Monday, 9 September 2019

CMS क्या है? Content Management System in Hindi

CMS kya hai
CMS क्या है? आज इन्टरनेट पर मौजूद लगभग हर एक डायनामिक वेबसाइट के पीछे कोई न कोई CMS जरुर होता है। यदि आप भी वेबसाइट या ब्लॉग बनाने जा रहे हैं तो आपको भी सीएमएस के बारे में जानकारी जरुर होनी चाहिए।

यदि CMS न हो तो वेबसाइट बनाने में काफी समय लगता है, आपको हर एक छोटे से छोटे काम खुद से कोडिंग करके करना पड़ता है।

Content management system ने website development को बहुत ही आसान बना दिया है इसके जरिये आप कुछ ही मिनटों में एक वेबसाइट तैयार कर सकते हैं।

आज हम इसी वेब कंटेंट मैनेजमेंट के बारे में नीचे दिए गये कुछ जरुरी बिन्दुओं पर बात करेंगे:
आईये इन सभी को विस्तार से समझते हैं।

CMS क्या है? (What is Content Management System in Hindi?)

CMS का full form Content Management System है, यह एक प्रकार का software है जिससे वेबसाइट के content को बिना किसी विशेष technical knowledge के create, update या manage किया जा सकता है।

आप यह जानते हैं की एक वेबसाइट को बनाने में कई सारी coding करनी पड़ती है, कई सारे HTML files create करने पड़ते हैं, डेटाबेस manage करने पड़ते हैं, ये सारे काम यदि manually किया जाय तो इसके लिए आपके पास वेब डेवलपमेंट की अच्छी जानकारी होनी जरुरी है।

लेकिन यदि सीएमएस का उपयोग करें तो आपको ये सारे काम नही करने पड़ेंगे।

आसान शब्दों में कहें तो CMS एक प्रकार का बना बनाया system होता है जहाँ आपको किसी प्रकार की कोडिंग नही करनी पड़ती बस आपको एक आसान से इंटरफ़ेस में अपने कंटेंट लिख कर पोस्ट करने होते हैं।

सीएमएस कैसे काम करता है? (How CMS works in Hindi?)

CMS अपने यूजर को Microsoft Word की तरह एक simple सा GUI (Graphical User Interface) provide करता है जिसके जरिये हम बड़ी आसानी से अपने वेबसाइट पर कंटेंट अपलोड कर पाते हैं।

CMS को experienced programmers द्वारा बनाया गया होता है। इसमें हर एक काम के लिए कई सारे functions के collection बने होते हैं जो की automatically या यूजर के instruction द्वारा काम करते हैं।

उदहारण के लिए यदि आप अपने वेबसाइट पर कोई image upload करना चाहते हैं यह काम आप बिना CMS के कैसे करेंगे? आपको सर्वर पर जाकर डेटाबेस में एक उचित स्थान (फोल्डर) पर अपने इमेज को FTP के जरिये अपलोड करना होगा।

लेकिन यही काम आप सीएमएस के द्वारा चंद सेकंड्स में सिर्फ एक क्लिक करके कर सकते हैं। दरअसल यह इस तरह होता है: जब हम  image को select करके अपलोड बटन पर क्लिक करेंगे तो backend में इससे सम्बंधित function execute हो जायेगा और हमारा इमेज automatically डेटाबेस में सेव हो जायेगा।

ठीक इसी तरह हर एक काम के लिए फंक्शन बने होते हैं, कुछ फंक्शन ऐसे भी होते हैं जो अपनेआप एक्सीक्यूट होते हैं जैसे आपने कोई पोस्ट लिख कर उसे schedule कर दिया है तो यह अपनेआप बताये गये समय पर आपके पोस्ट को publish कर देगा।

कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम के दो भाग होते हैं:
  1. Content Management Application (CMA): आपके कंटेंट को create करने और manage करने की जिम्मेदारी इस CMA की होती है। यह आपके द्वारा input किये गये data या content को डेटाबेस पर store करने का काम करता है।
  2. Content Delivery Application (CDA): इसका काम डेटाबेस से डाटा निकाल कर website के visitors को दिखाना होता है।
ये दोनो पार्ट मिलकर के आपके काम को आसान बना देते हैं।

CMS से कौन-कौन से प्रकार के वेबसाइट बनाये जाते हैं?

सीएमएस के माध्यम से आप लगभग हर प्रकार की वेबसाइट बना सकते हैं। नीचे हमने वेबसाइट के कुछ types बताने की कोशिश की है जिन्हें आप CMS के द्वारा बना सकते हैं:
  • ब्लॉग 
  • सोशल मीडिया वेबसाइट: जैसे फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब आदि।
  • न्यूज़ वेबसाइट 
  • ई-कॉमर्स
  • बिज़नस वेबसाइट 
  • जॉब-पोर्टल
  • पोर्टफोलियो वेबसाइट 
  • बिज़नस डायरेक्टरी
  • ऑनलाइन फोरम
  • रिव्यु वेबसाइट
  • क्लासिफाइड साईट
  • स्टैटिक वेबसाइट 
  • कूपन साईट
  • ऑक्शन वेबसाइट
  • ऑनलाइन एग्जामिनेशन सिस्टम 
  • स्कूल / कॉलेज मैनेजमेंट वेबसाइट
इन सबके अलावा और भी कई प्रकार की वेबसाइट बनायीं जा सकतीं हैं। यदि आपको इन सबके अलावा किसी और प्रकार के वेबसाइट के बारे में पता हो तो हमें कमेंट करके हमें जरुर बताएं।

CMS सॉफ्टवेयर के उदाहरण - (Example of CMS in Hindi?)

वैसे तो सीएमएस के कई सारे प्लेटफार्म हैं लेकिन उनमे से सबसे 3 सबसे best CMS कुछ इस प्रकार हैं:

वर्डप्रेस: यह दुनिया का सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला सीएमएस है। यह उपयोग करने में बहुत ही आसान है। इस प्लेटफार्म का उपयोग करके अब तक करोड़ों websites बनाये जा चुके हैं।

यह PHP में बना हुआ है और इन्टरनेट में उपलब्ध अधिकतर ब्लॉग इसी प्लेटफार्म के द्वारा बनाये गये हैं। यह bloggers की पहली पसंद है।

यहाँ हजारों की संख्या में plugins हैं जिन्हें install करके आप अपने वेबसाइट के features को बढ़ा सकते हैं। रही बात वेबसाइट डिजाइनिंग की तो यहाँ जिन्हें HTML, CSS नही आती वो भी WYSIWYG editor के दवारा बड़ी आसानी से यह काम कर सकते हैं। 

जूमला: यह एक open source CMS platform है। यह वर्डप्रेस की तुलना में थोडा अधिक advanced है। वर्डप्रेस की तरह इसे भी इनस्टॉल करना बहुत आसान है और इस पर काम करना भी आसान है।

यहाँ भी आपको कई प्रकार के plugins और extensions मिल जायेंगे। यदि वेबसाइट की लुक बदलना चाहते हैं तो कई प्रकार के themes भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा आप कुछ paid resources का भी उपयोग कर पाते हैं।

जूमला आपको multilingual support भी provide करता है इसके लिए किसी अतिरिक्त plugin को इनस्टॉल करने की आवश्यकता नही पड़ती।

ड्रुपल: यह भी एक ओपन सोर्स सीएमएस है। इसके user management system, permission settings और security features की वजह से यह बिज़नस वेबसाइट, सरकारी संस्थाओ की साईट, पोर्टल्स आदि के लिए पसंदीदा प्लेटफार्म है।

यदि उपयोग करने में थोडा सा कठिन होता है लेकिन यदि आपको वेब डेवलपमेंट का ज्ञान है तो यह आपके लिए सबसे बेस्ट CMS साबित हो सकता है।

इन तीनो के अलावा Magento (e-commerce), Squarespace, Wix जैसे और भी कई सारे CMS platforms हैं जिनका उपयोग जरुरत के अनुसार किया जाता है। 

सीएमएस से वेबसाइट कैसे बनाये? (How to create website using CMS in Hindi)

किसी भी सीएमएस से वेबसाइट बनाने के लिए कुछ common steps follow किये जाते हैं जो की कुछ इस प्रकार हैं:
  • डोमेन नेम और होस्टिंग खरीदें।
  • होस्टिंग सर्वर में अपने पसंद के content management system को install करें।
  • CMS को आवश्यकतानुसार configure करें।
  • वेबसाइट के लिए theme, extensions और जरुरी plugins को install करें।
  • अब अपना कंटेंट लिखना और अपलोड करना शुरू करें।
ये कुछ आसान से स्टेप्स हैं जिनसे आप बड़ी आसानी से वेबसाइट या ब्लॉग बना सकते हैं।


अगर आपको यह जानकारी पसंद आई तो अपने दोस्तों से साथ जरुर शेयर करें। यदि इस विषय में हमसे कुछ बात करना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार लिखकर हम तक जरुर पहुचाएं।

Thursday, 22 August 2019

DNS क्या है? इसका क्या काम है? What is Domain Name System in Hindi

What is DNS in Hindi?
क्या आप जानते हैं, DNS क्या है? और इसका क्या काम है? अगर नही जानते तो यह आर्टिकल आपको जरुर पढना चाहिए।

आज हम और आप बड़ी आसानी से इन्टरनेट पर अपने मनपसंद वेबसाइट को अपने मोबाइल या कंप्यूटर से access कर पाते हैं तो इसमें डीएनएस का एक बहुत बड़ा योगदान है।

हम हर रोज डीएनएस का उपयोग कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम में से कई लोगों को इसके बारे में जानकारी नही होती।

जैसा की आपको पता है की हमारा कंप्यूटर हम इंसानों की भाषा नही समझता, यह केवल नंबरों को पहचान सकता है। इन्टरनेट पर भी यदि हमें किसी वेबसाइट या वेब पेज को देखना हो तो इसके लिए भी numbers की जरुरत पड़ती है जिसे IP address कहा जाता है। शुक्र मनाईये की हमारे पास डोमेन नेम सिस्टम है जिसकी वजह से हमे इन नंबरों को याद रखना नही पड़ता।

आज हम इसी DNS के बारे में आपको विस्तार से बताने वाले हैं की आखिर यह DNS क्या होता है और यह कैसे काम करता है।

DNS क्या है? (What is DNS in Hindi?)

DNS का full form Domain Name System है। यदि इसे एक लाइन में परिभाषित (define) किया जाये तो यह कुछ इस प्रकार होगा:

"यह एक ऐसा सिस्टम है जो की डोमेन नेम को IP address यानि नंबर के फॉर्म में translate करता है ताकि वेब ब्राउज़र यह समझ सके की आप इन्टरनेट पर कौनसा वेब पेज access करना चाहते हैं।"

हर डोमेन नेम (जैसे webinhindi.com) और internet से connected device एक unique IP address (जैसे: 198.15.42.15) होता है जिससे पता चलता है की वेबसाइट का content कौन से सर्वर पर स्टोर है।

इस सिस्टम के अंदर में एक domain name server स्थापित होता है इसे आप एक फ़ोन बुक या टेलीफ़ोन डायरेक्टरी या अपने मोबाइल के कांटेक्ट लिस्ट से तुलना कर सकते है जहाँ एक तरफ नाम और उसके मोबाइल नंबर लिखे होते हैं, ठीक इसी तरह डोमेन नाम सर्वर में भी domain name और उसके ip address की जानकारी stored रहती है।

अब यहाँ पर एक सवाल यह आता है की दुनिया में ढेर सारे websites हैं, तो क्या इन सभी की जानकारी किसी एक DNS सिस्टम में स्टोर होगी? नही, दरअसल ऐसा करना मुश्किल काम है और यह सुरक्षा की दृष्टि से सही भी नही है।

जिस प्रकार से इन्टरनेट अपने-आप में पूरे विश्वभर में फैला हुआ है ठीक उसी तरह domain name servers भी कई सारे हैं जहाँ DNS information stored रहते हैं।

ये सारे सर्वर्स आपस में एक दुसरे से connected होते हैं। यदि एक DNS में जानकारी नही मिलती तो यह automatically दूसरे dns से सम्पर्क स्थापित कर लेता है।

हमें इस बात की जानकारी भी होना चाहिए की यह जरुरी नही है की एक डोमेन के केवल एक ही IP हो कई domain name एक से अधिक कभी कभी सैकड़ों IP addresses से जुड़े हुए भी हो सकते हैं।

DNS का इतिहास (History of DNS in Hindi)

आज से लगभग 40 साल पहले जब इन्टरनेट का आकार छोटा था तब बहुत कम वेबसाइट और devices हुआ करते थे जिनका आईपी एड्रेस लोगो के लिए याद रखना आसान था।

लेकिन जब नेटवर्क का आकार बढ़ता गया और वेबसाइट की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई तो इन सभी के IP address को याद रखना बहुत ही मुश्किल काम हो गया था।

इस समस्या से निपटने के लिए सन 1980 के दशक में Paul Mockapetris नाम के कंप्यूटर वैज्ञानिक ने डोमेन नेम सिस्टम का आविष्कार किया ताकि  वेबसाइट को human readable name (इंग्लिश के कुछ नाम) दे सकें जिसे याद करना हम इंसानों के लिए आसान हो।

हालाँकि आप आज भी IP के जरिये किसी वेबसाइट तक पहुँच सकते हैं लेकिन शायद ही आपको किसी वेबसाइट के IP के बारे में पता होगा, खैर... आमतौर पर हमें इसकी जरूरत भी नही है।

लेकिन फिर भी आपको यह जरुर जानना चाहिए की यह DNS काम कैसे करता है, ताकि आप इसे अच्छी तरह से समझ सकें।

तो देर किस बात की आईये जानते हैं डीएनएस कैसे काम करता है...

DNS कैसे काम करता है? (How DNS works in Hindi?)

जब हम ब्राउज़र के एड्रेस बार में किसी वेबसाइट की एड्रेस यानि डोमेन नाम जैसे google.com इंटर करते हैं तो सबसे पहला काम उस डोमेन का IP address ढूँढना होता है इसके लिए यह पहले browser के cache memory को चेक किया जाता है यदि आप इससे पहले गूगल की वेबसाइट को visit कर चुके हैं तो इसका IP एड्रेस आपके ब्राउज़र के कैश में स्टोर हो सकता है।

यदि कैश में IP मिल जाये तो इससे वेबसाइट ओपन हो जाता है।

यदि ब्राउज़र कैश में आईपी की जानकारी stored नही है तो यह आपके सिस्टम के operating system जैसे Windows, Android या Mac को request transfer करेगा।

आपका operating system इस request को resolver यानि आपके Internet Service Provider (ISP) को भेज देता है जिसके पास भी cache होता है जिसमे IP address का record हो सकता है।

यदि यहाँ IP मिल जाता है तो यह प्रोसेस यही खत्म हो जाता है और client को IP की जानकारी दे दी जाती है और वेबसाइट एक्सेस हो जाता है।

यदि यहाँ भी आईपी न मिले तो resolver से रिक्वेस्ट ट्रान्सफर हो कर root server को चला जाता है।

Root server आगे top level domain server को रिक्वेस्ट करता है जिसे top-level domain जैसे .com, .org, .edu, .gov, .in के सर्वर की जानकारी होती है। यहाँ वेबसाइट के डोमेन के अनुसार उपयुक्त टॉप लेवल डोमेन सर्वर से संपर्क किया जाता है। जैसे हमारी वेबसाइट webinhindi के लिए .com server को request भेजा जायेगा।

टॉप लेवल डोमेन सर्वर से जानकारी मिलने के बाद अब आखिर में authoritative name server से actual name server की जानकारी ली जाती है और यहाँ से डोमेन की IP पता चल जाती है।

जब IP address ढूंढ लिया जाता है तब इसे client यानि आपके computer को भेज दिया जाता है ताकि इसके जरिये वेबसाइट को एक्सेस किया जा सके और IP को कैश में स्टोर भी कर लिया जाता है ताकि अगली बार ये सारा प्रोसेस फिर से न करना पड़े।

यहाँ पर आपने देखा की एक IP address को find करने के लिए इतना लम्बा process follow किया जाता है, लेकिन कमाल की बात यह है की ये सारे steps कुछ milliseconds में ही complete हो जाते हैं।


तो अब आपको पता चल गया है की आखिर DNS क्या है और यह कैसे काम करता है, हमें उम्मीद है आपको डोमेन नाम सिस्टम के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। अपने विचार और सुझाव नीचे कमेंट के मध्यम से हम तक जरुर पहुंचाएं। 

Sunday, 30 June 2019

वेब पब्लिशिंग क्या है? होस्टिंग और पब्लिशिंग में क्या अंतर है? Web Publishing in Hindi

web publishing in hindi

वेब डेवलपमेंट के क्षेत्र में कई प्रकार के terms और शब्दों का उपयोग किया जाता है। इनमे से एक शब्द है web publishing, जिसके बारे में कई लोगों को नही पता होता की वेब पब्लिशिंग क्या होता है? या web publisher किसे कहते हैं? 

Tuesday, 4 June 2019

वेब होस्टिंग क्या है? यह कैसे काम करता है? (What is Web Hosting in Hindi)

Web Hosting kya hai in Hindi

किसी भी वेबसाइट को इन्टरनेट पर दिखाने के लिए वेब होस्टिंग की जरुरत पड़ती है। यदि आप वेबसाइट बनाने जा रहे हैं या आपको यह जानना है की वेबसाइट कैसे बनता है तो आपको वेब होस्टिंग के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे की वेब होस्टिंग क्या होता है?, ये कितने प्रकार होते हैं?, यह कैसे काम करता है? इसके क्या-क्या features होते हैं?  होस्टिंग और डोमेन में क्या अंतर है? आदि

वेब होस्टिंग क्या है? (What is web hosting in Hindi?)

जब आप वेबसाइट या ब्लॉग बनाते हैं तो उसके सारे contents जैसे images, videos, pages आदि को सर्वर में स्टोर करना पड़ता है ताकि दूसरे लोग इन्टरनेट के जरिये उसे access कर पायें।

Web hosting एक प्रकार की service है जो की हमें अपनी website को internet पर upload करने की सुविधा प्रदान करती है।

वेबसाइट होस्टिंग के लिए हमें एक powerful server की जरुरत पड़ती है जो की हमेशा इंटरनेट से connected होना चाहिए ताकि हमारी वेबसाइट 24 घंटे बिना किसी समस्या के users के लिए उपलब्ध रहे।

चूंकि इस प्रकार के सर्वर को हम खुद maintain नही कर सकते क्योंकि की इसका mantanance cost बहुत अधिक होता है, इसलिए हम वेबसाइट होस्टिंग के लिए web hosting companies का सहारा लेते हैं। वेब होस्टिंग कंपनियों के पास खुद का powerful server, technology और technical staffs होते हैं।

हम इनसे मासिक या सालाना पैकेज के हिसाब से hosting service खरीद लेते हैं और इनके सर्वर में हमें space मिल जाता है जहाँ हम आसानी से अपनी वेबसाइट को host कर पाते हैं।


वेब होस्टिंग कितने प्रकार के होते हैं? Types of web hosting in Hindi

Web hosting भी कई प्रकार के होते हैं, जब हम वेबसाइट बनाते हैं तो अपनी जरुरत के अनुसार हम होस्टिंग खरीदते हैं। यह मुख्यतः 4 प्रकार के होते हैं:
  • Shared
  • Dedicated
  • VPS
  • Cloud
चलिए अब इन्हें थोडा विस्तार से समझते हैं:

Shared Hosting: 
Shared Hosting in Hindi

जैसा की नाम से पता चल रहा है, इस प्रकार की होस्टिंग में कई सारे वेबसाइट एक ही सर्वर का उपयोग कर रहे होते हैं।

चूंकि, आप एक साथ कई सारे websites मिलकर एक ही server के space, RAM, और CPU का use कर रहे हैं इसलिए यह दूसरे होस्टिंग के मुकाबले आपके लिए काफी सस्ता होगा।

जैसे यदि आप कहीं जाने के लिए खुद की कार का उपयोग करेंगे तो आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे, वहीँ यदि आप बस में यात्रा करते हैं तो आपके काफी पैसे बच जायेंगे।

यात्रा के समय बस में यदि भीड़ अधिक हो जाये तो आपको समस्या आ सकती है, ठीक इसी तरह शेयर्ड होस्टिंग में भी कभी-कभी कुछ समस्याएं आ सकती हैं।

जैसे यदि आपकी website में traffic बहुत ज्यादा आ जाये तो वेबसाइट की स्पीड कम हो जाएगी और हो सकता है आपके visitors को कुछ technical errors दिखाई देने लगे।

Shared hosting किसके लिए बेहतर है:
यदि आपका business छोटा है या आप अभी शुरुआत कर रहे हैं तो इस प्रकार का होस्टिंग आपके लिए बहुत ही बेहतर है। यदि आप ब्लॉग बना रहे हैं तो आपको शेयर्ड होस्टिंग से ही शुरुआत करनी चाहिए। Shared hosting में वेबसाइट होस्ट करना बहुत ही आसान होता है। इसमें कई सारे tools और plugins को आप बड़ी आसानी से install कर सकते हैं।

Dedicated Hosting:
Dedicated Hosting in Hindi

इसमें पूरे सर्वर पर आपका ही अधिकार होता है। इसके कई सारे फायदे हैं, लेकिन यह दूसरे hosting के मुकाबले बहुत ही महंगा होता है। चूंकि पूरे सर्वर पर सिर्फ आपकी ही website host हो रही है इसलिए यह पूरी तरह से आपके control में होता है। आपके इसके opertating system और अन्य settings में बदलाव कर सकते हैं।

डेडिकेटेड होस्टिंग का एक फायदा यह भी है की आप अधिक ट्रैफिक की वजह से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। इससे आपकी वेबसाइट की स्पीड और performance increase होती है।

Dedicated Hosting किसके लिए बेहतर है:
ऐसे website जिस पर बहुत अधिक traffic होता है उसे डेडिकेटेड होस्टिंग लेनी चाहिए। अगर आपका कोई ecommerce website है जिसका साइज़ बहुत बड़ा है तो आपके लिए यह बहुत ही बेहतर होस्टिंग होगी।

VPS (Virtual Private Server) Hosting: 
VPS Hosting in Hindi

VPS होस्टिंग को हम shared और dedicated hosting दोनों का मिश्रण समझ सकते हैं। इस model में आपके पास एक dedicated server होता है लेकिन यह सर्वर virtual server होता है न की physical, चलिए थोडा विस्तार से समझते हैं:

यहाँ पर एक सर्वर को अलग-अलग कई सारे virtual servers में बाँट दिया जाता है। एक वेबसाइट के लिए एक वर्चुअल सर्वर दिया जाता है और उस हिस्से पर सिर्फ उसी का अधिकार होता है।

यहाँ पर shared hosting के मुकाबले एक वेबसाइट को अधिक space, computing power और bandwidth मिलता है इसलिए VPS hosting में शेयर्ड होस्टिंग के मुकाबले page load time अधिक fast हो जाता है।

यह डेडिकेटेड होस्टिंग से बेहतर तो नही होता लेकिन शेयर्ड होस्टिंग से यह ज्यादा अच्छा है। यदि आपको लगता है की आपकी साईट पर बहुत अधिक volume में traffic आने वाली है तो आपको यह पता होना चाहिए की इसे VPS hosting में भी कुछ limitations होते हैं।

VPS होस्टिंग का कौन उपयोग करता है?
कम मात्रा में ट्रैफ़िक पाने वाली छोटी वेबसाइटें भी VPS होस्टिंग का लाभ उठा सकती हैं। यदि आपको लगता है की आपकी साइट की लोडिंग स्पीड कम हो रही है, तो आप एक shared hosting की तुलना में VPS होस्टिंग को चुनना बेहतर होगा।

Cloud Hosting: 
Cloud Hosting in Hindi

डेडिकेटेड सर्वर और VPS के साथ समस्या यह है की आपके पास resources कम होते हैं यहाँ पर storage और capacity की एक limit होती है। हालाँकि ज्यादातर websites इस limitation तक पहुँच नही पाते हैं, लेकिन कभी-कभी वेबसाइट के कुछ contents viral हो सकते हैं और इससे अचानक ट्रैफिक बढ़ जाती है जिसे handle करना मुश्किल होता है।


इन समस्याओं का solution आपको क्लाउड होस्टिंग में मिल सकता है। यहाँ पर कोई एक server नही बल्कि कई सारे सर्वर एक साथ मिलकर आपकी वेबसाइट को होस्ट करते हैं।

पिछले कुछ सालों में क्लाउड होस्टिंग बहुत ही ज्यादा popular हुआ है और इसका चलन बढ़ता ही जा रहा है।

क्लाउड होस्टिंग पर आपकी साइट पर high volumn traffic इसकी लोडिंग गति को प्रभावित नहीं करता है।

हालाँकि, आप dedicated hosting की तरह इसमें पूरे सर्वर को कण्ट्रोल नही कर सकते, यानी आप किसी भी सर्वर सेटिंग्स को नहीं बदल सकते हैं या कोई विशेष सॉफ़्टवेयर install नहीं कर सकते हैं।

लेकिन यदि आपके पास एक साधारण वेबसाइट है और आपको अधिक तकनीकी विकल्पों की आवश्यकता नहीं है, तो आपके लिए क्लाउड होस्टिंग एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

क्लाउड होस्टिंग का कौन उपयोग करता है?
Cloud hosting बहुत ही flexible hosting solution है। आप अपने जरुरत के अनुसार डिस्क स्पेस और मेमोरी को बढ़ा सकते हैं। यह organizartions के लिए perfect तो है ही इसके अलावा ऐसे website owners जो समय-समय पर traffic spikes की वजह से परेशान रहते हैं उनके लिए भी यह बहुत ही उपयोगी है।

वेब होस्टिंग कैसे काम करता है?

वेब होस्टिंग के लिए कई सारी कंपनियां होती हैं जो की website owners को अपने सर्वर पर वेबसाइट होस्ट करने की सुविधा देते हैं और बदले में हर महीने आपसे कुछ पैसे लेते हैं। वेबसाइट के सारे HTML pages, images, videos आदि को सर्वर में अपलोड करने के बाद उसे इन्टरनेट के माध्यम से कभी भी किसी भी समय वेब एड्रेस (डोमेन नाम) के जरिये कोई भी देख सकता है।

जब भी कोई internet user अपने वेब ब्राउज़र में वेब एड्रेस डालकर आपके वेबसाइट पर आएगा तो उसका कंप्यूटर उस सर्वर से कनेक्ट हो जायेगा जहाँ आपने वेबसाइट की होस्टिंग की है। अब server उन HTML pages और contents को visitor के ब्राउज़र पर display कर देगा।

वेब होस्टिंग और डोमेन में क्या अंतर है? Domain Vs Hosting in Hindi

डोमेन नाम और वेब होस्टिंग दो अलग-अलग चीजें हैं। लेकिन  कई सारी companies ऐसी होती हैं जो डोमेन और होस्टिंग दोनों बेचते हैं। उदाहरण के लिए - GoDaddy, यह दुनिया का सबसे बड़ा डोमेन रजिस्ट्रार है, लेकिन यह डोमेन के अलावा होस्टिंग की सुविधा भी प्रदान करता है।

और यह भी एक वजह है की नये लोग वेब होस्टिंग और डोमेन के बीच लोग अक्सर भ्रमित रहते हैं।

अगर हम आसान शब्दों में कहें तो:

"एक डोमेन नेम आपके घर के पते की तरह है; जबकि वेब होस्टिंग, आपके घर के कमरे हैं जहाँ आप अपना सामान रखते हैं।"

यहाँ पर पता domain name होता है जो की आपके वेबसाइट का address है और storage के लिए कंप्यूटर हार्ड डिस्क, मेमोरी आदि उपयोग होते हैं जिन्हें वेब होस्टिंग कहा जाता है।

यह भी पढ़ें: डोमेन नेम क्या है? What is Domain Name in Hindi?

होस्टिंग में क्या-क्या Features होते हैं?

होस्टिंग खरीदते समय आपको नीचे दिये गये कुछ basic features का ध्यान जरूर रखना चाहिए ये hosting type, hosting company और plan के अनुसार अलग-अलग भी हो सकते हैं।

Bandwidth: बैंडविड्थ आपकी वेबसाइट और visitors के बीच एक निश्चित समय में transfer होने वाले डाटा की मात्रा को बताता है। अधिक बैंडविड्थ से एक ही समय में अधिक से अधिक लोग आपकी वेबसाइट को बिना किसी रूकावट के access कर सकते हैं वहीँ low bandwidth से आपके website की speed कम हो सकती है।

Uptime: यह एक विश्वसनीय वेब होस्टिंग provider की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। कई कंपनियां guarenteed uptime देती हैं जिसका मतलब है कि आपकी वेबसाइट कम से कम 99.9 प्रतिशत समय  अपने visitors के लिए उपलब्ध रहेगी।

Storage:  हर hosting account में आपको अपने वेब पेज, ग्राफ़िक्स, अन्य मीडिया फाइल्स आदि को स्टोर करने के लिए पर्याप्त disk space होना चाहिए। आपको अपनी जरूरतों का ध्यान रखते हुए ही अपने लिए best hosting plan चुनना चाहिए।

Email: आप web hosting के साथ-साथ ईमेल होस्टिंग की सुविधा ले सकते हैं जिसमे आप अपने लिए या अपनी आर्गेनाइजेशन के लिए custom email address बना सकते हैं। email hosting में आपको ईमेल रिसीव करने, मेल भेजने से लेकर कई अन्य features जैसे virus & spam filters, address book, calander आदि भी होते हैं।

Backups: कभी-कभी आपके कंप्यूटर से कुछ फाइल्स डिलीट हो जाते हैं और आपका data loss हो जाता है। इस बात का ध्यान रखें की सर्वर भी एक प्रकार का कंप्यूटर ही है इसमें भी data loss होने का खतरा रहता है इसलिए इस बात का ध्यान रखें की आपका hosting providers आपको backup की सुविधा दे रहा है या नही।

Customer Support: यह भी बहुत ही महत्वपूर्ण है, आपको पता होना चाहिए कि आपका होस्टिंग प्रदाता आपकी तकनीकी सहायता के लिए उपलब्ध रहता है या नही, क्या आप उन्हें फोन कर सकते हैं? वे कौन से समय उपलब्ध रहते हैं? क्या आप उन्हें ईमेल भेजकर अपनी समस्या बता सकते हैं? उनका response time क्या है? क्या लाइव चैट की सुविधा है? क्या उनके पास forum, tutorial articles आदि हैं? इन सुविधाओं से आप भविष्य में आने वाली hosting से related किसी भी परेशानी को आसानी से सुलझा सकते हैं।

आगे पढ़ें:

उम्मीद है आपको वेब होस्टिंग के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी।

Friday, 17 May 2019

Web Application क्या है? वेबसाइट और वेब एप्लीकेशन में क्या अंतर है?

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वेब एप्लीकेशन क्या है? (what is web application in Hindi?), क्या आपके मन में भी ये सवाल आ रहा है? अगर हाँ, तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं। यहाँ पर हमने आपके इस सवाल का जवाब आसान शब्दों में देने की कोशिश की है।

लोगों को यह पता है की वेबसाइट क्या है लेकिन यदि कोई web app की बात करे तो कई लोगों को समझ में नही आता की आखिर यह है क्या।

जिन्हें इस बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी है तो वो भी इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं की वेबसाइट और वेब एप्लीकेशन में अंतर क्या है?

आज हम आपको web application के बारे में पूरी जानकारी देना चाहते हैं ताकि आपके मन उठ रहे सवालों के जवाब आपको मिल सके।

Web application क्या है? 

वेब एप्लीकेशन या web app एक प्रकार का software program होता है जो की किसी specific funtions को perform करने के लिए बनाया गया होता है।

यह वेब सर्वर पर stored होता है और client की तरफ से request भेजे जाने पर client के web browser पर execute होता है।

किसी computer software या कंप्यूटर एप्लीकेशन की तरह ही web app भी अपने यूजर को एक ऐसा environment provide करता है जहाँ user data enter कर पाता है,  और अलग-अलग प्रकार के tasks को भी perform कर पाता है।



Web application को बनाने के लिए स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज का उपयोग होता है जिसमे server-side scripting (जैसे: PHP, ASP आदि) और client-side scripting (जैसे: HTML, jQuery, JavaScript आदि) दोनों शामिल होते हैं।


वेबसाइट और वेब एप्लीकेशन में क्या अंतर है? (Difference Between Website and Web Application in Hindi)

Web application के बारे में जानने के बाद आपके मन में यह सवाल जरुर आ रहा होगा की आखिर website और web app में क्या difference है?

पहले तो हम आपको बता दें की यदि आप किसी वेब एप्लीकेशन को वेबसाइट कहते हैं तो आप गलत नही हैं। क्योंकि यदि आप इन्टरनेट के जरिये अपने web browser में कुछ भी देख रहे हैं तो उसे आप वेबसाइट कह सकते हैं।

लेकिन फिर भी इन दोनों के बीच कुछ न कुछ तो अंतर होगा ही...है न?

अगर हम इनके बीच के अंतर को सिर्फ दो लाइन में इसे समझाएं तो यह कुछ इस प्रकार हो सकता है:
  • वेबसाइट informational होता है।
  • वेब एप्लीकेशन interective होता है।
अब चलिए इसे थोडा विस्तार से समझते हैं:
  • वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य visitors को सिर्फ information provide करना होता है। जैसे अपनी कंपनी, प्रोडक्ट या सर्विस आदि के बारे में लोगों बताना।
  • वेब एप्लीकेशन का goal user से input लेना और interect करना होता है। जैसे visitors से newsletter subscribe कराना, ऑनलाइन image edit करने की सुविधा देना आदि।
  • एक ऐसी वेबसाइट जहाँ one-way communication होता है यानि यूजर उस वेबसाइट के content को देख सकता है, पढ़ सकता है लेकिन कुछ input नही कर सकता और न ही कोई task perform कर सकता है तो उसे वेबसाइट कह सकते हैं।
  • ऐसी वेबसाइट जिससे यूजर interect कर सकते हैं यानि कुछ input कर सकते हैं क्या कोई function perform कर सकते हैं, तो इसे web application कहा जा सकता है।
  • Website के contents static होते हैं।
  • वेब एप्प के contents dynamic होते हैं। इसके कुछ हिस्से static भी हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें: वेबसाइट और ब्लॉग में क्या अंतर है? आपको क्या बनाना चाहिए? Website Vs Blog in Hindi

Web Apps के कुछ उदाहरण - (Examples of Web applications)

  • Facebook: सोशल मीडिया साईट जिसका उपयोग आप हर रोज करते हैं यह भी एक वेब एप्प है।
  • Gmail: ईमेल भेजना और प्राप्त करना Gmail से बहुत ही आसान है। और यह वेब एप्लीकेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
  • Google Docs: इसके जरिये हम online documents create कर सकते हैं उसे download कर सकते हैं, प्रिंट कर सकते हैं या Google drive में save कर सकते हैं।
  • Pixlr: यह online image editing website है जिसपर आप अपनी फोटो अपलोड कर एडिट कर सकते हैं।
  • Netflix: Online video streaming के लिए इसका बहुत ज्यादा उपयोग होता है। इससे आप अपनी मनचाही video series कभी भी कहीं भी देख पाते हैं।
  • Codepen: ऑनलाइन code editor की बात करें हम तो यह बहुत ही बढ़िया जगह है जहाँ आप अपने कोड को लिखकर save कर सकते हैं, online exceute कर सकते हैं और दोस्तों के साथ share भी कर सकते हैं।
इन्टरनेट पर ऐसे हजारों web applications हैं और सभी के बारे में बता पाना मुश्किल है। आप जब नेट सर्फिंग कर रहें हो तो आपको ऐसी कई सारी sites देखने को मिलेंगी जो की web app के रूप में अपने users को कुछ न कुछ service provide कर रहे होंगे।


वेब एप्लीकेशन कैसे काम करता है? how a web application works?

web-application-working-in-hindi
आप ऊपर diagram देखकर समझ सकते हैं की web application कैसे काम करता है। चलिए इसे step-by-step समझते हैं:
  • Step 1: इस process में सबसे पहले client यानि user अपने browser से web server को किसी content या page के लिए request send करता है।
  • Step 2: वेब सर्वर उस request को application server को भेज देता है जहाँ पर वह कंटेंट या पेज मौजूद होता है। 
  • Step 3: एप्लीकेशन सर्वर request के अनुसार कुछ task perform करता है और आने वाले result (data) को वेब सर्वर को भेज देता है।
  • Step 4: अब web server उस data को client के वेब ब्राउज़र को send कर देता है।
यहाँ पर इस बात को भी समझना चाहिए की web application में static और dynamic दोनों प्रकार के pages हो सकते हैं और इन दोनों pages का process अलग-अलग तरीके से होता है। 

Application server को static pages में कुछ भी changes करने की जरुरत नही पडती यह सीधे क्लाइंट को भेज दिया जाता है। लेकिन dynamic page को generate करने के लिए कुछ functions perform करने पड़ते हैं और उसके बाद जो output आता है उसे क्लाइंट को भेजा जाता है।

वेब एप्लीकेशन के क्या फायदे हैं? (Advantages of web applications in Hindi)

  • यह multiple platforms पर बड़ी आसानी से चल जाता है क्योंकि यह operating system पर depend नही करता यह browser based होता है। 
  • इसे install करने की जरुरत नही पड़ती।
  • यह यूजर के हार्ड डिस्क में स्टोर नही होता है इसलिए स्पेस की कोई समस्या नही होती।
  • हर यूजर या device के लिए अलग-अलग updates देने की जरुरत नही पडती, एक बार सर्वर में इसे update कर दिया जाए तो सारे users उसी version को user कर पाते हैं।
  • इसमें software pairacy जैसी समस्याएं कम होती हैं।
  • अधिकतर web applications को काम करने के लिए ज्यादा RAM और अन्य specifications की जरुरत नही पडती।
  • इसके लिए mantanace cost कम लगता है इसलिए यह किसी भीorganization के सस्ता होता है।
  • यह HTML, CSS जैसे languages से बनता है जिन्हें सीखना बहुत ही आसान है।

वेब एप्लीकेशन के क्या नुकसान हैं? (disadvantages of web applications in Hindi)

  • इसके लिए इन्टरनेट कनेक्शन का होना अनिवार्य है।
  • यह operating system पर नही चलता इसलिए इसमें system resources जैसे memory, cpu, file system आदि को access करने में कुछ limitations होते हैं।
  • अगर आप web app पर काम कर रहे हैं और browser crash हो जाये तो आपके unsaved process खत्म हो जाते हैं।
  • एक single app सारे devices में दिखाई देते हैं इसलिए इसे responsive होना बहुत जरुरी है ताकि सारे devices जैसे desktop, tablet, mobile आदि में बिना किसी परेशानी के दिखाई दे सके।

जैसे-जैसे इन्टरनेट की उपयोगिता बढती जा रही वैसे-वैसे web application development का काम तेज गति से बढ़ता जा रहा है। आज लगभग हर बड़ी से बड़ी आर्गेनाइजेशन अपने बिज़नस को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहती है और उनकी समस्याओं को सुलझाने और काम को आसान बनाने के लिए कम से कम खर्च में एक ऐसा प्लेटफार्म बनाना चाहती है जो सभी के लिए उपलब्ध हो। और इसके लिए web application बहुत ही बेहतरीन जरिया है।

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