेल सर्वर का उपयोग होता है।
  • FTP Server: File Transfer Protocol (FTP) के जरिये client और server के बीच file transfer किया जाता है इस दौरान privacy और security का ध्यान रखा जाता है। 
  • Print Server: इस द्वारा हम एक ऑफिस के किसी एक प्रिंटर को वहां के सारे computers से जोड़ सकते हैं ताकि सभी उसका उपयोग कर सकें।
  • Online Gaming Server: गेमिंग सर्वर आजकल काफी popular हो रहा है यह दुनियाभर के gamers को एक साथ जुड़ने और गेम खेलने की सुविधा प्रदान करता है। 
  • Proxy Server: यह user के कंप्यूटर और इन्टरनेट के बीच intermediate का काम करता है इसका उपयोग performance enhancement, privacy और anonymous surfing के लिए किया जाता है।
इन सबके अलावा और भी कई तरह के सर्वर जैसे sound server, fax server, database server, cloud sever, name server (DNS) आदि समय और जरुरत के अनुसार काम में लिए जाते हैं।

Server कैसे काम करता है? How server works in Hindi Server कैसे काम करता है यह समझने के लिए आपको client-server model कैसे काम करता है यह समझना होगा। यहाँ हम web server का example लेते हैं, मान के चलिए की आप फेसबुक की वेबसाइट open करना चाहते हैं इसके लिए आप अपने वेब ब्राउज़र पर जा कर Facebook का website address डालकर enter press करते हैं इसके बाद सबसे पहले DNS (Domain Name Server) को request जाएगा DNS आपके browser को फेसबुक की IP address provide करेगा।

अब उस आईपी एड्रेस के जरिये ब्राउज़र को Facebook के सर्वर का पता चलेगा और उस सर्वर को रिक्वेस्ट भेजा जायेगा request मिलते ही सर्वर Facebook के web page को ढूंढ कर आप तक पहुँचा देगा। यही तरीका होता है client-server के काम करने का।

सर्वर बनाने के लिए कौन-कौन से हार्डवेयर की जरुरत होती है? एक server में कौन-कौन से hardware use होंगे यह depend करता है की आप इसे किस काम के लिए बना रहे हैं और इस पर कौनसा software use करने वाले हैं। जरुरत के अनुसार आपको कम या अधिक capacity वाले hardware की जरुरत होगी।

कुछ server हमारे आम कंप्यूटर से बिलकुल अलग होते हैं उनमे न तो monitor होता है, न ही audio के लिए कोई हार्डवेयर और इसे access करने के लिए किसी remote computer का उपयोग होता है, कुछ सर्वर में मॉनिटर तो होते हैं लेकिन उसपर GUI (Graphical User Interface) नही होता उसे केवल commands के जरिये चलाया जाता है। एक server को उपयोग करने से पहले उसके storage, RAM, processor, operating system का खास ध्यान रखा जाता है।

क्या हम खुद से सर्वर बना सकते हैं? आप चाहें तो अपने laptop या computer को एक server में बदल सकते हैं इसके लिए आपको अपने system में server operating system install करना होगा।  कुछ लोग अपने पुराने system को server बना कर उसमे अपनी website भी host कर देते हैं इस प्रकार के सर्वर को आप छोटे-छोटे काम के लिए use तो कर सकते हैं लेकिन यदि किसी organization या business level की बात करें तो आपको इस काम के लिए dedicated server का ही उपयोग करना चाहिए जो की 24 घंटे data को store, manage और transmit करने के लिए high capability और reliable hardware से बने होते हैं।

सर्वर में कौन सा Operating System उपयोग होता है? जिस प्रकार से हमारा लैपटॉप या कंप्यूटर बिना किसी operating system के नही चलता ठीक वैसे ही एक server को चलाने के लिए भी OS की जरुरत पड़ती है। सर्वर के लिए कुछ अलग तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करना होता है जो की client-server model पर सही तरह से काम करने के लिए बनाये गये होते हैं। कुछ popular server OS इस प्रकार हैं:
  • Window Server 2000
  • Window Server 2003
  • Window Server 2008
  • Window Server 2012
  • Window Server 2016
  • Linux 
  • Red Hat Enterprise Linus (RHEL)
  • Mac OS X server
  • Solaris
अगर आप कोई छोटा सा बिज़नेस चलाते हैं, अपने ऑफिस में 3-4 computers हैं और बहुत ज्यादा data आपको store करना होता है तो इस स्थिति में आपको किसी बढिया server OS के साथ एक सर्वर जरुर सेट कर लेना चाहिए।


Networking में server बहुत ही important part होता है वहीँ इसका सही तरीके से काम करने के लिए 24/7 बिना shut down हुए uptime रहना जरुरी है।  कभी-कभी हद से अधिक traffic या maintenance schedule की वजह server down हो जाता है इस स्थिति में website पर आपने "under maintenance" का message जरुर देखा होगा।


अगर आपको यह आर्टिकल Server क्या है? इसका क्या उपयोग है? यह कैसे काम करता है? अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट के माध्यम से जरुर सूचित करें। यदि कोई सर्वर से जुड़े प्रश्न आपके मन में है तो हमें जरुर बताएं।

Saturday, 28 July 2018

WWW क्या है? क्या यह इंटरनेट से अलग है?

आप रोज इंटरनेट का उपयोग करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की किसी वेबसाइट के एड्रेस से पहले लगने वाले WWW का क्या अर्थ है? आखिर वर्ल्ड वाइड वेब क्या है? (What is WWW in Hindi) यह कैसे काम करता है? इसका इतिहास क्या है? WWW और internet में क्या अंतर है? आज इस article के जरिये हम आपको इन सारे सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगे।
www kya hai?


World Wide Web क्या है? (What is WWW in Hindi?) वर्ल्ड वाइड वेब को web के नाम से भी जाना जाता है यह इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा use होने वाला service है।यह कई सारे web servers और clients को एक साथ जोड़ता है। Web server में HTML documents, images, videos और कई प्रकार के अन्य online contents store रहते हैं जिन्हें वेब की मदद से access किया जा सकता है।

दुनियाभर में जितने भी websites और web pages हैं जिन्हें आप अपने web browser पर देख पाते हैं वे सभी वेब से जुड़े होते हैं और इन्हें access करने के लिए HTTP (HyperText Transfer Protocol) का उपयोग करना होता है।

इसे आप कई सारे web servers का एक collection भी कह सकते हैं। जब भी आप अपने ब्राउज़र के address bar पर किसी वेबसाइट के URL से पहले www लगाएं तो समझ जाएँ की वह वेबसाइट किसी वेब सर्वर पर स्टोर है जो की वेब से जुड़ा हुआ है इसलिए आप उसे access करने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब की मदद ले रहे हैं।

जब भी आप world wide web के जरिये किसी वेबसाइट को access करते हैं तो इस काम के लिए नीचे दिए गये कुछ technologies का use होता है:
  • HTML (HyperText Markup Language):  यह एक प्रकार का language है जिससे web page बनाया जाता है। एक वेबसाइट कई सारे web pages से मिलकर बना होता है।
  • Web Server: सर्वर एक प्रकार का कंप्यूटर होता है जिसमे वेबसाइट के सारे contents जैसे web pages, images, videos आदि को store किया जाता है। सर्वर world wide web से जुड़ा होता है ताकि इन contents को दुनिया के किसी भी कोने से इंटरनेट के जरिये access किया जा सके। 
  • HTTP (HyperText Transfer Protocol): किसी भी computer network में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं जिन्हें protocol कहा जाता है। वेब में कोई information सर्वर से आपके कंप्यूटर तक पहुँचता है तो इसके लिए HTTP protocol का उपयोग होता है।
  • URL (Uniform Resource Locator): यह एक प्रकार का एड्रेस है जो यह बताता है की कोई  document वेब में किस location पर उपलब्ध है।
  • Web Browser: आसान भाषा में यदि कहें तो यह एक software है जिसका उपयोग आप हर दिन अपने कंप्यूटर या मोबाइल में किसी वेबसाइट को access करने के लिए करते हैं। इसमें एक address bar होता है जिसपर URL enter करके उस particular website तक पहुँच सकते हैं।


इसकी शुरुआत कैसे हुई? - वेब का इतिहास (History of World Wide Web in Hindi) वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार सन 1989 में एक ब्रिटिश कंप्यूटर साइंटिस्ट Tim Berners Lee ने किया था तब वे CERN नामक संस्था में एक software engineer थे। वे 'Enquire' नामक एक प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे जिसमे उन्हें उस संस्था में काम करने वालों का एक डेटाबेस बनाना था।

प्रोजेक्ट में काम करते समय उन्हें एहसास हुआ की information को manage करना काफी मुश्किल है क्योंकि data अलग-अलग computer और अलग-अलग program में store थे ऐसे में data को centralize करना और उसे एक जगह स्टोर करना कठिन काम था।

इस समस्या से निपटने के लिए उनके दिमाग में hypertext का concept आया। दरअसल उस समय इंटरनेट की खोज हो चुकी थी और पहले से ही लाखों computers internet से जुड़ चुके थे तो उन्होंने सोचा की क्यूँ न कुछ ऐसा बनाया जाय जिससे इन computers के बीच information का आदान-प्रदान हो सके और उन्होंने हाइपरटेक्स्ट पर काम करना शुरू कर दिया।

Hypertext दरअसल एक तरीका है जिसके जरिये किसी device पर text को display किया जाता है जिसमे hyperlink का उपयोग करके अलग-अलग pages को connect किया जाता है, 'Enquire' प्रोजेक्ट में इसी का उपयोग किया गया था।

Tim चाहते थे की उनके इस सिस्टम के जरिये दुनियाभर के computers के बीच information exchange किया जा सके लेकिन शुरुआत में उनके इस proposal को ठुकरा दिया गया लेकिन उनके बॉस को यह काफी रोचक लगा और उन्होंने Tim को उसपर काम करने का सुझाव दिया।

अक्टूबर 1990 तक Tim ने तीन तरह के technologies HTML, HTTP, और URL का निर्माण कर लिया था जो की Web के लिए foundation का काम करती है इसके अलावा दुनिया का सबसे पहला web browser उन्होंने ही बनाया था।
WWW और Internet में क्या अंतर है? (WWW Vs. Internet) ज्यादातर लोग वर्ल्ड वाइड वेब और इंटरनेट को एक ही समझते हैं जबकि दोनों में अंतर है। इन्टरनेट हमें ईमेल, Telnet, FTP जैसे कई सारे services provide करता है WWW भी उन्ही internet services में से एक है। चलिए जानते हैं इसके अलावा वेब और इंटरनेट में क्या-क्या अंतर है:

Internet WWW
1. इंटरनेट की खोज सन 1960 के दशक में हुई थी। WWW की खोज Tim Berners Lee ने सन 1989 में की थी।
2. इन्टरनेट कई सारे computer networks का एक समूह है यह computers को आपस में केबल, सॅटॅलाइट, ऑप्टिकल फाइबर आदि की मदद से जोड़ता है। वेब को हम इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकारियों का एक समूह कह सकते हैं और ये जानकारियाँ वेबसाइट के रूप में हम तक पहुँचती हैं।
3. पहले इसे ARPANET के नाम से जाना जाता था। वेब को NSFNet कहा जाता था।
4. इंटरनेट IP (Internet Protocol) की सहायता से काम करता है। वेब HTTP (HyperText Transfer Protocol) का उपयोग करता है।
5. यह कई hardware से मिलकर बना है यह एक हार्डवेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर है। इसमें software का उपयोग होता है यानि यह invisible है।
6. इंटरनेट server, router, satellite, cables, towers जैसे hardware से चलता है। वेब को चलाने के लिए web browser, hypertext, protocol, html आदि की जरुरत पडती है।
7. इंटरनेट एक स्वतंत्र नेटवर्क है यह WWW पर निर्भर नही है। बिना इन्टरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब नही चल सकता।
8. नेटवर्क से जुड़े डिवाइस का लोकेशन IP address से पता चलता है। वेब में किसी जानकारी को हम URL के माध्यम से access कर पाते हैं।

World Wide Web कैसे काम करता है? Web एक प्रकार के client-server model पर काम करता है जहाँ आपका web browser client program होता है और सारे information किसी web server पर स्टोर रहते हैं। क्लाइंट सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए सर्वर को रिक्वेस्ट भेजता है जिसके जवाब में सर्वर उन सूचनाओं को वेब पेज के रूप में क्लाइंट को भेज देता है जिसे हम स्क्रीन पर देख पाते हैं। चलिए step by step तरीके से जानते हैं की आखिर World Wide Web कैसे काम करता है:
  1. किसी वेब साईट या वेब पेज  को access करने के लिए आप सबसे पहले वेब ब्राउज़र open करते हैं।
  2. वेब ब्राउज़र के एड्रेस बार में उस वेबसाइट/वेबपेज का URL enter करते हैं।
  3. URL किसी वेब पेज के IP address का एक human readable form होता है जिससे उस वेब पेज का लोकेशन पता चलता है।
  4. HTTP protocol के माध्यम से URL को DNS (Domain Name Server) पर भेजा जाता है।
  5. DNS उस URL को IP address में बदल देता है ताकि system उसे समझ सके और उसे वापस browser को भेजता है।
  6. IP address से browser को पता चल जाता है की वह website/web page कौन से सर्वर में स्टोर है।
  7. उस सर्वर को उस वेबसाइट/वेबपेज को access करने के लिए request भेजा जाता है।
  8. जब सर्वर को वह पेज मिल जाता है तो उसे वह HTML page के रूप में ब्राउज़र को भेज देता है।
  9. HTML पेज को आपका ब्राउज़र आपके स्क्रीन पर render करता है।

वर्ल्ड वाइड वेब के बारे में यह जानकारी आपको कैसी लगी नीचे कमेंट के माध्यम से हमें जरुर बताएं।

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Wednesday, 25 July 2018

Protocol क्या हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?

यदि आप जानना चाहते हैं की computer network में protocol क्या होता है? (What is Protocol in Hindi), यह कितने प्रकार के होते हैं इसके क्या उपयोग और क्या फायदे हैं तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं इस  article को पढने के बाद आप नेटवर्क प्रोटोकॉल को अच्छी तरह से समझ पायेंगे।

protocol kya hai?

Protocol क्या है? कंप्यूटर नेटवर्क में सूचनाओं के सही तरीके से आदान-प्रदान के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं इन नियमों के समूह को प्रोटोकॉल कहा जाता है। किसी नेटवर्क से जुड़े डिवाइस आपस में कैसे communicate करेंगे, उनके बीच डाटा किस format में और किस तरह से ट्रान्सफर होगा और डाटा receive होने के बाद क्या होगा यह  protocol द्वारा ही निर्धारित होता है।

बिना प्रोटोकॉल के कोई भी कंप्यूटर नेटवर्क ठीक तरह से काम नही कर सकता यहाँ तक की इसके बिना इंटरनेट की कल्पना भी नही की जा सकती।

आपने अपने ब्राउज़र के address bar में किसी भी URL से पहले http:// या https:// जरुर लिखा हुआ देखा होगा, दरअसल यह भी एक प्रकार का नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो की सर्वर से किसी वेबसाइट या वेबपेज को लाकर आपके कंप्यूटर स्क्रीन परदिखाने में आपकी मदद करता है।



प्रोटोकॉल का क्या उपयोग है? Protocol कई प्रकार के होते हैं और सभी के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है इसलिए जरूरत के अनुसार अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग प्रकार के प्रोटोकॉल उपयोग किये जाते हैं। प्रोटोकॉल के कुछ common uses इस प्रकार हैं:
  • नेटवर्क में दो devices आपस में कैसे जुड़ेंगे इसका निर्धारण करना 
  • डाटा ट्रान्सफर का method तय करना
  • डाटा का structure या format निर्धारित करना 
  • Transmission की speed तय करना
  • किसी एरर के आने पर उसे मैनेज करना

प्रोटोकॉल कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Protocol)
कंप्यूटर नेटवर्किंग के लिए सॉफ्टवेर तथा हार्डवेयर लेवल पर कई प्रकार के प्रोटोकॉल उपयोग किये जाते हैं जिनमे से कुछ common network protocols कुछ इस प्रकार से हैं:
  • TCP (Transmission Control Protocol): इसका काम इन्टरनेट पर data transfer करने के लिए होता है। यह डाटा को छोटे-छोटे पैकेट्स में विभाजित करके नेटवर्क के जरिये destination तक send कर देता है जहाँ इसे वापस जोड़ लिया जाता है।
  • IP (Internet Protocol): इसके बारे में आपने जरूर सुना होगा यह TCP के साथ मिलकर काम करता है packets को ट्रान्सफर करने के लिए IP का उपयोग एक तरह से addressing के लिए किया जाता है जिसके जरिये final destination तक data को पहुँचाया जाता है।
  • HTTP (HyperText Transfer Protocol): यह client और server के बीच connection स्थापित करता है और world wide web पर document exchange करने के काम आता है। आप अपने browser पर किसी website को इसी प्रोटोकॉल की मदद से access कर पाते हैं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए यह पढ़ें: HTTP और HTTPS क्या है? ये कैसे काम करते हैं? दोनों में क्या अंतर है?
  • FTP (File Transfer Protocol): इसका use client और FTP server के बीच फाइल ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है। किसी अन्य method के मुकाबले FTP द्वारा तेज़ गति से फाइल ट्रान्सफर किया जा सकता है। एफटीपी के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यह पढ़ें: FTP क्या है? यह कैसे काम करता है? पूरी जानकारी हिंदी में
  • SMTP (Simple Mail Transfer Protocol): जैसा की नाम से पता चल रहा है इसका उपयोग इन्टरनेट पर ईमेल भेजने और प्राप्त करने के लिए होता है। 
  • Telnet: किसी एक कंप्यूटर को दूर बैठ कर किसी अन्य कंप्यूटर से संचालित किया जा सकता है इसके लिए remote login की जरुरत होती है और इस प्रकार के connection को establish करने के लिए telenet protocol का उपयोग होता है। Teamviewer software इसका एक अच्छा उदाहरण है।
  • Ethernet Protocol: इस प्रोटोकॉल का बहुत ज्यादा उपयोग होता है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस आदि में LAN connection का उपयोग होता है और इस प्रकार के कनेक्शन के लिए Ethernet का use किया जाता है किसी computer को LAN से connect करने के लिए उसमे Ethernet Network Interface Card (NIC) होना जरूरी होता है।
इसके अलावा और भी कई सारे network protocols हैं जैसे:
  • IMAP (Internet Message Access Protocol)
  • POP (Post Office Protocol)
  • UDP (User Datagram Protocol)
  • MAC (Media Access Control protocol)
  • ARP (Address Resolution Protocol)
  • DNS (Domain Name System protocol)
  • IGMP (Internet Group Management Protocol)
  • SSH (Secure Shell)
  • SSL (Secure Sockets Layer)

प्रोटोकॉल के क्या फायदे हैं? (Advantages of Protocol)
  • अलग-अलग hardware को नेटवर्क से जोड़ना और उनके बीच information share करना और instruction देना काफी मुश्किल काम होता है इसके लिए जरूरी है की sender और receiver दोनों एक ही language में communicate करें और यह काम प्रोटोकॉल द्वारा ही संभव है।
  • इसके international standard की वजह से कई सारे computers को एक साथ जोड़ा जा सकता है और उनके बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में स्थित क्यों न हों।
  • प्रोटोकॉल की वजह से maintenance और installation का काम भी आसान हो जाता है।

प्रोटोकॉल के क्या नुकसान हैं? (Disadvantages of Protocol)
  • जहाँ प्रोटोकॉल का international standard होना फायदेमंद हैं वहीँ इसके standard में कुछ कमियां हों तो यह एक international समस्या भी बन सकता है।
  • Fixed standard होने की वजह से सभी companies और manufacturers को इसे follow करना होता है और इसकी वजह से खुद की कोई नयी technique use करने में परेशानी आ सकती है।
उम्मीद है network protocol के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आप कोई सवाल पूछना या सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट के माध्यम से अपनी बात हम तक जरूर पहुंचाएं।