Sunday, 19 January 2020

सिर्फ 20 मिनट में सीखें HTML हिंदी में - HTML Tutorial in Hindi

Learn HTML in 20 Minute in Hindi- WebInHindi

Learn HTML in Hindi: अगर आप Web Designer या Developer बनना चाहते है या खुद की वेबसाइट बनाना चाहते हैं तब आपको HTML सीखना जरूरी है।

लेकिन इसके अलावा अगर आप कोई Businessman हैं और आपके पास पहले से ही अपनी Company की Website है जिसमें Regular Updates की जरुरत पडती है तो भी Basic HTML सीखना आपके लिये फ़ायदेमंद हो सकता है।

इससे आप खुद अपनी Website में Minor Updates कर सकेंगे और इस काम के लिये किसी Designer को पैसे देने से बच जायेंगे।

आज आप इस HTML tutorial को पढकर अगले 20 Minute में HTML का उपयोग करके एक Simple Webpage बनाना सीख सकते हैं। इसे सीखना बहुत ही आसान है बस आप नीचे दिये गये Steps को Follow करते जायें।

Learn HTML in Hindi -  20 Minutes Tutorial

अभी आप HTML की Basic जानकारी हासिल करेंगे जो कि एक Simple Page Design करने के लिये पर्याप्त है, लेकिन आगे हम आपको इस Blog में Web Design की Advanced knowledge भी देंगे तो आप हमारे साथ जुडे रहने के लिये हमारे Blog को अभी Subscribe कर लें।


HTML क्या है? What is HTML in Hindi
  • HTML (Hyper Text Markup Language) एक भाषा है जिसके जरिये हम Web-Browser को समझाते हैं कि हमारे Webpage के Information ( text, images आदि) को User के Screen पर कैसे Display किया जाये।
  • हमारे पेज का Layout कैसा होगा ये भी हम HTML के Code से ही Browser को बताते हैं।
  • बिना HTML Code के कोई भी वेबपेज Design नही किया जा सकता इस समय जिस पेज को आप अपनी Screen पर देख रहें है इसे भी बनाने के लिये HTML Language का Use किया गया है।
  • HTML File का Extension .html होता है।

HTML Tools
HTML में Code लिखने और Run करने के लिये कुछ Basic Tools की जरूरत होती है जो लगभग सारे Computers में पहले से ही Installed होते हैं |

इसके लिये mainly दो प्रकार के टूल्स की जरूरत पडती है:
  1. Text Editor (जैसे Notepad, Notepad++, Dreamweaver, Coffee Cup आदि)
  2. Web Browser (जैसे Internet Explorer, Google Chrome, Firefox, Safari, Opera आदि)
Text Editor हम Use करेंगे Code लिखने के लिये और Browser में हम बनाये गये HTML File को Run करेंगे।

अगर आपके पास Windows System है तो Notepad और Internet Explorer पहले से ही आपके कम्प्यूटर में Installed होंगे।

HTML Document Structure
अब हम एक html पेज बनायेंगे इसके लिये नीचे कुछ जरूरी Code दिये गए जिसे आप copy करके notepad में paste कर लें और save as करके किसी Folder में save करलें।

ध्यान रहे फ़ाइल को save करते समय save as पर जायें और file के नाम के आगे .html लगायें।

<html>
<head>
<title>My First HTML Document</title>
</head>
<body>
<h1>This is heading</h1>
Hello World!!!
</body>
</html>
अब save किये गये फ़ाइल को Browser मे open करें जो कि कुछ इस तरह दिखाई देगा
html-example-hindi
अब चलिये इस कोड को समझते हैं:
  • एक HTML Page कई सारे Tags से मिलकर बना होता है, और सारे tags उस पेज के किसी न किसी element को दर्शाते हैं जैसे paragraph, image, table आदि।
  • लगभग सारे Tags के opening और closing होते हैं। opening tag कुछ इस तरह होता है: <tag_name> और closing tag में / लगा होता है जैसे: </tag_name>
  • जैसा कि आप ऊपर कोड मे देख सकते हैं सबसे पहले <html> टैग होता है जो html page के शुरुआत को दर्शाता है और Last में </html> लिखा हुआ है जो पेज के अन्त को बताता है।

HTML Page Sections
एक html पेज के mainly दो भाग होते हैं:
  1. Head Section: इस सेक्शन में पेज के बारे में Informations लिखे जाते हैं जो web browser और search engine के काम का होता है। इस section मे mainly तीन type की जानकारियां होती हैं: keywords, description जो कि Google जैसे search engines के काम आता है और तीसरा title जो कि वेबपेज का टाइटल होता है और Browser के title bar में display होता है।
  2. Body Section: यह main content वाला part होता है यहां वो सारी जानकारियां लिखीं जातीं हैं जिसे हम अपने पेज में दिखाना चाहते हैं जैसे: text, image, video आदि।

Background और Text में Color add करना
अपने Webpage को और Attractive बनाने के लिये हम background color, text color और images use कर सकते हैं।

आईये जानते हैं की HTML में background color कैसे डाला जाता है
तो चलिये सबसे पहले हम अपने page का बैकग्राउंड कलर change करते हैं।

ऐसा करने के लिये जो coding हमने पहले की थी उसे फ़िर से notepad में open करते हैं और body tag में एक bgcolor नाम का attribute जोड देते है और उसकी value को blue कर देते हैं जिससे पूरे पेज का background blue हो जायेगा।

Code कुछ इस प्रकार से होगा:


<html>
<head>
<title>My First HTML Document</title>
</head>
<body bgcolor="blue">
<h1>This is heading</h1>
Hello World!!!
</body>
</html>

अब इसे save करें और browser में open करें, कुछ इस प्रकार दिखाई देगा:
heading example
अब हम text का कलर change करते हैं इसके लिये font tag use करेंगे और color attribute में white लिखेंगे। जैसे:
<font color="white">Hello World!!!</font>
अब ये कुछ इस प्रकार से दिखाई देगा:

change font color example

यहां पर हमें font tag use करना होगा नही तो पूरे पेज के सारे text का color white हो जायेगा।

अगर हम अलग-अलग text में different colors डालना चाहते हैं तो हमें अलग-अलग font tag use करने पडेंगे। जैसे:

<font color="white">This is white color text</font>
<font color="yellow">This is yellow color text</font>
<font color="blue">This is blue color text</font>

Image add करना
Visitor के लिये अपने Webpage को और आकर्षक बनाने के लिये हम Images/pictures का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके लिये img tag का use करेंगे

सबसे पहले जिस folder में हमने अपने html page को save किया था उसी folder में एक और फ़ोल्डर बनायें जिसे images नाम दें और इस फ़ोल्डर में कोई भी एक image सेव करें जिसे पेज में दिखाना चाहते हैं।

अब इमेज डालने के लिये कोड कुछ इस प्रकार लिखें:
<img src="images/myimage.jpg">
ऊपर कोड में मैने images/myimage.jpg लिखा है जो बताता है कि हमारे इमेज/चित्र का नाम myimage.jpg है जो images नाम के फ़ोल्डर में है।

Note: यहां पर image के name और उसके format पर ध्यान दें, इमेज का नाम और format जानने के लिये इमेज की properties check करें।

यहां मैने जो इमेज लिया है उसका नाम myimage है जो jpg format मे है, आपके इमेज का नाम और format अलग हो सकता है।

अब वेबपेज को ब्राउसर में ओपन करते हैं, जो कुछ ऐसा दिखाई देगा:
add image
हम picture कि size भी change कर सकते हैं जिसके लिये height और width attribute का इस्तेमाल करेंगे।
<img src="images/myimage.jpg" height="100px" width="100px">
Height और width बदलने के बाद हमारा पेज कुछ ऐसा दिखाई देगा।
change image size
Link create करना
Link या Hyperlink का उपयोग एक पेज को दूसरे पेज से जोडने के लिये किया जाता है।

सबसे पहले हमें एक HTML page चाहिये जिसे हम अपने पेज से लिंक कर सकें, तो आप एक और पेज बना लें या पहले जो हमने पेज बनाया था उसे copy कर के उसी folder में दूसरे नाम से save कर लें।
Link बनाने के लिये Code कुछ इस प्रकार से लिखें:
<a href="अपने page का नाम">Text जिसे आप user को show करना चाहते हैं</a> 

उदहारण:
<a href="contact.html">Contact us</a>

अगर आप किसी website को link करना चाहते हैं तो उसके लिये code कुछ ऐसे लिखें:
<a href="http://www.website.com"> Text जिसे आप user को show करना चाहते हैं </a>

उदहारण:
<a href="http://www.webinhindi.com">Learn web design in Hindi</a>

Image Link: जैसा की आपने किसी website में देखा होगा जिसमें कुछ Buttons होते हैं जिस पर click करने से कोई दूसरा पेज open होता है इसी तरह हम किसी image के ऊपर भी link create कर सकते हैं
Image link create करने के लिये code कुछ इस तरह से लिखें:
<a href="page.html"><img src="images/button.jpg"></img></a>
Example के लिये हम एक Read More नाम का बटन अपने पेज़ पर लगाते है:
<a href="page.html"><img src="images/Read_more_button.png"></img></a>
हमारा पेज कुछ इस तरह दिखाई देगा:
hyperlink example
अब जैसे ही हम Read More वाले बटन पर click करेंगे तो page.html नाम का दूसरा पेज ओपन होगा।

Text Formatting
यह सबसे Basic लेकिन जरूरी part है मगर ये थोडा frustrating भी हो सकता है। अगर आप साथ में practice करते जायें तो ये आपको interesting लग सकता है।

इस भाग में हम simple text formatting जैसे कि नये line में sentence कैसे लिखे, text को left, right या center align कैसे करें आदि सीखेंगे|

सबसे पहले आप नीचे दिये गये English paragraph को copy कर के अपने HTML document में Paste करें और पेज को browser में run करें और देखें क्या result आता है। (आप इसके बदले में कोई दूसरा random text भी use कर सकते हैं लेकिन ध्यान रहे उसमें कुछ space डालना ना भूलें जैसा कि नीचे paragraph में हमने डाला है)
“This is a sample paragraph of text. Nothing important here just typing some words to the example of HTML formatting. In this article you are learning basics of HTML page designing in Hindi language.


In webinhindi.com we will cover all the topics related to web design and development in Hindi language.

If you find this article helpful then please bookmark our blog, like our Facebook page and keep visiting.


End of my sample paragraph!”
जब आप पेज Browser में open करेंगे तो कुछ इस प्रकार से दिखाई देगा

text-formating-example

आपने notice किया होगा कि हमने प्रत्येक sentence के बाद space छोडा था लेकिन browser में वो spaces  दिखाई नही दे रहे हैं और सारे sentences एक साथ एक ही paragraph मे merge हो गये हैं।
इसे fix करने के लिये हमें नीचे दिये गये कुछ tags use करने होंगे:
  1. <p> : इसका उपयोग हम तब करते हैं जब हमें कोई नया sentence लिखना होता है।
  2. <br> : Line break, नया लाईन शुरू करने के लिये use किया जाता है।
अब हम इन दोनो टैग्स का उपयोग कर नीचे फ़िर से पहले वाले पैराग्राफ़ को लिखेगें, इसे copy कर फ़िर से अपने document में paste कर लें।


<p>“This is a sample paragraph of text. <br> Nothing important here just typing some words to the example of HTML formatting.</p> <p>In this article you are learning basics of HTML page designing in Hindi language. </p>
<p> In webinhindi.com we will cover all the topics related to web design and development in Hindi language.<br> 
<p>If you find this article helpful then please bookmark our blog, like our Facebook page and keep visiting.
End of my sample paragraph!”</p>
अब आपका पेज कुछ इस प्रकार दिखाई देगा
p and br tag exampleअब आप <p> और <br> tags के स्थान को बदल कर कुछ experiment कर के देखें की output कैसा आता है।
अब हम text या image को align करना सीखेंगे, इसके लिये हम नीचे दिये कुछ टैग्स का उपयोग करेंगे:
  1.  <center>Text जिसको center align करना है </center>
  2. <p align =left> Text जिसको left align करना है </align> 
  3. <p align =right> Text जिसको right side में दिखाना है </align>
अब हम इन टैग्स को पहले वाले paragraph में apply करते है। ये देखिये मेरे में output क्या आता है:
text and image alignment

एक बार आप नीचे पूरा कोड देख ले:

<html>
<head>
<title>My First HTML Document</title>
</head>
<body bgcolor="#1B99CF">
<center><font color="#fff">Hello World!!!</font></center>
<center>
<h1>This is heading</h1>
</center>
<center><img height="100px" src="images/myimage.jpg" width="100px"></center>
<center><a href="page1.html"><img height="50px" src="images/button.png" width="100px"></a></center>
<center>
<p>“This is a sample paragraph of text.<br>
Nothing important here just typing some words to the example of HTML formatting.</p>
</center>
<p align="left">In this article you are learning basics of HTML page designing in Hindi language.</p>
<p align="right">If you find this article helpful then please bookmark our blog, like our Facebook page and keep visiting.</p>
<p>In webtechadda.com we will cover all the topics related to web design and development in Hindi language.<br>
End of my sample paragraph!”</p>
</body>
</html>
Text जिसकी size change करनी है</font>: इस <font> tag को हम पहले भी use कर चुके हैं बस इस बार उसमें हम size attribute जोड देंगे और इसकी value 1-7 हो सकती (जहां 1 सबसे छोटा और 7 सबसे बडी size होगी)
font size 
    2.<b>Text जिसको bold में दिखाना है</b>   
    3.<i>Text जिसको italic करना है</i>
    4.<u>Text जिसमे underline डालना है</u>

bold-italic-underline
HTML में Table कैसे बनाये?
HTML में टेबल बहुत ही useful होता है इससे न केवल हम data को अच्छे से present कर सकते हैं बल्कि हम table का use करके पूरे website का layout design कर सकते है

तो चलिये देखते हैं कि हम अपने पेज में table कैसे डाल सकते हैं।

Table बनाने के लिये 3 जरूरी tags का use किया जाता है:
  1. <table > :Table
  2. <tr> : Table Row
  3. <td> : Table Data
अब नीचे दिये code को copy कर लें और run करके देखें:

<table border="1">
<tr>
<td>Cell 1</td>
<td>Cell 2</td>
</tr>
<tr>
<td>Cell 3</td>
<td>Cell 4</td>
</tr>
</table>

जो कुछ ऐसा दिखाई देगा:
simple table
 अब चलिये कोड को समझते हैं:
  • सबसे पहले हमने <table> tag use किया border="1" लिखा जिससे border on हो जायेगा जिसकी size 1 होगी।
  • <tr> से हम एक नया row बनाते हैं|
  • <tr> के अन्दर हम <td> लिखते हैं, <td> से एक नया column बनता है। हमको कोई data लिखना होता है तो हम हमेंशा <td> tag के अंदर लिखेंगे।
  • हमने एक <tr> के अंदर दो <td> लिखा इसका मतलब एक row के अंदर 2 columns बनेंगे। 

Colspan and Rowspan:

अब नीचे कुछ Tables दिये हैं, देखेंगे कि हम उसे किस तरह बना सकते हैं:

colspan
ये टेबल पहले से कुछ अलग है, इसमें पहले row में सिर्फ़ एक ही column है ऐसी स्थिती में हमें “colspan” attribute use करना पडता है।
  • Colspan एक column की property है जिससे हम किसी एक column को दो या दो से अधिक column के बराबर span या फ़ैला सकते हैं।
  • जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं first वाले row में सिर्फ़ एक cell है लेकिन वो 2 cells के बराबर है, ऐसा हमने <td> में colspan="2" attribute use करके बनाया है। नीचे आप पूरा कोड देख सकते है:

<table border="1" width="200px" height="200px"> 
<tr align="center"> 
<td colspan="2">Cell 1</td> 
</tr> 
<tr align="center"> 
<td>Cell 3</td> 
<td>Cell 4</td> 
</tr> 
</table>

अब हम rowspan का example देखेंगे:
rowspan
जैसा कि आप देख सकते हैं हमने एक cell को vertically span करके 2 cells के बराबर बनाया है तो इसके लिये हमने <td> में rowspan="2" attribute का उपयोग किया है।

नीचे आप पूरा कोड देख सकते हैं:

<table border=1 width="200px" height="200px">
<tr align="center">
<td rowspan="2">Cell 1</td>
<td>Cell 2</td>
</tr>
<tr align="center">
<td>Cell 3</td>
</tr>
</table>
Note: अगर आप cell को horizontally stretch करना चाहते हैं तो <td> में colspan का use करें और vertical stretch के लिये rowspan attribute लगायें।

HTML में Form कैसे बनाये?
Web forms के जरिये आप अपने web page के users से information ले सकते हैं। HTML form के जरिये आप Registration, login, contact form आदि बना सकते हैं

Note: HTML से form की सिर्फ़ design की जा सकती है। एक functional form बनाने के लिये हमें कोई server-side scripting (जैसे php, Asp.net आदि) की जरूरत पडेगी जिसे हम बाद में इसी blog में cover करेंगे।

Form काम कैसे करता है:

  • हर form मे एक submit button होता है, जब भी कोई user इस बटन को click करता है तो उसके द्वारा भरा गया सारा information दूसरे पेज में send हो जाता है।
  • हमें सारा data कहां भेजना है ये हम पहले से ही form बनाते समय specify कर देते हैं
  • जिस page पर data send होता है उसमें हमें एक program लिखना पडता है जिससे आने वाले सारे data को हम receive कर सकें। इस program को PHP या कोई अन्य server-side भाषा में लिखा जाता है जिसके बारे में हम बाद में जानेंगे।

Form कैसे बनायें:

  • <form> tag से सारे forms start होते हैं जिसे हम html के body में कहीं भी लिख सकते हैं।
  • Form tag में दो main attributes, method और action होते हैं <form method="post" action="register-exe.php">
     
  • Method attribute की value “get” या “post” हो सकती है। By default value get होती है।
  • Get method से भेजा गया information secured नही होता और form के सारे data browser के address bar में दिखाई दे सकते हैं। sensitive information जैसे की password आदि get method से नही भेजना चाहिये। 
  • Post method secured होता है, send किया हुआ कोई भी data browser में show नही होता
  • Action attribute में हम उस वेबपेज का address लिखते हैं जहां हमें data send करना होता है। 
सबसे पहले आप नीचे दिया गया कोड copy करें और एक नये html page मे paste कर run करें:

<html> <head> <title>Registration Page</title> </head> <body bgcolor="#00CCCC"> <h3>Registration Form</h3> <form action="" method="post">Enter Name: <input name="name" type="text"><br> <br> Enter Email: <input name="email" type="text"><br> <br> Gender: <input name="gender" type="radio" value="Male">Male <input name="gender" type="radio" value="female">Female<br> <br> City: <select name="city"> <option>Delhi</option> <option>Mumbai</option> <option>Kolkata</option> <option>Pune</option> <option>Hydrabad</option> </select><br> <br> Address: <textarea name="address"></textarea> <br> <br> <input type="submit" value="Register"> <input type="reset" value="Clear"></form> </body> </html>
Output कुछ इस तरह दिखाई देगा:
simple-html-form-design
उपर हमने एक registration form बनाया है जिसमें name और email के लिये text box, gender के लिये radio button, city के लिये dropdown box और address के लिये textarea use किया है।

चलिये अब इन HTML codes को समझते हैं:
  • हमने form tag के action attribute को blank छोड दिया है क्योंकि अभी हमें data दूसरे पेज में send नहीं करना है।
  • Text-box: name और email enter कराने के लिये दो text-box बनाया गया है, इसके लिये <input> tag use किया जिसमें type में हमने text डाला।
  • Radio button: male, female के लिये हमने दो radio button बनाये, यहां ध्यान देने वाली है की एक बार में दोनो में से कोई एक radio button active होना चाहिये, हम male और female दोनो एक साथ select नही कर सकते नही तो मामला गडबड हो सकता है। इसलिये हमे दोनो radio buttons के name को same रखना होगा
  • Dropdown या Combo box: इसे हमने city के लिये use किया है। <select> tag के अंदर हमने 5 <option> लिखे हैं जिसमें 5 शहरों के नाम है।
  • Text-area: address के लिये हमें एक बडा box बनाना होता है जिसमें हम multiple lines लिख सकते हैं। इसे <textarea> tag के जरिये बना सकते हैं।
  • Submit button: form को submit करने के लिये button बनाया जिसे <input> tag से बना सकते हैं जिसमे type="submit" होना चाहिये। value attribute के जरिये button में दिखने वाले text को बदल भी सकते हैं जैसा की हमने ऊपर button में register लिखा हुआ है।
  • Reset या Clear button: अंत में form fields को reset करने के लिये एक और <input> tag लिया जिसमें type="reset" रखा।
इस article (HTML tutorial in Hindi) में हमने कोशिश किया है की HTML के सारे basic topics को कवर किया जाये, हो सकता है यह पोस्ट आपको थोड़ी लम्बी लगी हो लेकिन अगर आप इसे step-by-step तरीके से practice करते जाएँ तो आप सिर्फ 20 मिनट में HTML सीख सकते हैं|

आगे पढ़ें:

अब आप भी एक web page design करके देखें और हमें बतायें, हो सके तो अपने वेबपेज का screenshot नीचे कमेन्ट बॉक्स में डालें और हां यह post आपको कैसा लगा, आपके मन में इससे जुड़े कोई सवाल हों तो जरूर बतायें। WebInHindi को और बेहतर बनाने के लिये भी आप सुझाव दे सकते हैं।

Friday, 3 January 2020

IP एड्रेस क्या है? What is IP Address in Hindi?

ip-address-kya-hai

क्या आपको पता है आपके स्मार्टफोन, टैबलेट, कंप्यूटर या लैपटॉप, जिस भी डिवाइस से आप इंटरनेट चलाते हैं उन सभी का अपना-अपना एक internet address है जिसे आईपी एड्रेस भी कहते हैं।

अब अगर आपके दिमाग में यह सवाल आ रहा हो की आखिर ये आईपी एड्रेस क्या होता है? या फिर आप इस सवाल का जवाब ढूंढते हुए यहाँ तक पहुंचे हैं, तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं।

आज हम आईपी एड्रेस के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिन्हें जानना आपके लिए जरुरी है ताकि भविष्य में यदि आप इस शब्द को कहीं पढ़ें या सुने तो आपको समझ आ सके की आखिर किस बारे में बात हो रही है।

IP एड्रेस क्या है? What is IP Address in Hindi?

हर एक डिवाइस जो इन्टरनेट से जुड़ा हुआ है जैसे आपका स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि, इन सभी के अपने-अपने आईपी एड्रेस होते हैं।

जरा सोचिये...

जब आप अपने किसी दोस्त को ईमेल भेजते हैं तो मेल सर्वर को यह कैसे पता चलता है की करोड़ों-अरबों computers में से आपके दोस्त का कंप्यूटर कौन सा है?

यह संभव हो पाता है IP की वजह से।

दरअसल आईपी एड्रेस इन्टरनेट से connected हर एक device के लिए एक identification number की तरह काम करता है।

इन्ही एड्रेस के जरिये इंटरनेट पर devices एक दूसरे से डाटा का आदान-प्रदान (communication) कर पाते हैं।

ठीक इसी तरह से वेबसाइट विजिट करने के लिए भी IP address की जरुरत पड़ती है

जब हम किसी वेबसाइट को अपने मोबाइल या किसी भी डिवाइस से विजिट करते हैं तो वहां भी IP address का उपयोग होता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि वेबसाइट के सारे कंटेंट सर्वर पर स्टोर रहते हैं जो की अपनेआप में एक कंप्यूटर डिवाइस है और जैसा की हमने बताया की इन्टरनेट पर जुड़े हर कंप्यूटर का एक आईपी एड्रेस होता है ऐसे में वेबसाइट के किसी भी पेज को या कंटेंट को देखने के लिए सर्वर की आईपी की जरुरत पड़ती है।

हमारे मोबाइल और वेबसाइट के सर्वर के बीच IP address के जरिये ही communication होता है।

IP Version 4 और IP Version 6 क्या है?

आईपी ​​पते का दो संस्करण (versions) हैं:
  • IPv4 Address (संस्करण 4)
  • IPv6 Address (संस्करण 6)
IPv4 Address:  यहां एक उदाहरण दिया गया है कि आईपी वर्शन 4 एड्रेस कैसा दिख सकता है: 

66.172.211.186

 IPv4 एड्रेस में चार संख्याओं का समूह होता है, जिनमें से प्रत्येक में एक से तीन अंक हो सकते हैं, प्रत्येक अंकों के ग्रुप को बिंदु (.) के द्वारा अलग किया जाता है। हर group में 0 से 255 तक के नंबर हो सकती हैं। 

इन्हीं संख्याओं की वजह से ही पूरा इन्टरनेट चलता है और सारे कंप्यूटर और स्मार्टफोन एक दूसरे से कनेक्ट हो पाते हैं।

आईपी वर्शन 4 की एक limit है, यह लगभग 4 अरब 30 करोड़ unique IP address दे सकता है

और जैसा की आपको पता है समय के साथ internet devices की संख्या लगातार बढती जा रही है ऐसे में जाहिर सी बात है आज नही तो कल ऐसी स्थिति आनी ही थी की आईपी एड्रेस की कमी हो जाए। और इसीलिए IPv6 का जन्म हुआ।

IPv6 Address: इस वर्शन के एड्रेस कुछ इस प्रकार दिखाई देते हैं:

2001:0db8:85a3:0000:0000:8a2e:0370:7334

इसमें 8 ग्रुप होते हैं, और प्रत्येक में 4 hexadecimal digits होते हैं हर ग्रुप को colon (:) के द्वारा अलग किया जाता है।

आईपी वर्शन 6 एड्रेस को कुछ इस तरह से डिजाईन किया गया है की यह कभी भी खत्म नही होगा।

आईपी एड्रेस कितने प्रकार के होते हैं? (Types of IP address in Hindi)

ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

1. Private IP Address: ये एक ही नेटवर्क के अंदर जुड़े हुए devices के लिए उपयोग किए जाते हैं, जैसे एक home network में जुड़े कंप्यूटर, वाईफाई कैमरा, वायरलेस प्रिंटर आदि के द्वारा प्राइवेट आईपी का उपयोग किया जाता है। प्राइवेट आईपी एड्रेस को राउटर द्वारा सेट किया जा सकता है।

2. Public IP Address: अपने नेटवर्क से बाहर के डिवाइस से कम्यूनिकेट करना हो तो पब्लिक आईपी एड्रेस का उपयोग किया जाता है। इन्टरनेट के जरिये दुनिया के किसी भी डिवाइस से संपर्क स्थापित किया जा सकता है और इस प्रकार के connection के लिए public ip address का उपयोग होता है। इसे ISP (Internet Service Provider) के द्वारा set किया जाता है।

Private और Public IP address भी दो प्रकार के हो सकते हैं: static या dynamic, आईये सरल भाषा में समझते हैं की आखिर यह है क्या:
  • Static IP Address: नाम से पता चल रहा है की इस प्रकार का एड्रेस अपनेआप नही बदलता है इसे manually change किया जाता है। 
  • Dynamic IP Address:  यह DHCP server के द्वारा automatically configured होता है। यह temporary IP address होता है जो की नेटवर्क से जुड़े devices के लिए सेट किया जाता है।
कई बार कुछ device DHCP को support नही करते हैं ऐसे में उनके लिए static आईपी का उपयोग होता है जिसे manually set किया जाता है।

अपना आईपी एड्रेस कैसे जाने? IP address कैसे पता करें?

आप बड़ी आसानी से अपने स्मार्टफोन, टेबलेट या कंप्यूटर की आईपी पता कर सकते हैं प्राइवेट और पब्लिक आईपी एड्रेस पता करने के अलग-अलग तरीके होते हैं। आइये जानते हैं इन तरीकों के बारे में:

Public IP Address कैसे पता करें?
इसे पता करना बहुत ही आसान है इसके लिए आप WhatsMyIP.org जैसी वेबसाइट पर जा सकते हैं। आप गूगल पर "what is my ip" लिखकर सर्च करें:

mera-ip-address-kya-hai


प्राइवेट आईपी एड्रेस कैसे पता करें?
अपने कंप्यूटर पर इसे command prompt पर ipconfig लिखकर search करें आपको सारी जानकारी मिल जाएगी:

ip-address-kaise-check-kare


आईपी एड्रेस का क्या उपयोग है? (Use of IP address in Hindi)

इन जानकारियों को पढने के बाद अब हो सकता है आपके दिमाग में यह सवाल आ रहा हो की आखिर आईपी एड्रेस का क्या उपयोग है?  

तो हम आपको बता दें की इसका उपयोग डिवाइस की identity के रूप में होता है और साथ ही इसी इलेक्ट्रॉनिक पते के जरिये इन्टरनेट पर communication होता है और सूचनाएं इन्ही पतों के जरिये एक जगह से दूसरे जगह पहुँचती हैं। इस वक्त आप हमारी इस वेबसाइट को भी आईपी की मदद से ही देख पा रहे हैं।

इसके अलावा IP address से device location का भी पता लगाया जा सकता है। इसके जरिये tracking भी की जा सकती है।


उम्मीद है आप ये जानकारियाँ पढ़कर समझ गये होंगे की आखिर IP address क्या है और इसका क्या उपयोग है। अगर जानकारी पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें।

Monday, 9 December 2019

Blogspot या Blogger क्या है? इससे फ्री ब्लॉग कैसे बनाये?

Blogger Kya hai

Blogger क्या है? यह सवाल अक्सर ब्लॉगिंग शुरू करते समय लोगों के दिमाग में आता है। लोग ब्लॉग बनाने से पहले गूगल पर सर्च करते हैं की "Free में ब्लॉग कैसे बनायें" , और फिर उनको पता चलता है Blogger या Blogspot की वेबसाइट के बारे में।

आज से कई साल पहले मैंने भी ब्लॉगिंग की शुरुआत Blogger से ही की थी और आज भी मेरे कई सारे ब्लॉग इसी blogging platform पर मौजूद हैं।

तो आज मै आपको भी Blogger के बारे में बताने जा रहा हूँ ताकि आप भी इस जानकारी का लाभ ले सकें।



Blogspot या Blogger क्या है? Blogspot meaning in Hindi

यह Google का एक blog publishing website है जिसे आप blogger.com या blogspot. com पर जा कर access कर सकते हैं। इस वेबसाइट में आप अपने गूगल के अकाउंट से लॉग इन कर सकते हैं। लॉग इन करने के बाद आप यहाँ मुफ्त में ब्लॉग बना सकते हैं। 

जब आप ब्लॉग बनाते हैं तो शुरुआत में आपको अपने ब्लॉग का एक नाम रखना पड़ता है। आप अपने ब्लॉग को publish करने के बाद blogspot. com के sub domain के द्वारा access कर पाएंगे। 

जैसे यदि आपके ब्लॉग का नाम myblog है तो आप इसे myblog.blogspot. com पर जाकर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप चाहें तो खुद का डोमेन यानी custom domain (जैसे myblog. com) खरीद कर इससे जोड़ सकते हैं।

एक बार ब्लॉग बन जाने के बाद आप इसपर जितने चाहें उतने articles post कर सकते हैं। आप अपने आर्टिकल में text, images, videos, links आदि डाल सकते हैं।


Blogger के  क्या फायदे हैं?

  • आप यहाँ से बिना पैसे खर्च किये फ्री में ब्लॉग बना सकते हैं।
  • आपको अपने ब्लॉग के लिए अलग से होस्टिंग स्पेस लेने की जरुरत नही है।
  • अचानक traffic बढ़ने पर भी कोई खतरा नही रहता।
  • Server up-time हमेशा 99.99% रहती है और कभी कम नही होती। 
  • बिना कोडिंग सीखे काम किया जा सकता है।
  • अगर कोडिंग आती है तो आप खुद का custom template design तैयार कर सकते हैं।
  • Custom domain से ब्लॉग को connect कर सकते हैं और इसके लिए भी चार्ज नही देने पड़ते।
  • Adsense से ads लगा कर पैसे कमा सकते हैं।
  • Google Analytics से अपने ब्लॉग पर आने वाली traffic को analyse कर सकते हैं।
  • Webmaster tool का भी उपयोग कर सकते हैं।

Blogger में क्या-क्या limitations हैं?

  • आप PDF, Word, Zip files आदि को upload नही कर सकते।
  • आगर आपका कोई कंटेंट Blogger content policy का उल्लंघन करता है तो वह ब्लॉगर के द्वारा आपसे पूछे बगैर डिलीट भी हो सकता है।
  • Plugins या widgets की संख्या कम है।
  • Theme के customization में कई सारे limitations हैं।
  • URL structure पर आपका पूरा कण्ट्रोल नही रहता।
  • अगर आप blogspot sub-domain का उपयोग कर रहे हैं तो सर्च इंजन पर रैंक करना आसान नही होगा।
  • SEO के लिए कोई विशेष सुविधाएँ नही है।




Blogger में ब्लॉग कैसे बनाये?

अब चलिए बात करते हैं की ब्लॉगर यानि ब्लागस्पाट में ब्लॉग कैसे बनाये। ये काम बहुत ही आसान है आप सिर्फ 5 मिनट में एक साधारण ब्लॉग बना सकते हैं। इसके लिए निचे step-by-step tutorial दिया गया है जिसे follow करके आप कुछ ही मिनटों में एक basic blog तैयार कर सकते हैं।

Step 1: Blogger.com पर जाकर अपने जीमेल या गूगल अकाउंट के यूजरनाम और पासवर्ड से लॉग इन करें।

create-blogger-blog-step1

Step 2: लॉग इन करने के बाद आपको कुछ ऐसा स्क्रीन नजर आएगा जिसमे आप "Create new blog" button पर click करें।

create-new-blog-in-blogger-in-hindi

Step 3: अगले स्टेप में आपको आपके ब्लॉग का एक अच्छा नाम और एड्रेस बनाना होगा इसके अलावा blog के लिए एक theme भी चुनना पड़ेगा। 

यहाँ पर ध्यान रखें की यदि address डालने पर "Sorry, this blog address is not available." error आये तो इसका मतलब है की उस एड्रेस से दूसरा ब्लॉग पहले से बन चुका है। ऐसी स्थिति में कोई दूसरा एड्रेस बदल लें।

step3

Step 4: अब आपका ब्लॉग बन चुका है। इसे आप "View blog" में जाकर देख सकते हैं। अभी  आपके ब्लॉग में कोई भी कंटेंट या आर्टिकल पोस्ट नही किया गया है, इसके लिए आप "New post" बटन में क्लिक करके नया पोस्ट लिख सकते हैं।

blogger-me-blog-kaise-banaye-step-4

Step 5: ब्लॉगर पर पोस्ट कैसे लिखें? "New post" button पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज open होगा जहाँ से आप अपना पहला पोस्ट लिख पाएंगे।

Create first post

अब आपने इन 5 steps को follow करके अपने लिए एक नया बेसिक ब्लॉग बना लिया है। इसमें अब आप कई सारे posts publish कर सकते हैं। 

तो ये थे कुछ basic steps ब्लॉग बनाने के, लेकिन इससे आगे भी आप कई सारे काम कर सकते हैं जैसे अपने ब्लॉग के डिजाईन यानि थीम को बदलना, basic settings में changes करना, pages create करना और widgets add करना आदि। 

Blogger blog का Theme कैसे बदलें?

ब्लॉगर में ब्लॉग की थीम का चुनाव करने के लिए आपके पास दो विकल्प होते हैं:
  1. Blogger default theme
  2. Custom themes
ब्लॉगर में पहले से कुछ default themes दिए गये होते हैं जिनका उपयोग आप कर सकते हैं। इसके लिए "Theme" में जाएँ और theme के list में से अपनी पसंद की थीम को चुने।

change-blogger-theme

अगर आपको ये themes/templates पसंद नही आ रहे हैं तो कोई बात नही, आप custom themes का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप इन्टरनेट से theme download करना होगा। आप free blogger templates search करके किसी अन्य वेबसाइट से मुफ्त में templates download कर सकते हैं। 

ब्लॉगर पर custom template/theme कैसे लगायें?

इसके लिए "Theme" में जाएँ वहां पर आपको "My theme" section में right side में तीन dots दिखेंगे उसपर क्लिक करें। एक मेनू open होगा जहाँ से आप पहले "Backup" पर क्लिक करके अपने थीम की बैकअप ले लेवें। इसके बाद "Restore" पर क्लिक करें और download किये गये template की XML file को upload कर दें।

change-blogger-custom-template

आपका custom theme upload हो गया है और अब आप ब्लॉग पर जाकर इस डिजाईन को देख सकते हैं। 

आगे पढ़ें:

Final Words:

अगर आप ब्लॉगर पर ब्लॉग बना रहे हैं तो आप कोई custom domain जरुर ले लें इससे आपका blog professional लगेगा और इसके कई और फायदे भी हैं। अब हमें उम्मीद है की आपको यह पढ़कर समझ आ गया होगा की Blogger क्या है और इससे फ्री ब्लॉग कैसे बनाये। अगर इससे जुड़े कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो आप निचे कमेंट कर सकते हैं।

Wednesday, 4 December 2019

डिजिटल मार्केटिंग में कैसे बनाये सुनहरा करियर? Career in Digital Marketing in Hindi

digital marketing me career kaise banaye

डिजिटल मार्केटिंग” आजकल आपको ये शब्द बहुत ज्यादा सुनने को मिल रहा होगा। हालाँकि हम आपको पहले भी इस बारे में बता चुके हैं की डिजिटल मार्केटिंग क्या है और कितने प्रकार के होते हैं? लेकिन आज हम बात करने वाले हैं की कैसे आप इसे सीखकर बना सकते हैं अपना एक बेहतरीन करियर।

अब आप ये तो जानते ही हैं की किसी भी बिज़नस के लिए मार्केटिंग कितनी जरुरी है। क्योंकि आपके पास कितना भी अच्छा प्रोडक्ट क्यों न हो जब तक उसके बारे में लोगों को पता नही चलेगा तब तक उसकी कोई वैल्यू नही है क्योंकि कोई उसे लेगा नही और आपको उसका प्रॉफिट मिलेगा नही।

इसलिए मार्केटिंग का बहुत ही अहम रोल है आपके बिज़नस को आगे बढ़ाने में। हालंकि आप अपने बिज़नस या ये कहें की अपने प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में लोगों को दो तरीकों से बता सकते हो एक ऑफलाइन मार्केटिंग करके और दूसरा ऑनलाइन मार्केटिंग करके जिसे हम डिजिटल मार्केटिंग भी कहते हैं। तो आज हम बात करने वाले डिजिटल मार्केटिंग के बारे में।


डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

वैसे तो डिजिटल मार्केटिंग के अंदर ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रकार की मार्केटिंग होती है लेकिन आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग या इन्टरनेट मार्केटिंग को ही डिजिटल मार्केटिंग कहा जाने लगा है।

यानि यहाँ पर डिजिटल मार्केटिंग का अर्थ ऑनलाइन मार्केटिंग से है।

जब हम किसी प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग ऑनलाइन तरीके से करते हैं तो उसे हम डिजिटल मार्केटिंग कहते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग में काम कैसे होता है?

वैसे तो कई सारे तरीके हैं काम करने के लेकिन यहाँ पर मुख्य रूप से हमारे पास एक वेबसाइट होता है जो की हमारे बिज़नस से रिलेटेड होता है। जैसे अगर कोई हम प्रोडक्ट जैसे- कपड़ा, मोबाइल आदि ये सब बेचते हैं तो ऑनलाइन हमारी एक e-commerce टाइप की वेबसाइट हो सकती है।

इसी तरीके से अगर हम किसी प्रकार की सर्विस लोगों को देते हैं तो उसकी भी हम एक वेबसाइट बना सकते हैं।

वेबसाइट बनाने के बाद अगला स्टेप आता है वेबसाइट के ऑनलाइन प्रमोशन का, ताकि हमारे प्रोडक्ट के बारे में लोगों को पता चले और वो उसे ख़रीदे।

तो ऑनलाइन प्रोडक्ट और सर्विस को वेबसाइट के जरिये प्रमोट करने के कई तरीके होते हैं:

सर्च इंजन - डिजिटल मार्केटिंग में सर्च इंजन यानि गूगल, Bing आदि इन सभी का बहुत ही अहम रोल होता है। सर्च इंजन के जरिये हमारी वेबसाइट पर दो तरीके से लोग आते हैं:
  • Organic search 
  • Paid search 
ये दोनों डिजिटल मार्केटिंग का ही पार्ट हैं।

Organic search मतलब की इसमे हमे गूगल या किसी भी सर्च इंजन को कोई पैसा नही देना अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने का लेकिन हमे अपनी वेबसाइट को गूगल या किसी और सर्च इंजन के हिसाब से कस्टमाइज करना है जिसे हम कहते हैं SEO जिसके बाद ये सर्च इंजन हमारी वेबसाइट को तब अपनी सर्च इंजन में तब सबसे ऊपर दिखायेगा जब कोई विजिटर हमारी वेबसाइट से रिलेटेड कोई चीज़ गूगल या बाकि सर्च इंजन में सर्च करेगा।

Paid search  में हमे गूगल को पैसे देने पड़ते हैं अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए। गूगल ने इसके लिए अपना एक प्लेटफार्म अलग से Google Adwords बनाया हुआ है। जहाँ हम अपने प्रोडक्ट की प्रमोशन के लिए ads कैंपेन ऑनलाइन बना सकते हैं।

सोशल मीडिया- दूसरा तरीका है डिजिटल मार्केटिंग में सोशल मीडिया जहाँ हमे अपने प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट करने के लिए फेसबुक, Instagram, ट्विटर और LinkedIn इन सभी पर शेयर करना होता है।

हालंकि इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी हम दो तरीके से अपने प्रोडक्ट और सर्विस को मार्केटिंग कर सकते हैं। एक आर्गेनिक तरीका जिसमे हमे कोई भी पैसा नही देना होता है लेकिन कोशिश करनी होती है की ज्यादा से ज्यादा लोग हमे सोशल मीडिया पर फॉलो करें। जिसके लिए हमे attractive पोस्ट रेगुलर शेयर करने होते हैं।

दूसरा तरीका होता है paid Ads जिसमे हम सोशल मीडिया पर अपने प्रोडक्ट से related Ads कैंपेन बनाते हैं और इसके लिए हमे उन्हें पैसे भी देने पड़ते हैं।

E-mail- ये भी एक बहुत ही बढ़िया तरीका है टार्गेटेड लोगों को अपने वेबसाइट पर लाने का ताकि हमारी प्रोडक्ट की sell हो। जब हमारी वेबसाइट पर कोई भी विजिटर आता है तो हम कोशिश करते हैं की वो हमारे email सब्सक्राइब widget को fill करे ताकि हमारे पास उसकी email address आ जाये और फिर जब हमारा कोई new प्रोडक्ट या अपडेट आये तो हम उसे डायरेक्ट mail कर सके यही E-mail marketing होता है।

Google Analytics- ये भी डिजिटल मार्केटिंग का बहुत ही इम्पोर्टेन्ट टूल है जिसमे हम जितना भी ट्रैफिक हमारे वेबसाइट पर visitor हर रोज आते हैं, उसे देख सकते हैं। इसके साथ -साथ इसमें हम ये भी जान सकते हैं ये ट्रैफिक कौन-कौन सी location से है कौनसे से डिवाइस से है सब कुछ।

तो ये कुछ बहुत ही इम्पोर्टेन्ट चीजें थी जिनको हम डिजिटल मार्केटिंग में प्रयोग करते हैं। I hope अब आपका डिजिटल मार्केटिंग क्या है इसका concept जरुर क्लियर हो गया होगा।

लेकिन अब आपके मन में सवाल ये होगा की ये क्यों आज के टाइम में डिजिटल मार्केटिंग इतना इम्पोर्टेन्ट हो गया है। क्यों इतने सारे कोचिंग सेंटर इसी कोर्स पर इतना ध्यान देने लगे हैं और सारी कम्पनी चाहे वो छोटी हो या बड़ी, डिजिटल तरीके से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करना पसंद कर रहे हैं।


डिजिटल मार्केटिंग क्यों जरुरी है आज के दौर में?

आखिर हम digital marketing के बारे में क्यों बात कर रहे हैं? आज के समय में आखिर इसका महत्व कितना? आखिर क्यों हर एक बिज़नस ऑनलाइन होते जा रहे हैं?

चलिए जानते हैं की आजकल digital marketing trend में क्यों है:

इन्टरनेट का विस्तार
सबसे बड़ा कारण तो यही है की आज के समय में इन्टरनेट अब लोगों का पास बहुत ही आसानी से मिल जाता है। और लोग अपना सबसे ज्यादा समय इन्टरनेट पर ही बिताते हैं। कभी फेसबुक या Instagram चलाने में या फिर कभी गूगल में कुछ सर्च करते हैं नही तो YouTube में कोई न कोई विडियो देखते हैं।

इसलिए जो बिज़नस करते हैं वो क्यों न अपने प्रोडक्ट को इन सभी प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों के पास पहुचाएं। और मार्केटिंग में एक कहावत बहुत प्रसिद भी की "वहां रहिये जहाँ आपके ग्राहक हैं"

कम लागत
दूसरा जो एक बहुत ही बड़ा कारण है डिजिटल मार्केटिंग को चुनने का low cost यानि कम लागत। जब आप ऑफलाइन तरीके से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हो तो उसमे आपको टीवी पर ads, newspaper में ads या फिर बड़े -बड़े बैनर ,पोस्टर पब्लिक प्लेस पर लगाने होते हैं जिसमे बहुत ही ज्यादा आपकी इन्वेस्टमेंट होती है लेकिन जब आप अपने प्रोडक्ट को ऑनलाइन तरीके से मार्केटिंग करते हो तो आपको ऑफलाइन के तुलना में आधे से भी कम लागत लगती है। लेकिन प्रॉफिट आपको उससे 10 गुना ज्यादा मिल सकता है।

बहुत जल्दी वैल्युएबल ब्रांड बना सकते हैं
जब आप ऑनलाइन तरीके से अपने बिज़नस की मार्केटिंग करते हो, वो भी तब जब की आप बिलकुल नये हो और आपको कोई नही जानता तो आप कंटेंट मार्केटिंग यानि टेक्स्ट या विडियो कंटेंट के जरिये अपने प्रोडक्ट के बारे में लोगों को जागरूक कर सकते हो| की आखिर हमारा ये प्रोडक्ट आपके लिए किस तरीके से हेल्पफुल होगा या बेस्ट होगा।

जिससे लोग आपको न सिर्फ जान पाएंगे बल्कि आपके प्रोडक्ट पर trust भी करने लगेंगे और वो आपके लॉयल कस्टमर बन पाएंगे। डिजिटल मार्केटिंग के जरिये आप अपने बिलकुल न्यू ब्रांड को बहुत ही जल्द एक वैल्यूबल ब्रांड बना सकते हैं। 

टार्गेटेड मार्केटिंग
ये डिजिटल मार्केटिंग में बहुत ही बढ़िया एक सुविधा है की आप सिर्फ उन्ही लोगों को अपने प्रोडक्ट का ad दिखा सकते हो जो आपके प्रोडक्ट को लेकर इंटरेस्टेड हैं। अब चाहे आप फेसबुक के जरिये ad कैंपेन चलायें या फिर Google Ads के जरिये। 

री-मार्केटिंग
अगर मान लीजिये आपकी वेबसाइट पर कोई विजिटर आया और उसने आपके प्रोडक्ट को चेक तो किया लेकिन buy नही किया। तो आप उसको दुबारा से अपने प्रोडक्ट के ad दिखा सकते हो जिसे री-मार्केटिंग कहा जाता है। जिससे काफी ज्यादा चांसेस बन जाते हैं की वो विजिटर आपका प्रोडक्ट अब खरीद लेगा तो ये भी एक बहुत ही बढ़िया आप्शन है ऑनलाइन मार्केटिंग में जिसे ऑनलाइन मार्केटिंग एक्सपर्ट भी खुद मानते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग में करियर की सम्भावनाएं

मुझे पूरी उम्मीद है की आप अच्छे से जान गये होंगे की आज के समय में किसी भी बिज़नस को grow करना है तो डिजिटल मार्केटिंग कितनी अहम रोल प्ले कर सकता है।

और यही कारण है की आज हर छोटी-से-छोटी और बड़ी-से-बड़ी बिज़नस अपने प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग में ऑनलाइन को ही प्राथिमिकता देती हैं। और जिससे आज इंडस्ट्री में डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट लोगों की डिमांड दिन-प्रति-दिन बढती जा रही है। न सिर्फ डिजिटल मार्केटिंग के फील्ड में नौकरी की डिमांड ही है बल्कि कंपनी काफी अच्छा सैलरी पैकेज भी उन्हें देने को तैयार हैं।

तो अगर आप अपनी current जॉब को लेकर ज्यादा खुश नही है या फिर आप अपने करियर में अपग्रेड होना चाहते हैं। मै आपको बता दूँ की आप डिजिटल मार्केटिंग में कुछ साल काम करने के बाद अपना खुद का भी ऑनलाइन बिज़नस सेटअप कर जैसे ब्लॉगिंग, या फिर अपनी खुद की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी से या फिर आप खुद भी किसी का प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हो तो, आप डिजिटल मार्केटिंग के फील्ड में न सिर्फ जॉब से बल्कि बाकि और भी बहुत कुछ करके बहुत अच्छा ऑनलाइन पैसे कमा सकते हो।

और मै आपको ये भी बताउं की डिजिटल मार्केटिंग में आपको ज्यादा स्ट्रेस भी नही लेना पड़ता| हाँ शुरू में जब आपको उतना आईडिया नही होता तो जरुर थोडा effort लगाना पड़ता है लेकिन उसके बाद आप काफी आराम से अपनी जिंदगी में काम के साथ-साथ अपनी जिदंगी को एन्जॉय भी कर पाओगे।

या फिर आपने अभी 12th पास की है या या फिर कॉलेज खत्म किया है और जॉब ढूंड रहे हैं तो डिजिटल मार्केटिंग आपके लिए सबसे बेस्ट आप्शन है अपने करियर को सुनहरा बनाने का। 

लेकिन अब बात आती है की डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें ? तो मै अब आपको दो तरीके बताता हूँ जिससे आप डिजिटल मार्केटिंग सीख सकते हो। लेकिन उससे पहले मै आपको बताना चाहता हूँ की आपके अन्दर क्या-क्या स्किल का होना बहुत जरुरी है एक बेहतरीन डिजिटल मार्केटर बनने के लिए।

डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए क्या-क्या स्किल होना बहुत जरुरी है।

हालंकि डिजिटल मार्केटिंग सिखने में जो चीजें आती हैं वो तो आप जब डिजिटल मार्केटिंग सीखते हो तो आपको बताई ही जाती हैं लेकिन उसके अलावा भी आपके अन्दर अलग से क्या-क्या स्किल का होना जरुरी है ताकि आप डिजिटल मार्केटिंग में एक बेहतरीन करियर बना सको।

खुद का इंटरेस्ट और इन्टरनेट से प्यार:
अगर आप डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनना चाहते हो तो आपका खुद का इंटरेस्ट उसमे हो ये बहुत ही जरुरी है। आपको इन्टरनेट चलाना अच्छा लगता हो उसमे न्यू चीजों के बारे में अपडेट होना और उन्हें सीखना पसंद हो। सोशल मीडिया का प्रयोग करना आपको अच्छा लगता हो। साथ ही आपका बिज़नस की तरफ भी एक रुझान हो क्योंकि जब आप मार्केटिंग में किसी भी प्रोडक्ट को प्रमोट करते हो तो आपको काफी स्ट्रेटेजी बनानी पडती हैं की कैसे बिज़नस में प्रॉफिट हों।

कम्युनिकेशन स्किल:
डिजिटल मार्केटिंग में जरुरत होती हैं इंग्लिश की, बहुत ज्यादा नही लेकिन फिर भी आप कंटेंट को समझ सको थोडा बहुत लिख और बोल सको। क्योंकि इंग्लिश एक बिज़नस लैंग्वेज हैं इसलिए जितने भी बिज़नस मार्केटिंग करती हैं उसमे वो इंग्लिश का ही प्रयोग करती हैं इसलिए आपको इंग्लिश की मध्यम लेवल की जानकरी हो बहुत जरुरी है।

Analytical स्किल:
जब आप कोई कैम्पेन ऑनलाइन चलाते हो तो आपको बाद में ये anlyasics करना होता है की कितने लोग वेबसाइट पर आये। कितनो ने प्रोडक्ट को ख़रीदा ताकि आपका अगला स्टेप सही हो इसलिए डिजिटल मार्केटिंग में एनालिटिकल स्किल का होना बहुत बहुत जरुरी है।

Upgrading skill:
डिजिटल मार्केटिंग में सबसे अहम होता है खुद को अपडेट रखने के साथ-साथ अपग्रेड भी करना क्योंकि आप तो जानते ही हैं की इन्टरनेट पर सेकंड में चीजें बदलती हैं इसलिए बिज़नस grow करें इसके लिए आपको ट्रेंड का साथ चलना जरुरी है जिसके लिए आपको अपग्रेड होना पड़ेगा।
तो ये सभी पॉइंट्स थे जो आपको ध्यान में रखकर डिजिटल मार्केटिंग को चुनना है।

डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें 

अब तक के पोस्ट में आपने जान लिया की डिजिटल मार्केटिंग क्या है, क्यों आज के दौर में जरुरी हो गया है और आपके अन्दर क्या -क्या स्किल होनी जरुरी है डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए।

अब हम बात करेंगे सबसे इम्पोर्टेन्ट पॉइंट की डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें?

तो mainly दो तरीके से हम डिजिटल मार्केटिंग सिख सकते हैं।

1. डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करें
डिजिटल मार्केटिंग सीखने का सबसे पहला तरीका तो यही है की आप किसी अच्छे से कोचिंग सेण्टर को सर्च करके वहां से डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करें।

आजकल बहुत से ऑनलाइन प्लेटफार्म भी आपको मिल जायेंगे जहाँ से आप डिजिटल मार्केटिंग सीख सकते हैं इनकी खास बात यह है की की किसी कोचिंग सेण्टर के मुकाबले इनकी फीस सस्ती होती है।

लेकिन ऑफलाइन क्लास की बात करें तो इसके अलग फायदे हैं जैसे क्लास रूम में डिजिटल मार्केटिंग सीखते समय कोई परेशानी आये तो उसे फैकल्टी की मदद से जल्दी सुलझा सकते हैं।

2. खुद का ब्लॉग या वेबसाइट बनाकर डिजिटल मार्केटिंग सीखें 
दूसरा जो तरीका है डिजिटल मार्केटिंग सीखने की आप खुद का ब्लॉग या वेबसाइट बनाये। इन्टरनेट के माध्यम से आप lesson-by-lesson जो डिजिटल मार्केटिंग के बारे में सीखते हैं, उसकी Practice अपने ब्लॉग पर करें। 
अपने ब्लॉग/वेबसाइट पर ट्रैफिक लाना सीखें, अपने audience को value provide करें और आखिर में उनके काम की चीजें सेल करें।

यह भी पढ़ें:
Final Words
मुझे पूरी आशा है की आपको इस पोस्ट को पढने के बाद जानकरी हो चुकी होगी की आप कैसे डिजिटल मार्केटिंग में अपना करियर सुनहरा बना सकते हो।

अगर आपका कोई भी सुझाव या सवाल हमारे पोस्ट के बारे में है तो आप हमे कमेंट करके बता सकते हैं।

Guest Author Bio:
मेरा नाम दीपक भण्डारी है और मै DeepakBhandari.in फाउंडर हूँ |  मेरे इस ब्लॉग पर आपको डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन बिज़नेस, इन्टरनेट और ऑनलाइन पैसे कैसे कमाए से related काफी सारी helpful जानकारी मिलेंगी। यह ब्लॉग बनाने के पीछे मेरा सबसे बड़ा उद्देश्य यही है की लोगों को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिज़नस के बारे मे जानकारी दूँ ताकि जो लोग ऑनलाइन बिज़नेस कर रहे हैं या करना चाहते हैं उन्हें अपने बिज़नेस को grow करने मे help मिले।

अगर आप भी WebinHindi पर guest post publish करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें

Thursday, 21 November 2019

वर्डप्रेस क्या है? इससे क्या-क्या बनाया जा सकता है? What is WordPress in Hindi?

wordpress-kya-hai

वर्डप्रेस क्या है? कई लोग कहते हैं की यह ब्लॉग बनाने के लिए उपयोग होता है।

इस बात में सच्चाई तो है लेकिन यह पूरी तरह से सच नही है।

हालाँकि वर्डप्रेस की शुरुआत 2003 में एक blogging tool के रूप में ही हुई थी लेकिन आज इतने सालों बाद इसका स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है।

आज यह सिर्फ एक ब्लॉगिंग प्लेटफार्म नही है, बल्कि यह दुनिया का सबसे popular content management system (CMS) बन चुका है और आज इन्टरनेट पर मौजूद 7 करोड़ से भी ज्यादा websites इसी WordPress से बनाये गये हैं।

आज इससे केवल ब्लॉग ही नही बल्कि हर प्रकार की वेबसाइट बनाई जा सकती है। आज हम इसी के बारे बात करने वाले हैं। अगर आपको यह जानना है की वर्डप्रेस क्या होता है तो इस आर्टिकल को जरुर पढ़ें।
आगे आपको सारी जानकारियाँ बताएँगे लेकिन उससे पहले आपको यह पता होना चाहिए की WordPress नाम से इन्टरनेट पर दो अलग-अलग platforms मौजूद हैं:
  • wordpress.org और
  • wordpress.com
और इन दोनों के बीच बहुत अंतर है जिसके बारे में आप निचे पढ़ सकते हैं। इस आर्टिकल में हम मुख्य रूप से Wordpress.org (Content Management System) के बारे में बात कर रहे हैं और ज्यादातर जानकारियाँ इसी के बारे में हैं। 

वर्डप्रेस क्या है? What is WordPress in Hindi?

वर्डप्रेस एक प्रकार का content management system यानी एक CMS है जिसका उपयोग वेबसाइट बनाने के लिए किया जाता है। 

यह एक open source software program है जिसे PHP और MySQL से बनाया गया है। इसे इन्टरनेट से फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है और अपने वेब सर्वर पर install करके बड़ी आसानी से वेबसाइट या ब्लॉग बनाया जा सकता है। 

यह एक बहुत ही आसान सा user interface provide करता है जहाँ से आप अपने वेबसाइट के कंटेंट को आसानी से मैनेज कर सकते हैं।

अगर आपको बिना कोडिंग या प्रोग्रामिंग के वेबसाइट बनानी है तो इस काम में वर्डप्रेस आपकी पूरी सहायता कर सकता है। 

वेबसाइट की डिजाईन बदलनी हो तो 1 मिनट के अंदर अपनी पसंद की कोई भी theme install कर सकते हैं, कोई नई feature add करनी हो तो उसके लिए पहले से बने-बनाये plugins हैं जिन्हें बस इनस्टॉल करना है और फिर काम चालू, कोई article publish करनी हो तो यह काम भी WordPress पर बहुत आसान है।

क्या आप जानते हैं?  वर्डप्रेस दुनिया का सबसे popular CMS है।

 W3Techs की वेबसाइट के अनुसार पूरे world में जितने भी websites हैं उनमे से लगभग 35% वेबसाइट वर्डप्रेस का उपयोग करते हैं।

वेबसाइट बनाने के लिए वर्डप्रेस की तरह और भी कई प्रकार के content management systems मौजूद हैं जैसे: Joomla, Drupal, Magento आदि।

लेकिन आंकड़ों के अनुसार इन्टरनेट पर मौजूद 43.3% website किसी भी प्रकार का कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम उपयोग नही करते हैं।

और जितने भी वेबसाइट CMS use करते हैं उनमे से 61.8% CMS WordPress हैं यानि वर्डप्रेस का मार्किट शेयर 61.8% का है जो की सबसे ज्यादा है।

wordpress-cms-market-share
WordPress CMS market share 2019 | Data Source: W3Techs
ऊपर chart देख कर के आपको यह समझ आ गया होगा की WordPress अपने competitors से कितना आगे है।इसी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है की कितने सारे लोग वेबसाइट बनाने के लिए इस प्लेटफार्म का उपयोग कर रहे हैं।

Wordpress. com और wordpress.org में क्या अंतर है

जैसा की हमने आपको पहले ही बताया की वर्डप्रेस के नाम से दो वेबसाइट प्लेटफॉर्म्स हैं लेकिन अब हम बात करते हैं की आखिर वर्डप्रेस.कॉम और wordpress.org में क्या difference है:

wordpress.org: यह एक ओपन सोर्स कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेर है। इसे कोई भी मुफ्त में उपयोग कर सकता है। इसके लिए आपको एक डोमेन नेम और होस्टिंग की जरुरत पड़ती है इसलिए इसे self-hosted WordPress भी कहा जाता है।

यहाँ पर आप अपनी वेबसाइट को पूरी तरह से control कर सकते हैं, themes, plugins आदि का उपयोग कर सकते हैं।

wordpress.com: यह Godaddy की तरह ही एक hosting platform है जहाँ पर आप अपनी वर्डप्रेस वेबसाइट को होस्ट कर सकते हैं। यह भी WordPress के co-founder द्वारा ही बनाया गया है और इसीलिए लोग इन दोनों में confused रहते हैं।

यहाँ पर Godaddy की तरह ही hosting plans दिए गये हैं इसके अनुसार आपको अपने वेबसाइट होस्टिंग के लिए हर महीने कुछ चार्ज देने होते हैं। 

यह free hosting भी provide करती है लेकिन उसमे कई सारे limitations होते हैं जैसे की यदि आप फ्री होस्टिंग प्लान लेकर वेबसाइट बनाते हैं तो यह आपके साईट पर कुछ ads लगा देती है जिसके आपको कोई पेमेंट नही मिलते और इन ads को हटाने के लिए आपको paid plans लेने पड़ेंगे। 

वर्डप्रेस से क्या-क्या बनाया जा सकता है?

अब चलिए देखते हैं की हम वर्डप्रेस से कौन-कौन से type के websites बना सकते हैं:
  • Personal website
  • Blog
  • Static website
  • News website
  • Job portal
  • Portfolio
  • Business website
  • School/College Websites
  • Business directory
  • eCommerce site
  • Question answer website
  • Coupon website
  • Online Course selling website
  • Social network
  • Forum
  • Multilingual Websites
  • Wiki sites
  • Affiliate Website
  • Podcast 
  • Photo Gallery
  • Classified Ad
  • Job board
  • Membership Website
  • Review site
  • Real Estate Websites
  • Online examination site
  • Auction website
वर्डप्रेस से आप इन्टरनेट पर मौजूद लगभग हर प्रकार की वेबसाइट बना सकते हैं।

वर्डप्रेस की विशेषताएं - Features of WordPress in Hindi

चलिए अब वर्डप्रेस की विशेषताओं के बारे जानते हैं, इस CMS में कई सारे ऐसे features हैं जो की इस platform को सबसे बेहतरीन बना देता है। आज हम इनमे से कुछ फीचर के बारे में बात करेंगे:

Plugins: अगर आप अपनी वेबसाइट के features को extend करना चाहते हैं तो आपके हर जरुरत की प्लगइन यहाँ मौजूद है। वर्डप्रेस में हज़ारों की संख्या में plugins हैं जिन्हें प्लगइन डायरेक्टरी के जरिये ढूँढना भी बहुत ही आसान है।

Themes: वर्डप्रेस में तीन डिफ़ॉल्ट थीम पहले से दिए गये होते हैं लेकिन यदि आपको यह पसंद न आये तो आपके वेबसाइट सुन्दर बनाने के लिए थीम डायरेक्टरी में हजारों themes मौजूद हैं। आप चाहें तो खुदका थीम  एक बटन क्लिक करके अपलोड कर सकते हैं। आपकी वेबसाइट में नया थीम केवल कुछ सेकंड में apply हो जाता है।

Search Engine Optimization (SEO): अगर traffic चाहिए तो सर्च इंजन के लिए वेबसाइट को optimize करना बहुत ही जरुरी है और इस काम में वर्डप्रेस आपकी बहुत मदद करता है। यह SEO optimized है लेकिन आप चाहें तो SEO plugins का भी उपयोग कर सकते हैं।

User Management:
जरुरी नही है की आप अकेले ही अपने वेबसाइट को मैनेज करें, इसके लिए आपकी कई लोगों की टीम भी हो सकती है। जब multiple users आपकी साईट में contribution कर रहे हों तो admin, authors, editors जैसे हर यूजर के लिए उसके role के अनुसार permission define करना जरुरी हो जाता है और यह काम भी इस प्लेटफार्म पर बहुत ही आसान है।

Media Management: यदि आप अपनी वेबसाइट पर images या किसी प्रकार का content upload करना हो तो यह काम भी easily किया जा सकता है। यहाँ पहले से अपलोड किये गये images को आप कभी भी gallery में जाकर खोज सकते हैं और उसका दुबारा उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही यहाँ image editing के लिए कुछ basic tools भी दिए गये हैं।

Multi Language: अगर आपको इंग्लिश भाषा को लेकर परेशानी है तो आप वर्डप्रेस को हिंदी में या अपनी पसंद के किसी भी भाषा में उपयोग कर सकते हैं। यह 70 से भी अधिक languages को support करता है।

Community:  जैसा की आप जानते हैं वर्डप्रेस वेब पर सबसे लोकप्रिय ओपन सोर्स सीएमएस है इसलिए यहाँ आपकी सहायता करने के लिए एक बहुत बड़ी community मौजूद है जहाँ आप सवाल पूछ कर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। इसके लिए आपको WordPress support forum में जाना होगा।

वर्डप्रेस का इतिहास - History of WordPress in Hindi

  • सन 2001: Michel Valdrighi नाम के एक French programmer ने एक 2001 में blogging tool बनाया था जिसे b2/cafelog नाम दिया गया था असल में यही वर्डप्रेस के लिए नीव बनी। लेकिन 2002 में Valdrighi ने इसका development बंद कर दिया।
  • सन 2003Matt Mullenweg और Mike Little नाम के दो लोगों ने इसी टूल से idea लेकर WordPress बनाया और पहला version launch किया।  
  • सन 2004: वर्डप्रेस में पहली बार plugin system को जोड़ा गया।
  • सन 2005: पहली बार Theme system add किया गया और एक default template डाला गया इसके अलावा Image upload की सुविधा डाली गयी, import system को improve किया गया और भी कई टूल्स जोड़े गये।
  • सन 2007: नया interface design किया गया और auto save, spell checking जैसे features डाले गये
ऐसे ही हर साल लगातार वर्डप्रेस को improve किया जाता रहा और आज भी नये-नये updates आते रहते हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

वर्डप्रेस के क्या फायदे हैं - Benefits of WordPress in Hindi

  1. यह Open-source है जिससे की इसे फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है इसके अलावा developers इसके source code का उपयोग भी कर सकते हैं।
  2. वर्डप्रेस उपयोग करने में बहुत ही आसान है, वेब डिजाइनिंग से लेकर content publishing जैसे सारे काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है।
  3. इसे होस्टिंग सर्वर पर install करना बहुत आसान है।
  4. हजारों की संख्या में themes पहले से मौजूद है।
  5. वर्डप्रेस SEO friendly है। 
  6. यह e-commerce website बनाने की सुविधा देता है।
  7. प्लगइन के जरिये साईट functionality को upgrade कर सकते हैं।
  8. Responsive web design आजकल बहुत जरुरी है और वर्डप्रेस से बनी वेबसाइट responsive और mobile friendly होती है।
  9. बिना coding या programming knowledge के साईट बनाया जा सकता है।
  10. Social media integration करना कोई मुश्किल काम नही है।

वर्डप्रेस के क्या नुकसान हैं - Disadvantages of WP in Hindi

  1. वर्डप्रेस से वेबसाइट बनाने के लिए होस्टिंग की जरुरत पड़ती है यानि आपको किसी होस्टिंग कंपनी से hosting plans लेने पड़ेंगे जिसके लिए आपको monthly कुछ charges देने पड़ेंगे।
  2. अगर आपको डिजाईन को customize करना हो तो इसके लिए coding skills जैसे: HTML, CSS, PHP आदि आने चाहिए।
  3. ज्यादा plugins use करने से आपकी site की speed slow हो सकती है। 

Conclusion

आखिर में इस आर्टिकल को पढ़कर आपको यह पता चल गया होगा की WordPress क्या है और इसके क्या-क्या features हैं। अगर आप भी खुद का वेबसाइट या ब्लॉग बनाना चाहते हैं तो वर्डप्रेस का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक डोमेन नेम और होस्टिंग की जरुरत पड़ेगी और फिर वर्डप्रेस से आप अपनी मनचाही site बना सकते हैं।

अगर आपको वर्डप्रेस के बारे में हमारा यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें। इस बारे में अपनी राय रखने के लिए निचे कमेंट बॉक्स का जरुर उपयोग करें।

Monday, 4 November 2019

SQL क्या है? (What is SQL in Hindi?)

SQL in Hindi

आप इन्टरनेट पर हर रोज कई सारे वेबसाइट का उपयोग करते हैं, अपने मोबाइल में भी आपने कई सारे online apps को install किया होगा, इनमे से ज्यादातर apps और websites में आपके account बने होते हैं और आपके details इनके डेटाबेस में स्टोर रहते हैं।

आप डेटाबेस के बारे में जानते ही होंगे।

आपके सारे records database में सालों साल तक हमेशा सुरक्षित रहते हैं, आप फेसबुक या ट्विटर में जो भी शेयर करते हैं उन्हें आप सालों बाद भी देख सकते हैं।

आप जानना चाहते हैं की SQL क्या है? लेकिन, हम यहाँ पर डेटाबेस की बातें क्यों कर रहे हैं?


ऐसा दरअसल इसलिए क्योंकि SQL डेटाबेस से ही जुड़ा हुआ है और इसी की मदद से ही किसी database को manage किया जाता है।

अब चलिए विस्तार से जानते हैं की आखिर SQL क्या है (What is Sql in Hindi) और यह किस काम आता है।

SQL क्या है? (What is SQL in Hindi?)

SQL का full form Structured Query Language है। यह एक प्रकार की कंप्यूटर भाषा है जिससे डेटाबेस को command या instruction दिया जाता है। डेटाबेस create करना हो, डाटा स्टोर करना हो, update या delete करना हो तो इन सबके लिए अलग-अलग commands होते हैं जिन्हें ही SQL कहा जाता है। 

सारे RDBMS (Relational Database Management System) SQL को एक standard database language की तरह उपयोग करते हैं।

चलिए आसान शब्दों में समझते हैं, मानकर चलिए आप फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाना चाहते हैं, इसके लिए आपको एक registration form भरना होता है।

फॉर्म भरकर जब आप submit button पर क्लिक करते हैं तो फॉर्म में आपके द्वारा भरे गये सारे डाटा फेसबुक के डेटाबेस में स्टोर हो जायेंगे।

लेकिन यह काम होगा कैसे?

जब आप submit बटन पर click करते हैं तो back-end में SQL का एक command execute होगा जो की database को डाटा स्टोर करने का instruction देगा।

यानि रजिस्ट्रेशन फॉर्म और डेटाबेस के बीच जो communication यानि बातचीत हो रही है वो SQL की भाषा में होती है।


SQL का क्या उपयोग है? (Use of SQL in Hindi)

चलिए अब जानते हैं की SQL का क्या काम है और इसके जरिये database से जुड़े कौन-कौन से operation perform किये जा सकते हैं:
  • SQL से आप एक नया database create कर सकते हैं।
  • किसी डेटाबेस से डाटा को retrieve कर सकते हैं यानि data को निकालकर उपयोग कर सकते हैं।
  • डेटाबेस में नए डेटा insert कर सकते हैं।
  • पहले से मौजूद data को update या modify कर सकते हैं।
  • डेटा को delete कर सकते हैं।
  • एक database के अंदर आप नया table create कर सकते हैं।
  • Table को drop यानि डिलीट भी कर सकते हैं।
  • Views, Stored procedures, और functions create कर सकते हैं।
  • Tables, procedures और views के लिए permission set कर सकते हैं।
यानि database management system में सारे काम SQL के द्वारा किये जा सकते हैं।

वेबसाइट में SQL कैसे काम करता है? (How SQL Works in Hindi)

इन्टरनेट पर मौजूद जितने भी dynamic websites हैं सभी database driven होते हैं। सोशल मीडिया साईट, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, रेलवे रिजर्वेशन जैसी हर डायनामिक साइट्स डेटाबेस से जुड़े होते हैं और जहाँ डेटाबेस है वहां SQL का उपयोग जरुर होता है।

अब चलिए समझते हैं की एक live website में आखिर SQL कैसे काम करता है। 

किसी भी वेबसाइट में अकेला SQL कुछ काम नही कर सकता इसके लिए कई सारी चीजों को एक साथ मिलकर काम करना होता है और इसके लिए कुछ चीजों की जरुरत पड़ती है जैसे:
  • DBMS Program (जैसे MySQL, SQL Server, MS Access, Oracle, Sqlite आदि) 
  • Server side scripting (जैसे PHP, ASP आदि)
  • SQL commands
  • HTML, CSS
आपके सर्वर में MySQL जैसे RDBMS software installed होने चाहिए इसके बाद आपको PHP या ASP जैसी सर्वर साइड स्क्रिप्टिंग के जरिये प्रोग्रामिंग करके dynamic web pages बनाने होंगे और यहीं पर आपको coding करके यह बताना होगा की आपको कौनसे task perform करने हैं।

Task के अनुसार ही आपको SQL commands का उपयोग करना होता है और इन्हें ही query कहा जाता है। हर काम के लिए अलग-अलग query होते हैं जिन्हें आप PHP या ASP की प्रोग्रामिंग के अंदर define करते हैं।

अब user interface के लिए आपको HTML और CSS के pages भी बनाने पड़ेंगे ताकि इन सारे tasks के output आपको या यूजर को दिखाई दे सके।

SQL का इतिहास (History of SQL in Hindi)

  • 1970 में IBM में Donald D. Chamberlin और Raymond F. Boyce द्वारा SQL का पहला version बनाया गया जिसे SEQUEL(Structured English Query Language) कहा जाता था जो की IBM के डेटाबेस से data retrieve करने के लिए बनाया गया था।
  • 1973 में इसका नाम बदल कर SQL कर दिया गया क्योंकि SEQUEL नाम पहले से एक कंपनी की trademark थी।
  • 1978 में SQL का सफलतापूर्वक परिक्षण करने के बाद IBM ने इससे जुड़े commercial products बनाने शुरू कर दिए।
  • 1986 के आसपास Relational Software Inc. द्वारा RDBMS (Relational Database Management System) को लांच किया गया बाद में इस company का नाम बदल कर Oracle रखा गया।

SQL के कुछ महत्वपूर्ण कमांड्स - SQL Commands in Hindi

काम के अनुसार इन commands को तीन अलग-अलग category में बाँट सकते हैं:

DDL (Data Definition Language):
  • CREATE : Database में नए object create करने के लिए इसका उपयोग होता है। 
  • ALTER: Database objects जैसे की table अदि को modify करने के लिए।
  • DROP: किसी Object को डिलीट करने के लिए।
DML (Data Manipulation Language):

  • SELECT: एक या एक से अधिक table से data retrieve करने के लिए। 
  • INSERT: नया record enter करने के लिए।
  • UPDATE: Record को modify करने के लिए।
  • DELETE: रिकॉर्ड डिलीट करने के लिए।
DCL (Data Control Language):
  • GRANT: Users को permission देने के लिए।
  • REVOKE: Permission हटाने के लिए।

और पढ़ें: