Monday, 9 December 2019

Blogspot या Blogger क्या है? इससे फ्री ब्लॉग कैसे बनाये?

Blogger Kya hai

Blogger क्या है? यह सवाल अक्सर ब्लॉगिंग शुरू करते समय लोगों के दिमाग में आता है। लोग ब्लॉग बनाने से पहले गूगल पर सर्च करते हैं की "Free में ब्लॉग कैसे बनायें" , और फिर उनको पता चलता है Blogger या Blogspot की वेबसाइट के बारे में।

आज से कई साल पहले मैंने भी ब्लॉगिंग की शुरुआत Blogger से ही की थी और आज भी मेरे कई सारे ब्लॉग इसी blogging platform पर मौजूद हैं।

तो आज मै आपको भी Blogger के बारे में बताने जा रहा हूँ ताकि आप भी इस जानकारी का लाभ ले सकें।



Blogspot या Blogger क्या है? Blogspot meaning in Hindi

यह Google का एक blog publishing website है जिसे आप blogger.com या blogspot. com पर जा कर access कर सकते हैं। इस वेबसाइट में आप अपने गूगल के अकाउंट से लॉग इन कर सकते हैं। लॉग इन करने के बाद आप यहाँ मुफ्त में ब्लॉग बना सकते हैं। 

जब आप ब्लॉग बनाते हैं तो शुरुआत में आपको अपने ब्लॉग का एक नाम रखना पड़ता है। आप अपने ब्लॉग को publish करने के बाद blogspot. com के sub domain के द्वारा access कर पाएंगे। 

जैसे यदि आपके ब्लॉग का नाम myblog है तो आप इसे myblog.blogspot. com पर जाकर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप चाहें तो खुद का डोमेन यानी custom domain (जैसे myblog. com) खरीद कर इससे जोड़ सकते हैं।

एक बार ब्लॉग बन जाने के बाद आप इसपर जितने चाहें उतने articles post कर सकते हैं। आप अपने आर्टिकल में text, images, videos, links आदि डाल सकते हैं।


Blogger के  क्या फायदे हैं?

  • आप यहाँ से बिना पैसे खर्च किये फ्री में ब्लॉग बना सकते हैं।
  • आपको अपने ब्लॉग के लिए अलग से होस्टिंग स्पेस लेने की जरुरत नही है।
  • अचानक traffic बढ़ने पर भी कोई खतरा नही रहता।
  • Server up-time हमेशा 99.99% रहती है और कभी कम नही होती। 
  • बिना कोडिंग सीखे काम किया जा सकता है।
  • अगर कोडिंग आती है तो आप खुद का custom template design तैयार कर सकते हैं।
  • Custom domain से ब्लॉग को connect कर सकते हैं और इसके लिए भी चार्ज नही देने पड़ते।
  • Adsense से ads लगा कर पैसे कमा सकते हैं।
  • Google Analytics से अपने ब्लॉग पर आने वाली traffic को analyse कर सकते हैं।
  • Webmaster tool का भी उपयोग कर सकते हैं।

Blogger में क्या-क्या limitations हैं?

  • आप PDF, Word, Zip files आदि को upload नही कर सकते।
  • आगर आपका कोई कंटेंट Blogger content policy का उल्लंघन करता है तो वह ब्लॉगर के द्वारा आपसे पूछे बगैर डिलीट भी हो सकता है।
  • Plugins या widgets की संख्या कम है।
  • Theme के customization में कई सारे limitations हैं।
  • URL structure पर आपका पूरा कण्ट्रोल नही रहता।
  • अगर आप blogspot sub-domain का उपयोग कर रहे हैं तो सर्च इंजन पर रैंक करना आसान नही होगा।
  • SEO के लिए कोई विशेष सुविधाएँ नही है।




Blogger में ब्लॉग कैसे बनाये?

अब चलिए बात करते हैं की ब्लॉगर यानि ब्लागस्पाट में ब्लॉग कैसे बनाये। ये काम बहुत ही आसान है आप सिर्फ 5 मिनट में एक साधारण ब्लॉग बना सकते हैं। इसके लिए निचे step-by-step tutorial दिया गया है जिसे follow करके आप कुछ ही मिनटों में एक basic blog तैयार कर सकते हैं।

Step 1: Blogger.com पर जाकर अपने जीमेल या गूगल अकाउंट के यूजरनाम और पासवर्ड से लॉग इन करें।

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Step 2: लॉग इन करने के बाद आपको कुछ ऐसा स्क्रीन नजर आएगा जिसमे आप "Create new blog" button पर click करें।

create-new-blog-in-blogger-in-hindi

Step 3: अगले स्टेप में आपको आपके ब्लॉग का एक अच्छा नाम और एड्रेस बनाना होगा इसके अलावा blog के लिए एक theme भी चुनना पड़ेगा। 

यहाँ पर ध्यान रखें की यदि address डालने पर "Sorry, this blog address is not available." error आये तो इसका मतलब है की उस एड्रेस से दूसरा ब्लॉग पहले से बन चुका है। ऐसी स्थिति में कोई दूसरा एड्रेस बदल लें।

step3

Step 4: अब आपका ब्लॉग बन चुका है। इसे आप "View blog" में जाकर देख सकते हैं। अभी  आपके ब्लॉग में कोई भी कंटेंट या आर्टिकल पोस्ट नही किया गया है, इसके लिए आप "New post" बटन में क्लिक करके नया पोस्ट लिख सकते हैं।

blogger-me-blog-kaise-banaye-step-4

Step 5: ब्लॉगर पर पोस्ट कैसे लिखें? "New post" button पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज open होगा जहाँ से आप अपना पहला पोस्ट लिख पाएंगे।

Create first post

अब आपने इन 5 steps को follow करके अपने लिए एक नया बेसिक ब्लॉग बना लिया है। इसमें अब आप कई सारे posts publish कर सकते हैं। 

तो ये थे कुछ basic steps ब्लॉग बनाने के, लेकिन इससे आगे भी आप कई सारे काम कर सकते हैं जैसे अपने ब्लॉग के डिजाईन यानि थीम को बदलना, basic settings में changes करना, pages create करना और widgets add करना आदि। 

Blogger blog का Theme कैसे बदलें?

ब्लॉगर में ब्लॉग की थीम का चुनाव करने के लिए आपके पास दो विकल्प होते हैं:
  1. Blogger default theme
  2. Custom themes
ब्लॉगर में पहले से कुछ default themes दिए गये होते हैं जिनका उपयोग आप कर सकते हैं। इसके लिए "Theme" में जाएँ और theme के list में से अपनी पसंद की थीम को चुने।

change-blogger-theme

अगर आपको ये themes/templates पसंद नही आ रहे हैं तो कोई बात नही, आप custom themes का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप इन्टरनेट से theme download करना होगा। आप free blogger templates search करके किसी अन्य वेबसाइट से मुफ्त में templates download कर सकते हैं। 

ब्लॉगर पर custom template/theme कैसे लगायें?

इसके लिए "Theme" में जाएँ वहां पर आपको "My theme" section में right side में तीन dots दिखेंगे उसपर क्लिक करें। एक मेनू open होगा जहाँ से आप पहले "Backup" पर क्लिक करके अपने थीम की बैकअप ले लेवें। इसके बाद "Restore" पर क्लिक करें और download किये गये template की XML file को upload कर दें।

change-blogger-custom-template

आपका custom theme upload हो गया है और अब आप ब्लॉग पर जाकर इस डिजाईन को देख सकते हैं। 

आगे पढ़ें:

Final Words:

अगर आप ब्लॉगर पर ब्लॉग बना रहे हैं तो आप कोई custom domain जरुर ले लें इससे आपका blog professional लगेगा और इसके कई और फायदे भी हैं। अब हमें उम्मीद है की आपको यह पढ़कर समझ आ गया होगा की Blogger क्या है और इससे फ्री ब्लॉग कैसे बनाये। अगर इससे जुड़े कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो आप निचे कमेंट कर सकते हैं।

Wednesday, 4 December 2019

डिजिटल मार्केटिंग में कैसे बनाये सुनहरा करियर? Career in Digital Marketing in Hindi

digital marketing me career kaise banaye

डिजिटल मार्केटिंग” आजकल आपको ये शब्द बहुत ज्यादा सुनने को मिल रहा होगा। हालाँकि हम आपको पहले भी इस बारे में बता चुके हैं की डिजिटल मार्केटिंग क्या है और कितने प्रकार के होते हैं? लेकिन आज हम बात करने वाले हैं की कैसे आप इसे सीखकर बना सकते हैं अपना एक बेहतरीन करियर।

अब आप ये तो जानते ही हैं की किसी भी बिज़नस के लिए मार्केटिंग कितनी जरुरी है। क्योंकि आपके पास कितना भी अच्छा प्रोडक्ट क्यों न हो जब तक उसके बारे में लोगों को पता नही चलेगा तब तक उसकी कोई वैल्यू नही है क्योंकि कोई उसे लेगा नही और आपको उसका प्रॉफिट मिलेगा नही।

इसलिए मार्केटिंग का बहुत ही अहम रोल है आपके बिज़नस को आगे बढ़ाने में। हालंकि आप अपने बिज़नस या ये कहें की अपने प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में लोगों को दो तरीकों से बता सकते हो एक ऑफलाइन मार्केटिंग करके और दूसरा ऑनलाइन मार्केटिंग करके जिसे हम डिजिटल मार्केटिंग भी कहते हैं। तो आज हम बात करने वाले डिजिटल मार्केटिंग के बारे में।


डिजिटल मार्केटिंग क्या है?

वैसे तो डिजिटल मार्केटिंग के अंदर ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रकार की मार्केटिंग होती है लेकिन आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग या इन्टरनेट मार्केटिंग को ही डिजिटल मार्केटिंग कहा जाने लगा है।

यानि यहाँ पर डिजिटल मार्केटिंग का अर्थ ऑनलाइन मार्केटिंग से है।

जब हम किसी प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग ऑनलाइन तरीके से करते हैं तो उसे हम डिजिटल मार्केटिंग कहते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग में काम कैसे होता है?

वैसे तो कई सारे तरीके हैं काम करने के लेकिन यहाँ पर मुख्य रूप से हमारे पास एक वेबसाइट होता है जो की हमारे बिज़नस से रिलेटेड होता है। जैसे अगर कोई हम प्रोडक्ट जैसे- कपड़ा, मोबाइल आदि ये सब बेचते हैं तो ऑनलाइन हमारी एक e-commerce टाइप की वेबसाइट हो सकती है।

इसी तरीके से अगर हम किसी प्रकार की सर्विस लोगों को देते हैं तो उसकी भी हम एक वेबसाइट बना सकते हैं।

वेबसाइट बनाने के बाद अगला स्टेप आता है वेबसाइट के ऑनलाइन प्रमोशन का, ताकि हमारे प्रोडक्ट के बारे में लोगों को पता चले और वो उसे ख़रीदे।

तो ऑनलाइन प्रोडक्ट और सर्विस को वेबसाइट के जरिये प्रमोट करने के कई तरीके होते हैं:

सर्च इंजन - डिजिटल मार्केटिंग में सर्च इंजन यानि गूगल, Bing आदि इन सभी का बहुत ही अहम रोल होता है। सर्च इंजन के जरिये हमारी वेबसाइट पर दो तरीके से लोग आते हैं:
  • Organic search 
  • Paid search 
ये दोनों डिजिटल मार्केटिंग का ही पार्ट हैं।

Organic search मतलब की इसमे हमे गूगल या किसी भी सर्च इंजन को कोई पैसा नही देना अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने का लेकिन हमे अपनी वेबसाइट को गूगल या किसी और सर्च इंजन के हिसाब से कस्टमाइज करना है जिसे हम कहते हैं SEO जिसके बाद ये सर्च इंजन हमारी वेबसाइट को तब अपनी सर्च इंजन में तब सबसे ऊपर दिखायेगा जब कोई विजिटर हमारी वेबसाइट से रिलेटेड कोई चीज़ गूगल या बाकि सर्च इंजन में सर्च करेगा।

Paid search  में हमे गूगल को पैसे देने पड़ते हैं अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए। गूगल ने इसके लिए अपना एक प्लेटफार्म अलग से Google Adwords बनाया हुआ है। जहाँ हम अपने प्रोडक्ट की प्रमोशन के लिए ads कैंपेन ऑनलाइन बना सकते हैं।

सोशल मीडिया- दूसरा तरीका है डिजिटल मार्केटिंग में सोशल मीडिया जहाँ हमे अपने प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट करने के लिए फेसबुक, Instagram, ट्विटर और LinkedIn इन सभी पर शेयर करना होता है।

हालंकि इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी हम दो तरीके से अपने प्रोडक्ट और सर्विस को मार्केटिंग कर सकते हैं। एक आर्गेनिक तरीका जिसमे हमे कोई भी पैसा नही देना होता है लेकिन कोशिश करनी होती है की ज्यादा से ज्यादा लोग हमे सोशल मीडिया पर फॉलो करें। जिसके लिए हमे attractive पोस्ट रेगुलर शेयर करने होते हैं।

दूसरा तरीका होता है paid Ads जिसमे हम सोशल मीडिया पर अपने प्रोडक्ट से related Ads कैंपेन बनाते हैं और इसके लिए हमे उन्हें पैसे भी देने पड़ते हैं।

E-mail- ये भी एक बहुत ही बढ़िया तरीका है टार्गेटेड लोगों को अपने वेबसाइट पर लाने का ताकि हमारी प्रोडक्ट की sell हो। जब हमारी वेबसाइट पर कोई भी विजिटर आता है तो हम कोशिश करते हैं की वो हमारे email सब्सक्राइब widget को fill करे ताकि हमारे पास उसकी email address आ जाये और फिर जब हमारा कोई new प्रोडक्ट या अपडेट आये तो हम उसे डायरेक्ट mail कर सके यही E-mail marketing होता है।

Google Analytics- ये भी डिजिटल मार्केटिंग का बहुत ही इम्पोर्टेन्ट टूल है जिसमे हम जितना भी ट्रैफिक हमारे वेबसाइट पर visitor हर रोज आते हैं, उसे देख सकते हैं। इसके साथ -साथ इसमें हम ये भी जान सकते हैं ये ट्रैफिक कौन-कौन सी location से है कौनसे से डिवाइस से है सब कुछ।

तो ये कुछ बहुत ही इम्पोर्टेन्ट चीजें थी जिनको हम डिजिटल मार्केटिंग में प्रयोग करते हैं। I hope अब आपका डिजिटल मार्केटिंग क्या है इसका concept जरुर क्लियर हो गया होगा।

लेकिन अब आपके मन में सवाल ये होगा की ये क्यों आज के टाइम में डिजिटल मार्केटिंग इतना इम्पोर्टेन्ट हो गया है। क्यों इतने सारे कोचिंग सेंटर इसी कोर्स पर इतना ध्यान देने लगे हैं और सारी कम्पनी चाहे वो छोटी हो या बड़ी, डिजिटल तरीके से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करना पसंद कर रहे हैं।


डिजिटल मार्केटिंग क्यों जरुरी है आज के दौर में?

आखिर हम digital marketing के बारे में क्यों बात कर रहे हैं? आज के समय में आखिर इसका महत्व कितना? आखिर क्यों हर एक बिज़नस ऑनलाइन होते जा रहे हैं?

चलिए जानते हैं की आजकल digital marketing trend में क्यों है:

इन्टरनेट का विस्तार
सबसे बड़ा कारण तो यही है की आज के समय में इन्टरनेट अब लोगों का पास बहुत ही आसानी से मिल जाता है। और लोग अपना सबसे ज्यादा समय इन्टरनेट पर ही बिताते हैं। कभी फेसबुक या Instagram चलाने में या फिर कभी गूगल में कुछ सर्च करते हैं नही तो YouTube में कोई न कोई विडियो देखते हैं।

इसलिए जो बिज़नस करते हैं वो क्यों न अपने प्रोडक्ट को इन सभी प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों के पास पहुचाएं। और मार्केटिंग में एक कहावत बहुत प्रसिद भी की "वहां रहिये जहाँ आपके ग्राहक हैं"

कम लागत
दूसरा जो एक बहुत ही बड़ा कारण है डिजिटल मार्केटिंग को चुनने का low cost यानि कम लागत। जब आप ऑफलाइन तरीके से अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हो तो उसमे आपको टीवी पर ads, newspaper में ads या फिर बड़े -बड़े बैनर ,पोस्टर पब्लिक प्लेस पर लगाने होते हैं जिसमे बहुत ही ज्यादा आपकी इन्वेस्टमेंट होती है लेकिन जब आप अपने प्रोडक्ट को ऑनलाइन तरीके से मार्केटिंग करते हो तो आपको ऑफलाइन के तुलना में आधे से भी कम लागत लगती है। लेकिन प्रॉफिट आपको उससे 10 गुना ज्यादा मिल सकता है।

बहुत जल्दी वैल्युएबल ब्रांड बना सकते हैं
जब आप ऑनलाइन तरीके से अपने बिज़नस की मार्केटिंग करते हो, वो भी तब जब की आप बिलकुल नये हो और आपको कोई नही जानता तो आप कंटेंट मार्केटिंग यानि टेक्स्ट या विडियो कंटेंट के जरिये अपने प्रोडक्ट के बारे में लोगों को जागरूक कर सकते हो| की आखिर हमारा ये प्रोडक्ट आपके लिए किस तरीके से हेल्पफुल होगा या बेस्ट होगा।

जिससे लोग आपको न सिर्फ जान पाएंगे बल्कि आपके प्रोडक्ट पर trust भी करने लगेंगे और वो आपके लॉयल कस्टमर बन पाएंगे। डिजिटल मार्केटिंग के जरिये आप अपने बिलकुल न्यू ब्रांड को बहुत ही जल्द एक वैल्यूबल ब्रांड बना सकते हैं। 

टार्गेटेड मार्केटिंग
ये डिजिटल मार्केटिंग में बहुत ही बढ़िया एक सुविधा है की आप सिर्फ उन्ही लोगों को अपने प्रोडक्ट का ad दिखा सकते हो जो आपके प्रोडक्ट को लेकर इंटरेस्टेड हैं। अब चाहे आप फेसबुक के जरिये ad कैंपेन चलायें या फिर Google Ads के जरिये। 

री-मार्केटिंग
अगर मान लीजिये आपकी वेबसाइट पर कोई विजिटर आया और उसने आपके प्रोडक्ट को चेक तो किया लेकिन buy नही किया। तो आप उसको दुबारा से अपने प्रोडक्ट के ad दिखा सकते हो जिसे री-मार्केटिंग कहा जाता है। जिससे काफी ज्यादा चांसेस बन जाते हैं की वो विजिटर आपका प्रोडक्ट अब खरीद लेगा तो ये भी एक बहुत ही बढ़िया आप्शन है ऑनलाइन मार्केटिंग में जिसे ऑनलाइन मार्केटिंग एक्सपर्ट भी खुद मानते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग में करियर की सम्भावनाएं

मुझे पूरी उम्मीद है की आप अच्छे से जान गये होंगे की आज के समय में किसी भी बिज़नस को grow करना है तो डिजिटल मार्केटिंग कितनी अहम रोल प्ले कर सकता है।

और यही कारण है की आज हर छोटी-से-छोटी और बड़ी-से-बड़ी बिज़नस अपने प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग में ऑनलाइन को ही प्राथिमिकता देती हैं। और जिससे आज इंडस्ट्री में डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट लोगों की डिमांड दिन-प्रति-दिन बढती जा रही है। न सिर्फ डिजिटल मार्केटिंग के फील्ड में नौकरी की डिमांड ही है बल्कि कंपनी काफी अच्छा सैलरी पैकेज भी उन्हें देने को तैयार हैं।

तो अगर आप अपनी current जॉब को लेकर ज्यादा खुश नही है या फिर आप अपने करियर में अपग्रेड होना चाहते हैं। मै आपको बता दूँ की आप डिजिटल मार्केटिंग में कुछ साल काम करने के बाद अपना खुद का भी ऑनलाइन बिज़नस सेटअप कर जैसे ब्लॉगिंग, या फिर अपनी खुद की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी से या फिर आप खुद भी किसी का प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हो तो, आप डिजिटल मार्केटिंग के फील्ड में न सिर्फ जॉब से बल्कि बाकि और भी बहुत कुछ करके बहुत अच्छा ऑनलाइन पैसे कमा सकते हो।

और मै आपको ये भी बताउं की डिजिटल मार्केटिंग में आपको ज्यादा स्ट्रेस भी नही लेना पड़ता| हाँ शुरू में जब आपको उतना आईडिया नही होता तो जरुर थोडा effort लगाना पड़ता है लेकिन उसके बाद आप काफी आराम से अपनी जिंदगी में काम के साथ-साथ अपनी जिदंगी को एन्जॉय भी कर पाओगे।

या फिर आपने अभी 12th पास की है या या फिर कॉलेज खत्म किया है और जॉब ढूंड रहे हैं तो डिजिटल मार्केटिंग आपके लिए सबसे बेस्ट आप्शन है अपने करियर को सुनहरा बनाने का। 

लेकिन अब बात आती है की डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें ? तो मै अब आपको दो तरीके बताता हूँ जिससे आप डिजिटल मार्केटिंग सीख सकते हो। लेकिन उससे पहले मै आपको बताना चाहता हूँ की आपके अन्दर क्या-क्या स्किल का होना बहुत जरुरी है एक बेहतरीन डिजिटल मार्केटर बनने के लिए।

डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए क्या-क्या स्किल होना बहुत जरुरी है।

हालंकि डिजिटल मार्केटिंग सिखने में जो चीजें आती हैं वो तो आप जब डिजिटल मार्केटिंग सीखते हो तो आपको बताई ही जाती हैं लेकिन उसके अलावा भी आपके अन्दर अलग से क्या-क्या स्किल का होना जरुरी है ताकि आप डिजिटल मार्केटिंग में एक बेहतरीन करियर बना सको।

खुद का इंटरेस्ट और इन्टरनेट से प्यार:
अगर आप डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनना चाहते हो तो आपका खुद का इंटरेस्ट उसमे हो ये बहुत ही जरुरी है। आपको इन्टरनेट चलाना अच्छा लगता हो उसमे न्यू चीजों के बारे में अपडेट होना और उन्हें सीखना पसंद हो। सोशल मीडिया का प्रयोग करना आपको अच्छा लगता हो। साथ ही आपका बिज़नस की तरफ भी एक रुझान हो क्योंकि जब आप मार्केटिंग में किसी भी प्रोडक्ट को प्रमोट करते हो तो आपको काफी स्ट्रेटेजी बनानी पडती हैं की कैसे बिज़नस में प्रॉफिट हों।

कम्युनिकेशन स्किल:
डिजिटल मार्केटिंग में जरुरत होती हैं इंग्लिश की, बहुत ज्यादा नही लेकिन फिर भी आप कंटेंट को समझ सको थोडा बहुत लिख और बोल सको। क्योंकि इंग्लिश एक बिज़नस लैंग्वेज हैं इसलिए जितने भी बिज़नस मार्केटिंग करती हैं उसमे वो इंग्लिश का ही प्रयोग करती हैं इसलिए आपको इंग्लिश की मध्यम लेवल की जानकरी हो बहुत जरुरी है।

Analytical स्किल:
जब आप कोई कैम्पेन ऑनलाइन चलाते हो तो आपको बाद में ये anlyasics करना होता है की कितने लोग वेबसाइट पर आये। कितनो ने प्रोडक्ट को ख़रीदा ताकि आपका अगला स्टेप सही हो इसलिए डिजिटल मार्केटिंग में एनालिटिकल स्किल का होना बहुत बहुत जरुरी है।

Upgrading skill:
डिजिटल मार्केटिंग में सबसे अहम होता है खुद को अपडेट रखने के साथ-साथ अपग्रेड भी करना क्योंकि आप तो जानते ही हैं की इन्टरनेट पर सेकंड में चीजें बदलती हैं इसलिए बिज़नस grow करें इसके लिए आपको ट्रेंड का साथ चलना जरुरी है जिसके लिए आपको अपग्रेड होना पड़ेगा।
तो ये सभी पॉइंट्स थे जो आपको ध्यान में रखकर डिजिटल मार्केटिंग को चुनना है।

डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें 

अब तक के पोस्ट में आपने जान लिया की डिजिटल मार्केटिंग क्या है, क्यों आज के दौर में जरुरी हो गया है और आपके अन्दर क्या -क्या स्किल होनी जरुरी है डिजिटल मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए।

अब हम बात करेंगे सबसे इम्पोर्टेन्ट पॉइंट की डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें?

तो mainly दो तरीके से हम डिजिटल मार्केटिंग सिख सकते हैं।

1. डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करें
डिजिटल मार्केटिंग सीखने का सबसे पहला तरीका तो यही है की आप किसी अच्छे से कोचिंग सेण्टर को सर्च करके वहां से डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स करें।

आजकल बहुत से ऑनलाइन प्लेटफार्म भी आपको मिल जायेंगे जहाँ से आप डिजिटल मार्केटिंग सीख सकते हैं इनकी खास बात यह है की की किसी कोचिंग सेण्टर के मुकाबले इनकी फीस सस्ती होती है।

लेकिन ऑफलाइन क्लास की बात करें तो इसके अलग फायदे हैं जैसे क्लास रूम में डिजिटल मार्केटिंग सीखते समय कोई परेशानी आये तो उसे फैकल्टी की मदद से जल्दी सुलझा सकते हैं।

2. खुद का ब्लॉग या वेबसाइट बनाकर डिजिटल मार्केटिंग सीखें 
दूसरा जो तरीका है डिजिटल मार्केटिंग सीखने की आप खुद का ब्लॉग या वेबसाइट बनाये। इन्टरनेट के माध्यम से आप lesson-by-lesson जो डिजिटल मार्केटिंग के बारे में सीखते हैं, उसकी Practice अपने ब्लॉग पर करें। 
अपने ब्लॉग/वेबसाइट पर ट्रैफिक लाना सीखें, अपने audience को value provide करें और आखिर में उनके काम की चीजें सेल करें।

यह भी पढ़ें:
Final Words
मुझे पूरी आशा है की आपको इस पोस्ट को पढने के बाद जानकरी हो चुकी होगी की आप कैसे डिजिटल मार्केटिंग में अपना करियर सुनहरा बना सकते हो।

अगर आपका कोई भी सुझाव या सवाल हमारे पोस्ट के बारे में है तो आप हमे कमेंट करके बता सकते हैं।

Guest Author Bio:
मेरा नाम दीपक भण्डारी है और मै DeepakBhandari.in फाउंडर हूँ |  मेरे इस ब्लॉग पर आपको डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन बिज़नेस, इन्टरनेट और ऑनलाइन पैसे कैसे कमाए से related काफी सारी helpful जानकारी मिलेंगी। यह ब्लॉग बनाने के पीछे मेरा सबसे बड़ा उद्देश्य यही है की लोगों को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिज़नस के बारे मे जानकारी दूँ ताकि जो लोग ऑनलाइन बिज़नेस कर रहे हैं या करना चाहते हैं उन्हें अपने बिज़नेस को grow करने मे help मिले।

अगर आप भी WebinHindi पर guest post publish करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें

Thursday, 21 November 2019

वर्डप्रेस क्या है? इससे क्या-क्या बनाया जा सकता है? What is WordPress in Hindi?

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वर्डप्रेस क्या है? कई लोग कहते हैं की यह ब्लॉग बनाने के लिए उपयोग होता है।

इस बात में सच्चाई तो है लेकिन यह पूरी तरह से सच नही है।

हालाँकि वर्डप्रेस की शुरुआत 2003 में एक blogging tool के रूप में ही हुई थी लेकिन आज इतने सालों बाद इसका स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है।

आज यह सिर्फ एक ब्लॉगिंग प्लेटफार्म नही है, बल्कि यह दुनिया का सबसे popular content management system (CMS) बन चुका है और आज इन्टरनेट पर मौजूद 7 करोड़ से भी ज्यादा websites इसी WordPress से बनाये गये हैं।

आज इससे केवल ब्लॉग ही नही बल्कि हर प्रकार की वेबसाइट बनाई जा सकती है। आज हम इसी के बारे बात करने वाले हैं। अगर आपको यह जानना है की वर्डप्रेस क्या होता है तो इस आर्टिकल को जरुर पढ़ें।
आगे आपको सारी जानकारियाँ बताएँगे लेकिन उससे पहले आपको यह पता होना चाहिए की WordPress नाम से इन्टरनेट पर दो अलग-अलग platforms मौजूद हैं:
  • wordpress.org और
  • wordpress.com
और इन दोनों के बीच बहुत अंतर है जिसके बारे में आप निचे पढ़ सकते हैं। इस आर्टिकल में हम मुख्य रूप से Wordpress.org (Content Management System) के बारे में बात कर रहे हैं और ज्यादातर जानकारियाँ इसी के बारे में हैं। 

वर्डप्रेस क्या है? What is WordPress in Hindi?

वर्डप्रेस एक प्रकार का content management system यानी एक CMS है जिसका उपयोग वेबसाइट बनाने के लिए किया जाता है। 

यह एक open source software program है जिसे PHP और MySQL से बनाया गया है। इसे इन्टरनेट से फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है और अपने वेब सर्वर पर install करके बड़ी आसानी से वेबसाइट या ब्लॉग बनाया जा सकता है। 

यह एक बहुत ही आसान सा user interface provide करता है जहाँ से आप अपने वेबसाइट के कंटेंट को आसानी से मैनेज कर सकते हैं।

अगर आपको बिना कोडिंग या प्रोग्रामिंग के वेबसाइट बनानी है तो इस काम में वर्डप्रेस आपकी पूरी सहायता कर सकता है। 

वेबसाइट की डिजाईन बदलनी हो तो 1 मिनट के अंदर अपनी पसंद की कोई भी theme install कर सकते हैं, कोई नई feature add करनी हो तो उसके लिए पहले से बने-बनाये plugins हैं जिन्हें बस इनस्टॉल करना है और फिर काम चालू, कोई article publish करनी हो तो यह काम भी WordPress पर बहुत आसान है।

क्या आप जानते हैं?  वर्डप्रेस दुनिया का सबसे popular CMS है।

 W3Techs की वेबसाइट के अनुसार पूरे world में जितने भी websites हैं उनमे से लगभग 35% वेबसाइट वर्डप्रेस का उपयोग करते हैं।

वेबसाइट बनाने के लिए वर्डप्रेस की तरह और भी कई प्रकार के content management systems मौजूद हैं जैसे: Joomla, Drupal, Magento आदि।

लेकिन आंकड़ों के अनुसार इन्टरनेट पर मौजूद 43.3% website किसी भी प्रकार का कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम उपयोग नही करते हैं।

और जितने भी वेबसाइट CMS use करते हैं उनमे से 61.8% CMS WordPress हैं यानि वर्डप्रेस का मार्किट शेयर 61.8% का है जो की सबसे ज्यादा है।

wordpress-cms-market-share
WordPress CMS market share 2019 | Data Source: W3Techs
ऊपर chart देख कर के आपको यह समझ आ गया होगा की WordPress अपने competitors से कितना आगे है।इसी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है की कितने सारे लोग वेबसाइट बनाने के लिए इस प्लेटफार्म का उपयोग कर रहे हैं।

Wordpress. com और wordpress.org में क्या अंतर है

जैसा की हमने आपको पहले ही बताया की वर्डप्रेस के नाम से दो वेबसाइट प्लेटफॉर्म्स हैं लेकिन अब हम बात करते हैं की आखिर वर्डप्रेस.कॉम और wordpress.org में क्या difference है:

wordpress.org: यह एक ओपन सोर्स कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेर है। इसे कोई भी मुफ्त में उपयोग कर सकता है। इसके लिए आपको एक डोमेन नेम और होस्टिंग की जरुरत पड़ती है इसलिए इसे self-hosted WordPress भी कहा जाता है।

यहाँ पर आप अपनी वेबसाइट को पूरी तरह से control कर सकते हैं, themes, plugins आदि का उपयोग कर सकते हैं।

wordpress.com: यह Godaddy की तरह ही एक hosting platform है जहाँ पर आप अपनी वर्डप्रेस वेबसाइट को होस्ट कर सकते हैं। यह भी WordPress के co-founder द्वारा ही बनाया गया है और इसीलिए लोग इन दोनों में confused रहते हैं।

यहाँ पर Godaddy की तरह ही hosting plans दिए गये हैं इसके अनुसार आपको अपने वेबसाइट होस्टिंग के लिए हर महीने कुछ चार्ज देने होते हैं। 

यह free hosting भी provide करती है लेकिन उसमे कई सारे limitations होते हैं जैसे की यदि आप फ्री होस्टिंग प्लान लेकर वेबसाइट बनाते हैं तो यह आपके साईट पर कुछ ads लगा देती है जिसके आपको कोई पेमेंट नही मिलते और इन ads को हटाने के लिए आपको paid plans लेने पड़ेंगे। 

वर्डप्रेस से क्या-क्या बनाया जा सकता है?

अब चलिए देखते हैं की हम वर्डप्रेस से कौन-कौन से type के websites बना सकते हैं:
  • Personal website
  • Blog
  • Static website
  • News website
  • Job portal
  • Portfolio
  • Business website
  • School/College Websites
  • Business directory
  • eCommerce site
  • Question answer website
  • Coupon website
  • Online Course selling website
  • Social network
  • Forum
  • Multilingual Websites
  • Wiki sites
  • Affiliate Website
  • Podcast 
  • Photo Gallery
  • Classified Ad
  • Job board
  • Membership Website
  • Review site
  • Real Estate Websites
  • Online examination site
  • Auction website
वर्डप्रेस से आप इन्टरनेट पर मौजूद लगभग हर प्रकार की वेबसाइट बना सकते हैं।

वर्डप्रेस की विशेषताएं - Features of WordPress in Hindi

चलिए अब वर्डप्रेस की विशेषताओं के बारे जानते हैं, इस CMS में कई सारे ऐसे features हैं जो की इस platform को सबसे बेहतरीन बना देता है। आज हम इनमे से कुछ फीचर के बारे में बात करेंगे:

Plugins: अगर आप अपनी वेबसाइट के features को extend करना चाहते हैं तो आपके हर जरुरत की प्लगइन यहाँ मौजूद है। वर्डप्रेस में हज़ारों की संख्या में plugins हैं जिन्हें प्लगइन डायरेक्टरी के जरिये ढूँढना भी बहुत ही आसान है।

Themes: वर्डप्रेस में तीन डिफ़ॉल्ट थीम पहले से दिए गये होते हैं लेकिन यदि आपको यह पसंद न आये तो आपके वेबसाइट सुन्दर बनाने के लिए थीम डायरेक्टरी में हजारों themes मौजूद हैं। आप चाहें तो खुदका थीम  एक बटन क्लिक करके अपलोड कर सकते हैं। आपकी वेबसाइट में नया थीम केवल कुछ सेकंड में apply हो जाता है।

Search Engine Optimization (SEO): अगर traffic चाहिए तो सर्च इंजन के लिए वेबसाइट को optimize करना बहुत ही जरुरी है और इस काम में वर्डप्रेस आपकी बहुत मदद करता है। यह SEO optimized है लेकिन आप चाहें तो SEO plugins का भी उपयोग कर सकते हैं।

User Management:
जरुरी नही है की आप अकेले ही अपने वेबसाइट को मैनेज करें, इसके लिए आपकी कई लोगों की टीम भी हो सकती है। जब multiple users आपकी साईट में contribution कर रहे हों तो admin, authors, editors जैसे हर यूजर के लिए उसके role के अनुसार permission define करना जरुरी हो जाता है और यह काम भी इस प्लेटफार्म पर बहुत ही आसान है।

Media Management: यदि आप अपनी वेबसाइट पर images या किसी प्रकार का content upload करना हो तो यह काम भी easily किया जा सकता है। यहाँ पहले से अपलोड किये गये images को आप कभी भी gallery में जाकर खोज सकते हैं और उसका दुबारा उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही यहाँ image editing के लिए कुछ basic tools भी दिए गये हैं।

Multi Language: अगर आपको इंग्लिश भाषा को लेकर परेशानी है तो आप वर्डप्रेस को हिंदी में या अपनी पसंद के किसी भी भाषा में उपयोग कर सकते हैं। यह 70 से भी अधिक languages को support करता है।

Community:  जैसा की आप जानते हैं वर्डप्रेस वेब पर सबसे लोकप्रिय ओपन सोर्स सीएमएस है इसलिए यहाँ आपकी सहायता करने के लिए एक बहुत बड़ी community मौजूद है जहाँ आप सवाल पूछ कर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। इसके लिए आपको WordPress support forum में जाना होगा।

वर्डप्रेस का इतिहास - History of WordPress in Hindi

  • सन 2001: Michel Valdrighi नाम के एक French programmer ने एक 2001 में blogging tool बनाया था जिसे b2/cafelog नाम दिया गया था असल में यही वर्डप्रेस के लिए नीव बनी। लेकिन 2002 में Valdrighi ने इसका development बंद कर दिया।
  • सन 2003Matt Mullenweg और Mike Little नाम के दो लोगों ने इसी टूल से idea लेकर WordPress बनाया और पहला version launch किया।  
  • सन 2004: वर्डप्रेस में पहली बार plugin system को जोड़ा गया।
  • सन 2005: पहली बार Theme system add किया गया और एक default template डाला गया इसके अलावा Image upload की सुविधा डाली गयी, import system को improve किया गया और भी कई टूल्स जोड़े गये।
  • सन 2007: नया interface design किया गया और auto save, spell checking जैसे features डाले गये
ऐसे ही हर साल लगातार वर्डप्रेस को improve किया जाता रहा और आज भी नये-नये updates आते रहते हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

वर्डप्रेस के क्या फायदे हैं - Benefits of WordPress in Hindi

  1. यह Open-source है जिससे की इसे फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है इसके अलावा developers इसके source code का उपयोग भी कर सकते हैं।
  2. वर्डप्रेस उपयोग करने में बहुत ही आसान है, वेब डिजाइनिंग से लेकर content publishing जैसे सारे काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है।
  3. इसे होस्टिंग सर्वर पर install करना बहुत आसान है।
  4. हजारों की संख्या में themes पहले से मौजूद है।
  5. वर्डप्रेस SEO friendly है। 
  6. यह e-commerce website बनाने की सुविधा देता है।
  7. प्लगइन के जरिये साईट functionality को upgrade कर सकते हैं।
  8. Responsive web design आजकल बहुत जरुरी है और वर्डप्रेस से बनी वेबसाइट responsive और mobile friendly होती है।
  9. बिना coding या programming knowledge के साईट बनाया जा सकता है।
  10. Social media integration करना कोई मुश्किल काम नही है।

वर्डप्रेस के क्या नुकसान हैं - Disadvantages of WP in Hindi

  1. वर्डप्रेस से वेबसाइट बनाने के लिए होस्टिंग की जरुरत पड़ती है यानि आपको किसी होस्टिंग कंपनी से hosting plans लेने पड़ेंगे जिसके लिए आपको monthly कुछ charges देने पड़ेंगे।
  2. अगर आपको डिजाईन को customize करना हो तो इसके लिए coding skills जैसे: HTML, CSS, PHP आदि आने चाहिए।
  3. ज्यादा plugins use करने से आपकी site की speed slow हो सकती है। 

Conclusion

आखिर में इस आर्टिकल को पढ़कर आपको यह पता चल गया होगा की WordPress क्या है और इसके क्या-क्या features हैं। अगर आप भी खुद का वेबसाइट या ब्लॉग बनाना चाहते हैं तो वर्डप्रेस का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक डोमेन नेम और होस्टिंग की जरुरत पड़ेगी और फिर वर्डप्रेस से आप अपनी मनचाही site बना सकते हैं।

अगर आपको वर्डप्रेस के बारे में हमारा यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें। इस बारे में अपनी राय रखने के लिए निचे कमेंट बॉक्स का जरुर उपयोग करें।

Monday, 4 November 2019

SQL क्या है? (What is SQL in Hindi?)

SQL in Hindi

आप इन्टरनेट पर हर रोज कई सारे वेबसाइट का उपयोग करते हैं, अपने मोबाइल में भी आपने कई सारे online apps को install किया होगा, इनमे से ज्यादातर apps और websites में आपके account बने होते हैं और आपके details इनके डेटाबेस में स्टोर रहते हैं।

आप डेटाबेस के बारे में जानते ही होंगे।

आपके सारे records database में सालों साल तक हमेशा सुरक्षित रहते हैं, आप फेसबुक या ट्विटर में जो भी शेयर करते हैं उन्हें आप सालों बाद भी देख सकते हैं।

आप जानना चाहते हैं की SQL क्या है? लेकिन, हम यहाँ पर डेटाबेस की बातें क्यों कर रहे हैं?


ऐसा दरअसल इसलिए क्योंकि SQL डेटाबेस से ही जुड़ा हुआ है और इसी की मदद से ही किसी database को manage किया जाता है।

अब चलिए विस्तार से जानते हैं की आखिर SQL क्या है (What is Sql in Hindi) और यह किस काम आता है।

SQL क्या है? (What is SQL in Hindi?)

SQL का full form Structured Query Language है। यह एक प्रकार की कंप्यूटर भाषा है जिससे डेटाबेस को command या instruction दिया जाता है। डेटाबेस create करना हो, डाटा स्टोर करना हो, update या delete करना हो तो इन सबके लिए अलग-अलग commands होते हैं जिन्हें ही SQL कहा जाता है। 

सारे RDBMS (Relational Database Management System) SQL को एक standard database language की तरह उपयोग करते हैं।

चलिए आसान शब्दों में समझते हैं, मानकर चलिए आप फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाना चाहते हैं, इसके लिए आपको एक registration form भरना होता है।

फॉर्म भरकर जब आप submit button पर क्लिक करते हैं तो फॉर्म में आपके द्वारा भरे गये सारे डाटा फेसबुक के डेटाबेस में स्टोर हो जायेंगे।

लेकिन यह काम होगा कैसे?

जब आप submit बटन पर click करते हैं तो back-end में SQL का एक command execute होगा जो की database को डाटा स्टोर करने का instruction देगा।

यानि रजिस्ट्रेशन फॉर्म और डेटाबेस के बीच जो communication यानि बातचीत हो रही है वो SQL की भाषा में होती है।


SQL का क्या उपयोग है? (Use of SQL in Hindi)

चलिए अब जानते हैं की SQL का क्या काम है और इसके जरिये database से जुड़े कौन-कौन से operation perform किये जा सकते हैं:
  • SQL से आप एक नया database create कर सकते हैं।
  • किसी डेटाबेस से डाटा को retrieve कर सकते हैं यानि data को निकालकर उपयोग कर सकते हैं।
  • डेटाबेस में नए डेटा insert कर सकते हैं।
  • पहले से मौजूद data को update या modify कर सकते हैं।
  • डेटा को delete कर सकते हैं।
  • एक database के अंदर आप नया table create कर सकते हैं।
  • Table को drop यानि डिलीट भी कर सकते हैं।
  • Views, Stored procedures, और functions create कर सकते हैं।
  • Tables, procedures और views के लिए permission set कर सकते हैं।
यानि database management system में सारे काम SQL के द्वारा किये जा सकते हैं।

वेबसाइट में SQL कैसे काम करता है? (How SQL Works in Hindi)

इन्टरनेट पर मौजूद जितने भी dynamic websites हैं सभी database driven होते हैं। सोशल मीडिया साईट, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, रेलवे रिजर्वेशन जैसी हर डायनामिक साइट्स डेटाबेस से जुड़े होते हैं और जहाँ डेटाबेस है वहां SQL का उपयोग जरुर होता है।

अब चलिए समझते हैं की एक live website में आखिर SQL कैसे काम करता है। 

किसी भी वेबसाइट में अकेला SQL कुछ काम नही कर सकता इसके लिए कई सारी चीजों को एक साथ मिलकर काम करना होता है और इसके लिए कुछ चीजों की जरुरत पड़ती है जैसे:
  • DBMS Program (जैसे MySQL, SQL Server, MS Access, Oracle, Sqlite आदि) 
  • Server side scripting (जैसे PHP, ASP आदि)
  • SQL commands
  • HTML, CSS
आपके सर्वर में MySQL जैसे RDBMS software installed होने चाहिए इसके बाद आपको PHP या ASP जैसी सर्वर साइड स्क्रिप्टिंग के जरिये प्रोग्रामिंग करके dynamic web pages बनाने होंगे और यहीं पर आपको coding करके यह बताना होगा की आपको कौनसे task perform करने हैं।

Task के अनुसार ही आपको SQL commands का उपयोग करना होता है और इन्हें ही query कहा जाता है। हर काम के लिए अलग-अलग query होते हैं जिन्हें आप PHP या ASP की प्रोग्रामिंग के अंदर define करते हैं।

अब user interface के लिए आपको HTML और CSS के pages भी बनाने पड़ेंगे ताकि इन सारे tasks के output आपको या यूजर को दिखाई दे सके।

SQL का इतिहास (History of SQL in Hindi)

  • 1970 में IBM में Donald D. Chamberlin और Raymond F. Boyce द्वारा SQL का पहला version बनाया गया जिसे SEQUEL(Structured English Query Language) कहा जाता था जो की IBM के डेटाबेस से data retrieve करने के लिए बनाया गया था।
  • 1973 में इसका नाम बदल कर SQL कर दिया गया क्योंकि SEQUEL नाम पहले से एक कंपनी की trademark थी।
  • 1978 में SQL का सफलतापूर्वक परिक्षण करने के बाद IBM ने इससे जुड़े commercial products बनाने शुरू कर दिए।
  • 1986 के आसपास Relational Software Inc. द्वारा RDBMS (Relational Database Management System) को लांच किया गया बाद में इस company का नाम बदल कर Oracle रखा गया।

SQL के कुछ महत्वपूर्ण कमांड्स - SQL Commands in Hindi

काम के अनुसार इन commands को तीन अलग-अलग category में बाँट सकते हैं:

DDL (Data Definition Language):
  • CREATE : Database में नए object create करने के लिए इसका उपयोग होता है। 
  • ALTER: Database objects जैसे की table अदि को modify करने के लिए।
  • DROP: किसी Object को डिलीट करने के लिए।
DML (Data Manipulation Language):

  • SELECT: एक या एक से अधिक table से data retrieve करने के लिए। 
  • INSERT: नया record enter करने के लिए।
  • UPDATE: Record को modify करने के लिए।
  • DELETE: रिकॉर्ड डिलीट करने के लिए।
DCL (Data Control Language):
  • GRANT: Users को permission देने के लिए।
  • REVOKE: Permission हटाने के लिए।

Monday, 9 September 2019

CMS क्या है? Content Management System in Hindi

CMS kya hai
CMS क्या है? आज इन्टरनेट पर मौजूद लगभग हर एक डायनामिक वेबसाइट के पीछे कोई न कोई CMS जरुर होता है। यदि आप भी वेबसाइट या ब्लॉग बनाने जा रहे हैं तो आपको भी सीएमएस के बारे में जानकारी जरुर होनी चाहिए।

यदि CMS न हो तो वेबसाइट बनाने में काफी समय लगता है, आपको हर एक छोटे से छोटे काम खुद से कोडिंग करके करना पड़ता है।

Content management system ने website development को बहुत ही आसान बना दिया है इसके जरिये आप कुछ ही मिनटों में एक वेबसाइट तैयार कर सकते हैं।

आज हम इसी वेब कंटेंट मैनेजमेंट के बारे में नीचे दिए गये कुछ जरुरी बिन्दुओं पर बात करेंगे:
आईये इन सभी को विस्तार से समझते हैं।

CMS क्या है? (What is Content Management System in Hindi?)

CMS का full form Content Management System है, यह एक प्रकार का software है जिससे वेबसाइट के content को बिना किसी विशेष technical knowledge के create, update या manage किया जा सकता है।

आप यह जानते हैं की एक वेबसाइट को बनाने में कई सारी coding करनी पड़ती है, कई सारे HTML files create करने पड़ते हैं, डेटाबेस manage करने पड़ते हैं, ये सारे काम यदि manually किया जाय तो इसके लिए आपके पास वेब डेवलपमेंट की अच्छी जानकारी होनी जरुरी है।

लेकिन यदि सीएमएस का उपयोग करें तो आपको ये सारे काम नही करने पड़ेंगे।

आसान शब्दों में कहें तो CMS एक प्रकार का बना बनाया system होता है जहाँ आपको किसी प्रकार की कोडिंग नही करनी पड़ती बस आपको एक आसान से इंटरफ़ेस में अपने कंटेंट लिख कर पोस्ट करने होते हैं।

सीएमएस कैसे काम करता है? (How CMS works in Hindi?)

CMS अपने यूजर को Microsoft Word की तरह एक simple सा GUI (Graphical User Interface) provide करता है जिसके जरिये हम बड़ी आसानी से अपने वेबसाइट पर कंटेंट अपलोड कर पाते हैं।

CMS को experienced programmers द्वारा बनाया गया होता है। इसमें हर एक काम के लिए कई सारे functions के collection बने होते हैं जो की automatically या यूजर के instruction द्वारा काम करते हैं।

उदहारण के लिए यदि आप अपने वेबसाइट पर कोई image upload करना चाहते हैं यह काम आप बिना CMS के कैसे करेंगे? आपको सर्वर पर जाकर डेटाबेस में एक उचित स्थान (फोल्डर) पर अपने इमेज को FTP के जरिये अपलोड करना होगा।

लेकिन यही काम आप सीएमएस के द्वारा चंद सेकंड्स में सिर्फ एक क्लिक करके कर सकते हैं। दरअसल यह इस तरह होता है: जब हम  image को select करके अपलोड बटन पर क्लिक करेंगे तो backend में इससे सम्बंधित function execute हो जायेगा और हमारा इमेज automatically डेटाबेस में सेव हो जायेगा।

ठीक इसी तरह हर एक काम के लिए फंक्शन बने होते हैं, कुछ फंक्शन ऐसे भी होते हैं जो अपनेआप एक्सीक्यूट होते हैं जैसे आपने कोई पोस्ट लिख कर उसे schedule कर दिया है तो यह अपनेआप बताये गये समय पर आपके पोस्ट को publish कर देगा।

कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम के दो भाग होते हैं:
  1. Content Management Application (CMA): आपके कंटेंट को create करने और manage करने की जिम्मेदारी इस CMA की होती है। यह आपके द्वारा input किये गये data या content को डेटाबेस पर store करने का काम करता है।
  2. Content Delivery Application (CDA): इसका काम डेटाबेस से डाटा निकाल कर website के visitors को दिखाना होता है।
ये दोनो पार्ट मिलकर के आपके काम को आसान बना देते हैं।

CMS से कौन-कौन से प्रकार के वेबसाइट बनाये जाते हैं?

सीएमएस के माध्यम से आप लगभग हर प्रकार की वेबसाइट बना सकते हैं। नीचे हमने वेबसाइट के कुछ types बताने की कोशिश की है जिन्हें आप CMS के द्वारा बना सकते हैं:
  • ब्लॉग 
  • सोशल मीडिया वेबसाइट: जैसे फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब आदि।
  • न्यूज़ वेबसाइट 
  • ई-कॉमर्स
  • बिज़नस वेबसाइट 
  • जॉब-पोर्टल
  • पोर्टफोलियो वेबसाइट 
  • बिज़नस डायरेक्टरी
  • ऑनलाइन फोरम
  • रिव्यु वेबसाइट
  • क्लासिफाइड साईट
  • स्टैटिक वेबसाइट 
  • कूपन साईट
  • ऑक्शन वेबसाइट
  • ऑनलाइन एग्जामिनेशन सिस्टम 
  • स्कूल / कॉलेज मैनेजमेंट वेबसाइट
इन सबके अलावा और भी कई प्रकार की वेबसाइट बनायीं जा सकतीं हैं। यदि आपको इन सबके अलावा किसी और प्रकार के वेबसाइट के बारे में पता हो तो हमें कमेंट करके हमें जरुर बताएं।

CMS सॉफ्टवेयर के उदाहरण - (Example of CMS in Hindi?)

वैसे तो सीएमएस के कई सारे प्लेटफार्म हैं लेकिन उनमे से सबसे 3 सबसे best CMS कुछ इस प्रकार हैं:

वर्डप्रेस: यह दुनिया का सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला सीएमएस है। यह उपयोग करने में बहुत ही आसान है। इस प्लेटफार्म का उपयोग करके अब तक करोड़ों websites बनाये जा चुके हैं।

यह PHP में बना हुआ है और इन्टरनेट में उपलब्ध अधिकतर ब्लॉग इसी प्लेटफार्म के द्वारा बनाये गये हैं। यह bloggers की पहली पसंद है।

यहाँ हजारों की संख्या में plugins हैं जिन्हें install करके आप अपने वेबसाइट के features को बढ़ा सकते हैं। रही बात वेबसाइट डिजाइनिंग की तो यहाँ जिन्हें HTML, CSS नही आती वो भी WYSIWYG editor के दवारा बड़ी आसानी से यह काम कर सकते हैं। 

जूमला: यह एक open source CMS platform है। यह वर्डप्रेस की तुलना में थोडा अधिक advanced है। वर्डप्रेस की तरह इसे भी इनस्टॉल करना बहुत आसान है और इस पर काम करना भी आसान है।

यहाँ भी आपको कई प्रकार के plugins और extensions मिल जायेंगे। यदि वेबसाइट की लुक बदलना चाहते हैं तो कई प्रकार के themes भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा आप कुछ paid resources का भी उपयोग कर पाते हैं।

जूमला आपको multilingual support भी provide करता है इसके लिए किसी अतिरिक्त plugin को इनस्टॉल करने की आवश्यकता नही पड़ती।

ड्रुपल: यह भी एक ओपन सोर्स सीएमएस है। इसके user management system, permission settings और security features की वजह से यह बिज़नस वेबसाइट, सरकारी संस्थाओ की साईट, पोर्टल्स आदि के लिए पसंदीदा प्लेटफार्म है।

यदि उपयोग करने में थोडा सा कठिन होता है लेकिन यदि आपको वेब डेवलपमेंट का ज्ञान है तो यह आपके लिए सबसे बेस्ट CMS साबित हो सकता है।

इन तीनो के अलावा Magento (e-commerce), Squarespace, Wix जैसे और भी कई सारे CMS platforms हैं जिनका उपयोग जरुरत के अनुसार किया जाता है। 

सीएमएस से वेबसाइट कैसे बनाये? (How to create website using CMS in Hindi)

किसी भी सीएमएस से वेबसाइट बनाने के लिए कुछ common steps follow किये जाते हैं जो की कुछ इस प्रकार हैं:
  • डोमेन नेम और होस्टिंग खरीदें।
  • होस्टिंग सर्वर में अपने पसंद के content management system को install करें।
  • CMS को आवश्यकतानुसार configure करें।
  • वेबसाइट के लिए theme, extensions और जरुरी plugins को install करें।
  • अब अपना कंटेंट लिखना और अपलोड करना शुरू करें।
ये कुछ आसान से स्टेप्स हैं जिनसे आप बड़ी आसानी से वेबसाइट या ब्लॉग बना सकते हैं।


अगर आपको यह जानकारी पसंद आई तो अपने दोस्तों से साथ जरुर शेयर करें। यदि इस विषय में हमसे कुछ बात करना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार लिखकर हम तक जरुर पहुचाएं।

Thursday, 22 August 2019

DNS क्या है? इसका क्या काम है? What is Domain Name System in Hindi

What is DNS in Hindi?
क्या आप जानते हैं, DNS क्या है? और इसका क्या काम है? अगर नही जानते तो यह आर्टिकल आपको जरुर पढना चाहिए।

आज हम और आप बड़ी आसानी से इन्टरनेट पर अपने मनपसंद वेबसाइट को अपने मोबाइल या कंप्यूटर से access कर पाते हैं तो इसमें डीएनएस का एक बहुत बड़ा योगदान है।

हम हर रोज डीएनएस का उपयोग कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम में से कई लोगों को इसके बारे में जानकारी नही होती।

जैसा की आपको पता है की हमारा कंप्यूटर हम इंसानों की भाषा नही समझता, यह केवल नंबरों को पहचान सकता है। इन्टरनेट पर भी यदि हमें किसी वेबसाइट या वेब पेज को देखना हो तो इसके लिए भी numbers की जरुरत पड़ती है जिसे IP address कहा जाता है। शुक्र मनाईये की हमारे पास डोमेन नेम सिस्टम है जिसकी वजह से हमे इन नंबरों को याद रखना नही पड़ता।

आज हम इसी DNS के बारे में आपको विस्तार से बताने वाले हैं की आखिर यह DNS क्या होता है और यह कैसे काम करता है।

DNS क्या है? (What is DNS in Hindi?)

DNS का full form Domain Name System है। यदि इसे एक लाइन में परिभाषित (define) किया जाये तो यह कुछ इस प्रकार होगा:

"यह एक ऐसा सिस्टम है जो की डोमेन नेम को IP address यानि नंबर के फॉर्म में translate करता है ताकि वेब ब्राउज़र यह समझ सके की आप इन्टरनेट पर कौनसा वेब पेज access करना चाहते हैं।"

हर डोमेन नेम (जैसे webinhindi.com) और internet से connected device एक unique IP address (जैसे: 198.15.42.15) होता है जिससे पता चलता है की वेबसाइट का content कौन से सर्वर पर स्टोर है।

इस सिस्टम के अंदर में एक domain name server स्थापित होता है इसे आप एक फ़ोन बुक या टेलीफ़ोन डायरेक्टरी या अपने मोबाइल के कांटेक्ट लिस्ट से तुलना कर सकते है जहाँ एक तरफ नाम और उसके मोबाइल नंबर लिखे होते हैं, ठीक इसी तरह डोमेन नाम सर्वर में भी domain name और उसके ip address की जानकारी stored रहती है।

अब यहाँ पर एक सवाल यह आता है की दुनिया में ढेर सारे websites हैं, तो क्या इन सभी की जानकारी किसी एक DNS सिस्टम में स्टोर होगी? नही, दरअसल ऐसा करना मुश्किल काम है और यह सुरक्षा की दृष्टि से सही भी नही है।

जिस प्रकार से इन्टरनेट अपने-आप में पूरे विश्वभर में फैला हुआ है ठीक उसी तरह domain name servers भी कई सारे हैं जहाँ DNS information stored रहते हैं।

ये सारे सर्वर्स आपस में एक दुसरे से connected होते हैं। यदि एक DNS में जानकारी नही मिलती तो यह automatically दूसरे dns से सम्पर्क स्थापित कर लेता है।

हमें इस बात की जानकारी भी होना चाहिए की यह जरुरी नही है की एक डोमेन के केवल एक ही IP हो कई domain name एक से अधिक कभी कभी सैकड़ों IP addresses से जुड़े हुए भी हो सकते हैं।

DNS का इतिहास (History of DNS in Hindi)

आज से लगभग 40 साल पहले जब इन्टरनेट का आकार छोटा था तब बहुत कम वेबसाइट और devices हुआ करते थे जिनका आईपी एड्रेस लोगो के लिए याद रखना आसान था।

लेकिन जब नेटवर्क का आकार बढ़ता गया और वेबसाइट की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई तो इन सभी के IP address को याद रखना बहुत ही मुश्किल काम हो गया था।

इस समस्या से निपटने के लिए सन 1980 के दशक में Paul Mockapetris नाम के कंप्यूटर वैज्ञानिक ने डोमेन नेम सिस्टम का आविष्कार किया ताकि  वेबसाइट को human readable name (इंग्लिश के कुछ नाम) दे सकें जिसे याद करना हम इंसानों के लिए आसान हो।

हालाँकि आप आज भी IP के जरिये किसी वेबसाइट तक पहुँच सकते हैं लेकिन शायद ही आपको किसी वेबसाइट के IP के बारे में पता होगा, खैर... आमतौर पर हमें इसकी जरूरत भी नही है।

लेकिन फिर भी आपको यह जरुर जानना चाहिए की यह DNS काम कैसे करता है, ताकि आप इसे अच्छी तरह से समझ सकें।

तो देर किस बात की आईये जानते हैं डीएनएस कैसे काम करता है...

DNS कैसे काम करता है? (How DNS works in Hindi?)

जब हम ब्राउज़र के एड्रेस बार में किसी वेबसाइट की एड्रेस यानि डोमेन नाम जैसे google.com इंटर करते हैं तो सबसे पहला काम उस डोमेन का IP address ढूँढना होता है इसके लिए यह पहले browser के cache memory को चेक किया जाता है यदि आप इससे पहले गूगल की वेबसाइट को visit कर चुके हैं तो इसका IP एड्रेस आपके ब्राउज़र के कैश में स्टोर हो सकता है।

यदि कैश में IP मिल जाये तो इससे वेबसाइट ओपन हो जाता है।

यदि ब्राउज़र कैश में आईपी की जानकारी stored नही है तो यह आपके सिस्टम के operating system जैसे Windows, Android या Mac को request transfer करेगा।

आपका operating system इस request को resolver यानि आपके Internet Service Provider (ISP) को भेज देता है जिसके पास भी cache होता है जिसमे IP address का record हो सकता है।

यदि यहाँ IP मिल जाता है तो यह प्रोसेस यही खत्म हो जाता है और client को IP की जानकारी दे दी जाती है और वेबसाइट एक्सेस हो जाता है।

यदि यहाँ भी आईपी न मिले तो resolver से रिक्वेस्ट ट्रान्सफर हो कर root server को चला जाता है।

Root server आगे top level domain server को रिक्वेस्ट करता है जिसे top-level domain जैसे .com, .org, .edu, .gov, .in के सर्वर की जानकारी होती है। यहाँ वेबसाइट के डोमेन के अनुसार उपयुक्त टॉप लेवल डोमेन सर्वर से संपर्क किया जाता है। जैसे हमारी वेबसाइट webinhindi के लिए .com server को request भेजा जायेगा।

टॉप लेवल डोमेन सर्वर से जानकारी मिलने के बाद अब आखिर में authoritative name server से actual name server की जानकारी ली जाती है और यहाँ से डोमेन की IP पता चल जाती है।

जब IP address ढूंढ लिया जाता है तब इसे client यानि आपके computer को भेज दिया जाता है ताकि इसके जरिये वेबसाइट को एक्सेस किया जा सके और IP को कैश में स्टोर भी कर लिया जाता है ताकि अगली बार ये सारा प्रोसेस फिर से न करना पड़े।

यहाँ पर आपने देखा की एक IP address को find करने के लिए इतना लम्बा process follow किया जाता है, लेकिन कमाल की बात यह है की ये सारे steps कुछ milliseconds में ही complete हो जाते हैं।


तो अब आपको पता चल गया है की आखिर DNS क्या है और यह कैसे काम करता है, हमें उम्मीद है आपको डोमेन नाम सिस्टम के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। अपने विचार और सुझाव नीचे कमेंट के मध्यम से हम तक जरुर पहुंचाएं। 

Sunday, 30 June 2019

वेब पब्लिशिंग क्या है? होस्टिंग और पब्लिशिंग में क्या अंतर है? Web Publishing in Hindi

web publishing in hindi

वेब डेवलपमेंट के क्षेत्र में कई प्रकार के terms और शब्दों का उपयोग किया जाता है। इनमे से एक शब्द है web publishing, जिसके बारे में कई लोगों को नही पता होता की वेब पब्लिशिंग क्या होता है? या web publisher किसे कहते हैं? 

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