Monday, 10 December 2018

ब्लॉग क्या है? लोग blogging क्यों करते हैं? इसके क्या फायदे हैं?

blog kya hai

ब्लॉग क्या है? इस सवाल का जवाब जानने से पहले चलिए इससे जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़ों के बारे में बात करते हैं:

Statista के अनुसार अक्टूबर 2011 तक दुनियाभर में लगभग 17 करोड़ 30 लाख blogs बनाये जा चुके थे

अब एक अनुमान के मुताबिक पूरे इन्टरनेट पर मौजूद blogs की संख्या 44 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है

इन ब्लोग्स पर हर महीने लगभग 70 करोड़ से भी ज्यादा पोस्ट लिखे जाते हैं

हर महीने हम और आप जैसे लगभग 40 करोड़ से भी ज्यादा लोग इन ब्लोग्स को पढ़ते हैं, भले ही हमे इस बात की जानकारी न हो।

इन आंकड़ों से यह तो साबित होता है की आज इन्टरनेट की दुनिया में ब्लॉगिंग कितना महत्वपूर्ण है। अगर आप blogging के बारे में और आधिक जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें।

ब्लॉग क्या है? ब्लॉग या वेबलॉग एक प्रकार का वेबसाइट है जिसे लोग एक डायरी की तरह उपयोग करते हैं इसपर वे अपना अनुभव, अपने विचार और जानकारियाँ टेक्स्ट, इमेज, विडियो आदि के माध्यम से लोगों के साथ साझा करते हैं।

ब्लॉग के कंटेंट को ब्लॉग पोस्ट कहा जाता है। और एक ब्लॉग में कई सारे ब्लॉग पोस्ट हो सकते हैं।

ब्लॉग पोस्ट को अपडेट करने की तिथि के अनुसार एक क्रम में दिखाया जाता है, इसमें नये पोस्ट पहले और पुराने पोस्ट बाद में दिखाए जाते हैं।

ब्लॉग को प्राइवेट भी रखा जा सकता है ताकि दूसरे लोग उसे देख न सकें। लेकिन इन्टरनेट पर मौजूद ज्यादातर ब्लोग्स सार्वजानिक होते हैं जिन्हें कोई भी पढ़ सकता है।

एक ब्लॉग को कोई एक व्यक्ति या एक टीम द्वारा चलाया जाता है।

अब तो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट ब्लोगिंग की दुनिया में कदम रख चुके हैं और वे अपने ब्लॉग पर ढेर सारे कंटेंट शेयर करते हैं और इस काम के लिए वे कई लोगों की एक पूरी टीम रखते हैं।

ब्लॉग पोस्ट को सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस आदि पर शेयर किया जा सकता है।

ज्यादातर ब्लॉग में हर आर्टिकल (पोस्ट) के नीचे एक कमेंट सेक्शन होता है जिसमे कोई भी व्यक्ति उस कंटेंट के बारे में अपनी राय रख सकता है।

अब तो ब्लॉग्गिंग को एक बिज़नस की तरह देखा जाता है और लोग इसमें करियर भी बनाने लगे हैं।

ब्लॉग्गिंग का इतिहास सन 1994: Justin Hall नाम के एक अमेरिकन छात्र ने दुनिया का पहला ब्लॉग links.net बनाया जिसपर वे अपनी निजी जिंदगी से जुडी बातें लिखा करते थे इसे वे एक डायरी के रूप में उपयोग करते थे।

सन 1997: पहली बार "weblog " शब्द का उपयोग Jorn Barger ने किया जो की Robot Wisdom नाम के ब्लॉग के एडिटर थे।

सन 1998: एक कंप्यूटर प्रोग्रामर और वेबसाईट डेवलपर Bruce Ableson ने Open Diary बनाया। जिसपर यूजर डायरी लिख सकता था जिसपर प्राइवेसी सेटिंग के साथ पहला कमेंट सिस्टम भी जोड़ा गया था।

सन 1999: Peter Merholz ने weblog शब्द को और छोटा करके blog कर दिया और यहीं से ब्लॉग शब्द की शुरुआत हुई। इसी साल Pyra Labs ने पहला ब्लॉग प्लेटफार्म Blogger बनाया जिस लोग बिना कोडिंग किये ब्लॉग लिख सकते थे।

सन 2003: गूगल ने Blogger और Adsense को खरीद लिया। ठीक इसी साल Matt Mullenweg ने Wordpress को लांच किया।

सन 2007: Tumblr लांच हुआ जिसने मिक्रोब्लोग्गिंग के कांसेप्ट को जन्म दिया। अब लोग सिर्फ टेक्स्ट नही बल्कि इमेज, विडियो, GIFs आदि भी शेयर कर सकते थे। यहाँ तक की लोग SMS और ईमेल से भी पोस्ट पब्लिश कर सकते थे। यह दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढने वाली सोशल प्लेटफार्म थी जिसे बाद में Yahoo ने 2013 में 1.1 बिलियन डॉलर में खरीद लिया।

सन 2007 से अब तक: अब ब्लोगिंग का दायरा बढ़ गया है यह एक डायरी से निकल कर लगभग हर बिज़नस का एक जरुरी हिस्सा सा बन गया है। अब फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप और इन्स्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैं जिन्हें ब्लॉग से जोड़कर अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाया जा सकता है।

लोग blogging क्यों करते हैं? ब्लॉग बनाने के क्या फायदे हैं? ब्लॉग बनाने के कई सारे फायदे होते हैं और अलग-अलग लोग अपने अलग-अलग फायदों के लिए ब्लॉग्गिंग करते हैं। कई लोगों का उद्देश्य इससे पैसे कमाना होता है तो कई लोग दूसरों की मदद करने के लिए ब्लॉग की शुरुआत करते हैं।

 ब्लॉग के फायदे अनेक हैं और लोगों के ब्लॉग बनाने के पीछे कई सारे उद्देश्य हो सकते हैं जैसे:
  • अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए 
  • अपनी जानकारियों को साझा करने के लिए 
  • ऑनलाइन पोर्टफोलियो बना कर नया नौकरी पाने के लिए
  • ऑनलाइन पैसे कमाने के लिए 
  • नाम कमाने के लिए 
  • बिज़नस को आगे बढ़ाने के लिए
  • अपने क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए
  • यह आपको एक बेहतर लेखक बनाता है 
  • नेटवर्क बनाने के लिए 
  • दूसरों की मदद करने के लिए
  • दूसरों से सीखने के लिए
इसके सभी के अलावा ब्लॉग्गिंग के और क्या फायदे हो सकते हैं यदि आपको पता हो तो नीचे कमेन्ट करके जरुर बताएं।

Bloggers किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? ब्लॉग बनाने वाले और उसपर लिखने वाले को ब्लॉगर कहा जाता है। एक ब्लॉग को एक या एक से अधिक व्यक्ति भी चला सकते हैं।

ब्लॉगर कई प्रकार के होते हैं जिनको हमने मुख्यतः चार भागों में बाँटा है:

1. शौकिया ब्लॉगर:
ऐसे लोग जो अपने ब्लॉग पर अपनी हॉबी से जुडी जानकारियाँ शेयर करते हैं, शौकिया ब्लॉगर कहलाते हैं।

वे उस विषय पर बाते करते हैं जिस पर उनकी दिलचस्पी होती है। एक अच्छा हॉबी ब्लॉगर अपने कंटेंट और उसकी क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान देता है न की पैसे पर। 

इस प्रकार की ब्लॉग्गिंग की खासियत यह है की लोग अपने ब्लॉग से ज्यादा समय तक जुड़े रहते हैं और ब्लॉग से पैसे नही मिलने पर भी निराश नही होते हैं क्योंकि वे अपने पसंदीदा विषय पर लिख रहे होते हैं।

2. पार्ट टाइम ब्लॉगर:  
नौकरी करने वाले लोग, कॉलेज या स्कूल जाने वाले छात्र भी अपने खाली समय में ब्लॉग्गिंग कर सकते हैं। 

इसका फायदा यह है की समय का सदुपयोग हो जाता है और बदले में कुछ पैसे भी मिल जाते हैं। हालांकि शुरुआत में ब्लॉग से पैसे कमाना आसान नही होता इसके लिए आपको काफी समय लगेंगे। 

लेकिन यदि आपको तुरंत पैसे चाहिए तो आप अपने खाली समय में किसी दुसरे ब्लॉगर के लिए आर्टिकल लिखकर भी पैसे कमा सकते हैं।

3. फुल टाइम ब्लॉगर: 
यकीन मानिए कई लोग ऐसे भी हैं जिनकी आमदनी का मुख्य साधन ब्लॉग होता है। ऐसे  लोग अपना पूरा समय ब्लॉग्गिंग में लगाते हैं और अपने ऑडियंस के लिए लगातार क्वालिटी कंटेट बनाते रहते हैं।

उनकी साईट पर धीरे-धीरे ट्रैफिक बढ़ता जाता है और फिर वे विज्ञापनों और अलग-अलग तरीकों से पैसे कमाते हैं।

4. प्रोफेशनल ब्लॉगर: 
ये भी फुल टाइम ब्लॉगर होते हैं लेकिन ये किसी कॉर्पोरेट या संस्था के लिए काम करते हैं और इनका मुख्य काम ब्रांड को प्रमोट करना और बिज़नस के लिए नये कस्टमर या क्लाइंट्स लाना होता है।

वे ज्यादातर कंपनी के प्रोडक्ट या सर्विस से जुडी जानकारियां अपने ब्लॉग पर लिखते हैं और उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

एक ब्लॉगर का काम क्या होता है? एक ब्लॉगर को अपने ब्लॉग को सफलतापूर्वक चलाने के लिए सिर्फ आर्टिकल लिखना नही होता बल्कि और भी कई सारे काम करने होते हैं जैसे:
  • ब्लॉग के लिए योजना बनाना और लक्ष्य निर्धारित करना
  • आर्टिकल के लिए रिसर्च करना 
  • ब्लॉग पोस्ट के लिए सही इमेज का चयन करना जरुरत पड़े तो इमेज को एडिट करना
  • जरुरत पड़ने पर अपने ब्लॉग को डिजाईन करना 
  • साईट की स्पीड और अन्य समस्याओं को ठीक करना
  • अपने ब्लॉग के लिए फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर फैन पेज बनाना 
  • ब्लॉग पोस्ट को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करना 
  • अपने टॉप ब्लॉग पोस्ट्स को optimize करना 
  • कमेंट्स का जवाब देना और स्पैम कमेंट को हटाना 
  • दूसरों के ब्लॉग को पढना और वहाँ से सीखना 
  • गेस्ट पोस्टिंग करना यानि दूसरों के ब्लॉग पर पोस्ट लिखना 
  • अन्य ब्लोगर्स के साथ सम्बन्ध स्थापित करना और एक दुसरे को सपोर्ट करना 
  • विज्ञापन, sponsorships और अन्य तरीकों से अपने ब्लॉग को monetize करने के रास्ते ढूंढना
  • न्यूज़लेटर सेट करना 
  • ट्रैफिक और अन्य आंकड़ों का विश्लेषण करना 
  • अपने ऑडियंस के संपर्क में रहना 
  • अधिक से अधिक लोगों तक अपने ब्लॉग पहुँचाने के लिए योजनायें बनाना
जिस प्रकार से एक बिज़नस को आगे बढाने के लिए कई सारे काम करने पड़ते हैं ठीक उसी तरह एक ब्लॉग को सफल बनाने के लिए भी काफी मेहनत करनी पड़ती है।

ब्लॉग कितने प्रकार के होते हैं? कौन से विषय पर ब्लॉग लिखा जाता है? इस दुनिया में लाखों ब्लोग्स हैं और ऐसे कई सारे विषय हैं जिनपर रोजाना कुछ न कुछ लिखा जा रहा है। लेकिन ब्लॉग शुरू करने के समय कई लोगों में इस बात को लेकर चिंता रहती है वे किस प्रकार का ब्लॉग बनायें और उस पर किस प्रकार के कंटेंट पोस्ट करें। सबसे पहले हमें एक विषय चुनना होता है जिसे niche भी कहा जाता है और फिर उससे सम्बंधित जानकारियाँ पोस्ट की जातीं हैं।

अगर चाहें तो हम एक से अधिक विषय पर भी लिख सकते हैं।

ब्लॉग कई प्रकार के होते हैं और इसे विषय के आधार पर हम कई सारे भागों में बाँट सकते हैं जैसे:
  • फैशन 
  • फ़ूड
  • फिटनेस
  • समाचार
  • लाइफ स्टाइल 
  • खेल-कूद
  • फिल्म
  • गेमिंग
  • फाइनेंस
  • राजनीती 
  • बिज़नस
  • पर्सनल 
  • ऑटोमोबाइल
  • पालतू जानवर 
यदि आप भी ब्लॉग बनाने की सोच रहें हैं तो हमारी यही सलाह होगी की आप अपने मनपसंद टॉपिक पर लिखना शुरू करें। आप चाहें तो एक से अधिक विषय पर लिख सकते हैं।

क्या ब्लॉग से पैसे कमा सकते हैं? हाँ! आप ब्लॉग्गिंग करके पैसे कमा सकते हैं और कई सारे लोग कमा भी रहे हैं।

लेकिन जिस प्रकार से एक बिज़नस से पैसे कमाने के लिए प्लानिंग और मेहनत की जरुरत होती है ठीक वैसे ही एक ब्लॉग से अच्छी कमाई करने के लिए भी योजना बनाई जाती है और लगातार मेहनत किया जाता है।

ब्लॉग को monetize करने के लिए कई सारे तरीके होते हैं जिनमे से सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले तरीके कुछ इस प्रकार हैं:
  • विज्ञापन
  • एफिलिएट मार्केटिंग
  • खुद का सामान या सर्विस बेचना 
  • डोनेशन से
  • खुद के बिज़नस का प्रचार करके
ब्लॉग्गिंग करके पैसे कमाने के लिए ब्लॉग पर अच्छी ट्रैफिक की जरुरत पड़ती है जिसके लिए एक ब्लॉगर को काफी मेहनत करनी पड़ती है।

कौन कर सकता है blogging? ब्लॉग्गिंग करने के लिए किसी विशेष योग्यता की जरुरत नही पड़ती है। इसे कोई भी किसी भी वर्ग का व्यक्ति समय निकाल कर कर सकता है जैसे:
  • स्कूल स्टूडेंट 
  • कॉलेज स्टूडेंट
  • गृहणी (हाउस वाइफ)
  • जॉब करने वाला व्यक्ति 
हर वह व्यक्ति ब्लोगिंग कर सकता है जिसके पास लिखने के लिए कुछ है। बस उसे इन्टरनेट और ब्लोगिंग के बारे में कुछ जानकारी होनी चाहिए।

ब्लॉग बनाने के लिए क्या चाहिए? शुरू करने से पहले आपको यह तय करना होगा की आप किस विषय पर आर्टिकल या कंटेंट बना सकते हैं। इसके बाद आपको एक प्लेटफार्म तैयार करना होगा जहाँ पर आप अपने आर्टिकल को पोस्ट कर सकें।

इस काम के लिए आपको दो चीजों की जरूरत पड़ेगी:
  1. डोमेन नेम
  2. वेब होस्टिंग 
डोमेन नेम का मतलब एक वेब एड्रेस जिसके जरिये आपके ब्लॉग को देखा जा सके जैसे आप इस ब्लॉग को webinhindi.com पर देख पा रहे हैं ठीक वैसे ही आपको एक एड्रेस खरीदना होगा जिसे ही डोमेन नाम कहा जाता है।

इसके लिए आपको 99 रूपये से 1500 रुपये लग सकते हैं। ऐसी कई सारी websites हैं जहाँ से आप डोमेन खरीद सकते हैं जैसे:
  • Godaddy
  • Bigrock
  • Namecheap
इसके बाद आपको वेब होस्टिंग की जरुरत पड़ेगी जिससे आपको इन्टरनेट पर एक स्पेस मिलेगा जहाँ आप अपने कंटेंट अपलोड कर पाएंगे। 

होस्टिंग के लिए आपको मासिक या सालाना कुछ पैसे चुकाने पड़ते हैं जो निर्भर करता है की आप कौनसा होस्टिंग प्रोवाइडर उपयोग करते हैं।

आपको इन्टरनेट पर कई सारे होस्टिंग प्रोवाइडर मिलेंगे जैसे:
  • Bluehost
  • Godaddy
  • Hostgator 
अगर आप होस्टिंग के लिए पैसे खर्च नही करना चाहते तो आप Blogger.com का उपयोग कर सकते हैं जो की गूगल का ही एक मुफ्त ब्लॉगिंग प्लेटफार्म है।


उम्मीद है आपको ब्लोगिंग के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं या सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर रखें।

Friday, 23 November 2018

डिजिटल मार्केटिंग क्या है? कितने प्रकार के होते हैं?

"डिजिटल मार्केटिंग" बीते कुछ सालों से यह शब्द बहुत ही ज्यादा प्रचलन में है। मार्केटिंग का अर्थ तो सभी को पता है, अपने उत्पाद का प्रचार-प्रसार करना और ग्राहक तक अपनी पहुँच बनाना यह किसी भी मार्केटिंग का एक मुख्य उद्देश्य होता है।

लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है व्यापार करने के तौर-तरीके भी बदलते जा रहे हैं, अब लोग व्यापार करने के पारंपरिक तरीके से निकल कर डिजिटल मार्केटिंग की ओर बढ़ रहे हैं।

तो अब सवाल पैदा होता है की आखिर डिजिटल मार्केटिंग क्या है? क्या यह बिज़नस को आगे बढाने के लिए जरुरी है? इसके क्या-क्या फायदे हो सकते हैं? आज हमने यहाँ इन्हीं सवालों के जवाब आसान भाषा में देने की कोशिश की है।

Digital Marketing in Hindi


डिजिटल मार्केटिंग क्या है? आसान शब्दों में यदि हम इसे परिभाषित करें तो यह कुछ इस तरह हो सकता है: किसी प्रोडक्ट या सर्विस के प्रचार-प्रसार के लिए किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग करना डिजिटल मार्केटिंग कहलाता है।

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है की कई लोग इन्टरनेट मार्केटिंग को ही डिजिटल मार्केटिंग समझ लेते हैं लेकिन सच तो यह है की डिजिटल मार्केटिंग अपने-आप में व्यापक है और इन्टरनेट मार्केटिंग उसका एक हिस्सा है।

जब हम रेडियो के ज़माने में थे तब से इसका उपयोग हो रहा है, आप रोड पर चलते हुए सड़क किनारे इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड्स पर लगे विज्ञापन देखते हैं, यह भी डिजिटल मार्केटिंग का ही एक उदहारण है।

डिजिटल मार्केटिंग की शुरुआत कैसे हुई? जैसे की हमने ऊपर कहा की यह रेडियो के ज़माने से चलता आ रहा है और ठीक इसके बाद कंप्यूटर, इन्टरनेट और ईमेल के अविष्कार ने इसकी गति और बढ़ा दी, अब ईमेल के जरिये व्यक्तिगत रूप से लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती थी।

अब लोगों ने कंप्यूटर का जबरदस्त उपयोग करना शुरू कर दिया, उन्हें अपने ग्राहकों की जानकारी किसी रजिस्टर में लिखने के बजाय अब कंप्यूटर पर नोट करना ज्यादा आसान लगने लगा था।

इसी तरह जैसे-जैसे इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का उपयोग मार्केटिंग में बढ़ता गया सन 1990 की दशक में इसे डिजिटल मार्केटिंग का नाम दिया गया।

सन 2000 के बाद इन्टरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने लगी थी, लोग अब किसी सामान को खरीदने से पहले सर्च इंजन पर चीजें ढूँढने लगे थे ऐसे में हर बिज़नस को ऑनलाइन आना जरुरी था।

बाद में सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, लिंक्डइन, यूटूब और ट्विटर ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया और आज ये लोगों के निजी ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अब सोशल मीडिया भी मार्केटिंग का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।

उस पुराने समय से लेकर अब तक डिजिटल मार्केटिंग का ट्रेंड लगातार बढता ही गया है। नीचे हमने गूगल ट्रेंड का एक स्क्रीनशॉट दिया है जिसमे देखें तो यह स्पष्ट दिखाई देता है की इस शब्द को सर्च करने की संख्या लगातार बढती ही जा रही है।

digital-marketing-trends

डिजिटल मार्केटिंग कैसे करें? ये कितने प्रकार के होते हैं? इसे हम मुख्य रूप से दो भाग में बाँट सकते हैं: ऑफलाइन मार्केटिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग। चलिए अब इन दोनों को विस्तार से समझते हैं:

ऑफलाइन डिजिटल मार्केटिंग: 
जी हाँ, ऑफलाइन मार्केटिंग भी डिजिटल मार्केटिंग का ही एक हिस्सा है। यह मार्केटिंग करने का एक ऐसा तरीका है जिसमे डिजिटल डिवाइस का उपयोग किया तो जाता है लेकिन यह जरुरी नही है की वह इन्टरनेट से जुड़ा हुआ हो।

इस श्रेणी में भी कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग किया जा सकता है जैसे:
  • रेडियो
  • टीवी
  • मोबाइल
रेडियो: इस श्रेणी में यह सबसे पुराना तरीका है जिसमे लोगों तक अपनी आवाज़ और संगीत के माध्यम से रचनात्मक तरीके से अपनी बात पहुचाई जाती है। और कमाल की बात है की रेडियो की लोकप्रियता अभी भी कम नही हुई है और यही कारण है पिछले 10 सालों में रेडियो चैनल्स की आय लगातार बढ़ी है और 2018 में 470 मिलियन डॉलर हो गयी है।

टीवी: हम सभी बचपन से टीवी पर विज्ञापन देखते आ रहे हैं। इनमे से कुछ विज्ञापन जैसे एक्शन स्कूल शूज, झंडू बाम, वाशिंग पाउडर निरमा आदि तो जैसे हमारी यादों में बस गए हैं। लेकिन जब से यूटूब आया है लोग अब टीवी से दूर होते जा रहे हैं। टीवी पर विज्ञापन करने में कई सारी समस्याएं हैं, छोटे बिज़नस के लिए यह बहुत ही महंगा है और इसके अलावा इससे सटीक तरीके से टार्गेटिंग भी नही किया जा सकता जबकि यूटूब में यह बहुत ही आसान है।

मोबाइल: यहाँ पर हम एसएमएस मार्केटिंग की बात कर रहे हैं जिसका उपयोग अब स्मार्टफ़ोन के आने से कम हो गया है लेकिन इसका उपयोग आज भी किया जा सकता है।

ऑनलाइन डिजिटल मार्केटिंग:
इसे इन्टरनेट मार्केटिंग भी कहा जाता है, इसके नाम से ही पता चल रहा है की इस प्रकार के मार्केटिंग में ऐसे डिजिटल डिवाइस का उपयोग होता है जो की इन्टरनेट से जुड़े होते हैं जैसे: मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर आदि।

Online Digital Marketing Infographic in Hindi

ऑनलाइन मार्केटिंग भी कई प्रकार के होते हैं जिनमे से कुछ श्रेणियों के बारे में नीचे दिया गया है:
  • सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO)
  • सर्च इंजन मार्केटिंग (SEM)
  • पे-पर-क्लिक एडवरटाइजिंग (PPC)
  • सोशल मीडिया मार्केटिंग (SMM)
  • कंटेंट मार्केटिंग
  • ईमेल मार्केटिंग 
  • एफिलिएट मार्केटिंग
सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO):  यह एक ऐसा तरीका है जिससे किसी वेबसाइट की क्वालिटी को बढाया जाता है ताकि वह सर्च इंजन पर बेहतर स्थान प्राप्त कर सके।

कोई भी वेबसाइट या ब्लॉग तभी सफल होता है जब उस पर लोग विजिट करते हैं। अपनी वेबसाइट पर ट्रैफिक लेकर आना आसान काम नही होता, कई बार विज्ञापन के जरिये प्रमोशन करके ट्रैफिक लाया जाता है लेकिन यदि आप बिना विज्ञापन के अपनी वेबसाइट पर फ्री में ट्रैफिक यानि आर्गेनिक ट्रैफिक लाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपनी वेबसाइट को सर्च इंजन के लिए ऑप्टिमाइज़ करना होगा ताकि आपके वेबसाइट के कंटेंट सर्च इंजन पर दिखाई दे सकें और यह काम SEO द्वारा किया जाता है।

सर्च इंजन मार्केटिंग (SEM):  SEO से हम सर्च इंजन से मुफ्त में ट्रैफिक लेकर आते हैं वहीँ SEM एक पेड तरीका है जिसमे सर्च इंजन जैसे गूगल, बिंग आदि में विज्ञापन करके ट्रैफिक प्राप्त किया जाता है। इसमें विज्ञापनकर्ता को हर एक क्लिक के हिसाब से सर्च इंजन को पैसे देने पड़ते हैं।

पे-पर-क्लिक एडवरटाइजिंग (PPC): यह विज्ञापन का एक तरीका है जिसमे बैनर या टेक्स्ट के रूप में विज्ञापन दिखाया जाता और एडवरटाइजर को हर एक क्लिक पर निर्धारित मूल्य चुकाने होते हैं। 

इसका एक बेहतर उदाहरण आप गूगल पर देख सकते हैं: आप जब भी कुछ सर्च करते हैं तो रिजल्ट वाले पेज में सबसे ऊपर और साइड में कुछ विज्ञापन दिखाई देते हैं वे दरअसल PPC ads ही होते हैं। यह तरीका न सिर्फ सर्च इंजन में होता बल्कि कई सारी वेबसाइट पर PPC विज्ञापनों का उपयोग होता है।

PPC Ads example


सोशल मीडिया मार्केटिंग (SMM): 
सोशल मीडिया मार्केटिंग एक ऐसा तरीका है जिससे सोशल साइट्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इन्स्टाग्राम, यूटूब आदि का उपयोग कर किसी वेबसाइट, प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट किया जाता है।

आजकल सोशल साइट्स का उपयोग हर कोई करता है बल्कि यह तो हमारी ज़िन्दगी का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। ऐसे में ये सोशल साइट्स मार्केटिंग के लिए एक बहुत ही बढ़िया प्लेटफार्म बन गये हैं। 

कंटेंट मार्केटिंग: यह मार्केटिंग एक नया तरीका है। इसमें हाई-क्वालिटी और रोचक कंटेंट बनायीं जाती है जिससे टार्गेट ऑडियंस को आकर्षित किया जा सके और उन्हें इंगेज रखा जा सके। यहाँ पर कंटेंट का मतलब डिजिटल कंटेंट से है यानि:
  • ब्लॉग पोस्ट
  • विडियो 
  • ई-बुक 
  • इन्फोग्रफिक
  • पॉडकास्ट आदि 
इसका मुख्य उद्देश्य किसी ब्रांड, प्रोडक्ट या वेबसाइट को प्रमोट कर ऑडियंस को ग्राहक बनाना होता है।

ईमेल मार्केटिंग: जी हाँ, ईमेल मार्केटिंग, यह आज भी काम करती है। इसमें कई लोगों को एक साथ प्रमोशनल ईमेल भेजे जाते हैं। इसकी खासियत यह है की यह आसान और सस्ता है। 

एफिलिएट मार्केटिंग: इसमें हम किसी दूसरे व्यक्ति या ब्रांड के प्रोडक्ट या सर्विस का प्रचार करते हैं और सेल्स मिलने पर कुछ कमीशन प्राप्त करते हैं।

ऑनलाइन डिजिटल मार्केटिंग के क्या-क्या फायदे हैं?
इसके कई सारे फायदे हैं जैसे:
  • यह किफायती है।
  • परिणाम तुरंत दिखाई देते हैं।
  • ब्रांड की विश्वसनीयता को बढाता है।
  • पूरी दुनिया में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच बनायीं जा सकती है। 
  • ग्राहक से सलाह और प्रतिक्रिया लेना आसान है।
  • टारगेट करना आसान है - आप चाहें तो विज्ञापन सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखा सकते हैं जो आपके संभावित ग्राहक हैं।
  • सुविधाजनक है।
सबसे अच्छी बात यह है की आप सारी चीजों का विश्लेषण बड़ी आसानी से कर सकते हैं: आप बड़ी आसानी से पता लगा सकते हैं की आपके ग्राहक कहाँ और किस देश से हैं, कितने लोगों ने आपके विज्ञापन को देखा, कितने लोगों ने क्लिक किया, उनकी उम्र क्या हो सकती है, वे कौन सी भाषा जानते हैं आदि। 

और ये सारी जानकारियां आपको अपने ऑडियंस या ग्राहक को समझने में मदद करेगी जिसके हिसाब से आप अपनी मार्केटिंग प्लान तैयार कर सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग कैसे सीखें? डिजिटल मार्केटिंग कोई भी सीख सकता है, इसके लिए आवश्यक है मेहनत, लगन और सही दिशा में काम करने की।

अगर आप किसी संस्था से कोर्स करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए आपको काफी अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे इसलिए हमारी सलाह है की आप सारी चीजें ऑनलाइन ही सीखें।

इन्टरनेट पर जानकारियों की कोई कमी नही है। यहाँ आप ब्लॉग, वेबसाइट और यूटूब के माध्यम से लगभग सारी चीजें सीखी जा सकतीं हैं।


उम्मीद है की आपको डिजिटल मार्केटिंग के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। यदि आप इससे जुड़े कोई सवाल पूछना चाहते हैं या कुछ सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में राय जरुर रखें।

Tuesday, 25 September 2018

XML क्या है? इसका क्या उपयोग है?

पिछले 20 सालों से XML का उपयोग एक ऐसे data format के रूप में किया जा रहा है जिसके जरिये अलग-अलग networks, applications, और organizations के बीच बड़ी आसानी से data transport किया जा सकता है। आपने भी कभी-न-कभी XML file जरुर देखा होगा या इसके बारे में सुना होगा। आज हम इसी के बारे में बात करने वाले हैं, आज हम आपको इस article में बताएं की XML क्या है? इसका क्या उपयोग है? इसमें और HTML में क्या अंतर है?

XML क्या है?


XML क्या है? XML का full form Extensible Markup Language है। XML में code लिखने का तरीका बिलकुल HTML जैसा ही है। HTML और XML दोनों में tags का उपयोग किया जाता है। HTML में अलग-अलग tags का उपयोग करके यह describe किया जाता है की page के contents (जैसे text, images आदि) user के screen पर किस प्रकार से display होंगे जबकि XML में tags का use करके data को store और manage किया जाता है।

XML HTML से ज्यादा आसान और customizable है। जहाँ आप HTML में पहले से define किये गये tags का उपयोग करते हैं वहीँ XML में आप खुद से नया tag बना सकते हैं और अपने जरुरत के अनुसार document के structure को तैयार कर सकते हैं इसलिए इसे extensible language कहा जाता है।

उदाहरण के लिए अप नीचे दिया गया XML code देख सकते हैं:
<students>  
<student id="10001">
    <name>Ankit Sharma</name>
    <gender>male</gender>
    <class>10</class>
    <results>
      <result subject="Math" grade="A"/>
      <result subject="Science" grade="B+"/>
      <result subject="Social Science" grade="C"/>
    </results>
</student>
<student id="10002">
    <name>Anita Verma</name>
    <gender>female</gender>
    <class>10</class>
    <results>
      <result subject="Math" grade="B+"/>
      <result subject="Science" grade="A"/>
      <result subject="Social Science" grade="C+"/>
    </results>
</student>
</students>

XML के code को हम एक अलग file में लिखते हैं और उस फाइल को .xml extension के साथ save कर देते हैं। एक XML document बनाने के बाद उसे एक database की तरह भी उपयोग किया जा सकता है। XML में सारे data plain text के रूप में save होते हैं इसलिए इसे किसी भी application के द्वारा access करना बहुत ही आसान होता है।

XML कैसे काम करता है? चलिए अब जानते हैं की आखिर XML काम कैसे करता है। दरअसल XML document में कोड hierarchical structure यानी की एक श्रेणीबद्ध तरीके से लिखा जाता है और इसे read करने के लिए XML parser की जरुरत पड़ती है। Parser इस document को elements, attributes, और अन्य छोटे-छोटे हिस्से में divide कर देता है।

अलग-अलग किये गये इन हिस्सों को जरुरत के अनुसार किसी application के द्वारा access करके display किया जाता है या उस पर कोई operation perform किया जाता है।

यदि document के format में कोई गलती होती है तो यह parser द्वारा error के रूप में बता दिया जाता है।

Data को parser के द्वारा नीचे दिए गये कुछ application पर प्रोसेस करने के लिए भेजा जा सकता है:
  • किसी web browser जैसे Chrome, Firefox आदि को 
  • किसी word processor जैसे Microsoft Word को
  • किसी अन्य database जैसे SQL server को
  • कोई online tool में import किया जा सकता है
  • Java, C, C++ आदि में लिखे गये खुद के प्रोग्राम भी इसे access कर सकते हैं
एक्सएमएल बहुत ही flexible होता है, document से data को retrive करना बहुत आसान होता है और इसे लगभग किसी भी application या program द्वारा access करके उपयोग किया जा सकता है।

XML का क्या उपयोग है? यह कैसे काम करता है यह तो आपने समझ लिया, चलिए अब यह जानते हैं की इसका तरह से और कहाँ-कहाँ उपयोग किया जाता है:

  • XML का उपयोग data store करने के लिए किया जाता है।
  • इसका  मुख्य काम data को presentation से अलग रखना है। इससे उस डाटा को अलग-अलग format में अलग-अलग जगह आसानी से दिखाया जा सकता है।
  • XML को ज्यादातर HTML के साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है जहाँ XML data को store रखता है और HTML उस data को किसी table के रूप में या किसी अन्य format में दिखाने का काम करता है।
  • किसी application, program या software में xml को एक database की तरह उपयोग किया जा सकता है।
  • Web developers XML file का उपयोग dynamic content create करने और उसे अलग-अलग style sheets के जरिये दिखाने का काम कर सकते हैं।
  • अलग-अलग programs के बीच data transfer के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • कई सारे organizations में XML का उपयोग आपस में data के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।

XML के क्या-क्या फायदे हैं? (Advantages of XML in Hindi) इसके उपयोग जानने के बाद आपको यह समझ आ गया होगा की यह language कितना महत्वपूर्ण है। अब चलिए हम इसके फायदे के बारे में बात करते हैं:
  • XML बहुत ही आसान है इसमें coding करते समय बहुत ही कम syntax और rules उपयोग होते हैं।
  • इसमें code लिखने के लिए किसी विशेष tool या software की जरुरत नही पड़ती, इसे एक simple code editor या notepad के जरिये लिखा जा सकता है।
  • आप इसमें खुद से tags बना सकते हैं इसलिए किसी tag को याद रखने की जरुरत नही है।
  • यह human readable और machine readable दोनों है।
  • यह data sharing को बहुत ही आसान बना देता है।
  • PHP, Java, JavaScript, ASP, Python, .NET, C, C++ जैसे लगभग सभी programming languages XML को support करते हैं।
XML में क्या कमियां हैं? (Disadvantages of XML in Hindi) आपने ऊपर पढ़ा की इसकी कई सारी खूबियाँ हैं लेकिन इन सबके बावजूद इसमें कुछ ऐसी कमियां भी हैं जिनके बारे में आपको जरूर पता होना चाहिए। नीचे हम xml के disadvantages के बारे में जानेंगे:

  • XML में tags user defined होते हैं यानी की इसकी coding और structure कैसा होगा यह पूरी तरह से लिखने वाले के ऊपर निर्भर होता है जिससे अन्य user को उसे समझने में परेशानी हो सकती है।
  • XML को किसी web browser में display करने के लिए HTML का उपयोग किया जाता है। कोई भी browser XML को directly नही समझ सकता इसे पहले HTML में convert करना पड़ता है।
  • इसमें data type support नही है।
  • इसे प्रोसेसिंग के लिए HTML पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • इसमें pre defined syntax नही होते इसलिए इसके कोड redundant हो सकते हैं जिससे की application की efficiency प्रभाव पड़ सकता है।
XML और HTML में क्या अंतर है? यह सवाल आपके मन में शुरुआत से ही आ रहा होगा की HTML और XML दोनों में क्या अंतर है? आखिर दोनों में कोड लिखने का तरीका एक जैसा है। तो इसे समझने के लिए नीचे दिए गये points को जरुर पढ़ें:
HTML XML
HTML का उपयोग data को display करने के लिए किया जाता है। यदि XML और HTML दोनों का उपयोग किया जा रहा है तो वहां HTML यह निर्धारित करता है की XML file से मिला हुआ data user को किस प्रकार से दिखाई देगा। XML को data store करने और transport करने के लिए बनाया गया है।
HTML में सारे tags predefined होते हैं। इसमें आप अपनी जरूरत के अनुसार खुद tags define करते हैं।
HTML में closing tag लगाना जरुरी नही है। XML में closing tag जरुरी है।
HTML case sensitive है। यह case sensitive नही है।
उम्मीद है XML के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आप कुछ सवाल पूछना चाहते हैं या सुझाव देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं।


Monday, 27 August 2018

प्रॉक्सी सर्वर क्या है? इसका कैसे उपयोग करें? पूरी जानकारी - Proxy Server in Hindi

प्रॉक्सी सर्वर क्या है इसका कैसे उपयोग करें पूरी जानकारी - Proxy Server in Hindi

क्या आपके स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया गया है? अगर हाँ तो आप उसे प्रॉक्सी के माध्यम से बड़ी आसानी से खोल सकते हैं।

हालांकि हम आपको ऐसा करने का सुझाव तो नही देते लेकिन आज हम आपको यह जरुर बताएँगे की प्रॉक्सी सर्वर क्या है? यह किस काम आता है? इसके कितने प्रकार होते हैं?

साथ ही हम आपको यह भी बताएँगे की इसके उपयोग से आपको क्या फायदे और क्या नुकसान हो सकते  हैं।


प्रॉक्सी सर्वर क्या है? (What is Proxy Server in Hindi?) आपने प्रॉक्सी वोटिंग का नाम जरूर सुना होगा जिसमे चुनाव के समय यदि कोई व्यक्ति उपस्थित न हो तो वह अपना वोट अपने परिवार के किसी दुसरे सदस्य द्वारा डाल सकता है।

हम इन्टरनेट पर मौजूद किसी वेबसाइट को देखने के लिए भी ठीक ऐसा ही कर सकते हैं।

हम website को अपने computer system पर देख तो सकते हैं लेकिन वेबसाइट के server से connect होने वाला system कोई और ही होता है जिसे proxy server कहा जाता है।

हम किसी website को सीधे अपने कंप्यूटर से access न कर के किसी proxy server के द्वारा access कर सकते हैं। यहाँ पर प्रॉक्सी सर्वर user और website के server के बीच एक माध्यम या प्रतिनिधि का काम करता है।

proxy kya hai

जब आप कोई request send करते हैं तो वह proxy server से होते हुए वेबसाइट तक पहुँचता है और वेबसाइट की तरफ से किसी प्रकार का response या content प्रॉक्सी सर्वर से होते हुए आपके कंप्यूटर तक पहुँचता है।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा की यदि प्रॉक्सी का यही काम है तो हम इसका उपयोग क्यों करते हैं? हम सीधे अपने कंप्यूटर से वेबसाइट को एक्सेस क्यों नही कर लेते?

दरअसल प्रॉक्सी का काम सिर्फ यही नही है इसके अलावा यह security और network performance से जुड़े और भी कई सारी सुविधाएँ प्रदान करता है जिनके बारे में आप नीचे पढ़ेंगे।




प्रॉक्सी सर्वर कैसे काम करता है? (How Proxy Server works in Hindi?) जैसा की आप जानते हैं की इंटरनेट से जुड़े सभी computers के अपने-अपने unique IP address होते हैं जो की उन computers का identification बताते हैं और इसी आईपी एड्रेस के जरिये ही इन्टरनेट को पता चलता है की कौनसा कंप्यूटर किस location पर है ताकि सही data सही computer तक पहुँचाया जा सके।

Proxy server भी एक प्रकार का computer होता है और इसका भी एक unique IP address होता है। आपको जब कोई resource (जैसे कोई वेबसाइट या फाइल) चाहिए होता है तो उसके लिए आपका कंप्यूटर सबसे पहले proxy server को request (http, https, ftp) भेजता है।

प्रॉक्सी सर्वर को request मिलते ही वह आपके लिए वही request उस destination server को भेज देता है जहाँ पर वह resource (website या file) store रहता है।

आपके कंप्यूटर और सर्वर के बीच सीधे तौर पर कोई communication नही होता इसलिए सर्वर को आपकी IP का पता नही चल पता इससे आपके सिस्टम की पहचान छुप जाती है।

प्रॉक्सी सर्वर का क्या उपयोग है? (Use of Proxy Server in Hindi) Proxy का उपयोग ज्यादातर security reason से अपना IP address hide करने के लिए किया जाता है इसके अलावा किसी blocked website को access करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। चलिए अब विस्तार से जानते हैं की आखिर प्रॉक्सी सर्वर का क्या काम होता है और इसका क्यों उपयोग किया जाता है:
  • इंटरनेट की स्पीड बढाने के लिए: किसी organization में एक अच्छा proxy server लगा कर network performance को increase किया जा सकता है। प्रॉक्सी सर्वर किसी वेबसाइट या फाइल को अपने cache memory में store कर लेता है इससे जब भी आप उस website को देखना चाहें तो वह सीधे प्रॉक्सी सर्वर के local storage से आप तक पहुँच सकता है यानी वेबसाइट के server को request भेजने की जरूरत नही पड़ेगी, इससे समय और bandwidth की बचत होगी। 
  • आईपी एड्रेस को छिपाने के लिए: यदि आप किसी वेबसाइट को सीधे अपने computer से access करते हैं वह सर्वर जहाँ उस website को host किया गया है उस तक आपका IP address पहुँच जाता है जिससे आपके location के अलावा आपके बारे में कुछ अन्य personal जानकारियाँ जुटाई जा सकती हैं। लेकिन आप procy की मदद से अपनी IP और अन्य identiy छिपा सकते हैं।
  • मोनिटरिंग के लिए: आप अपने ऑफिस में प्रॉक्सी सर्वर लगा कर उसकी मदद अपने employee द्वारा इन्टरनेट उपयोग पर नजर रख सकते हैं इसके अलावा अभिभावक अपने घर में इसे लगाकर यह पता लगा सकते हैं की उनके बच्चे कौन-कौन सी website पर visit करते हैं।
  • ब्लॉक किये गये वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए: आपने देखा होगा की आपके स्कूल, कॉलेज, या ऑफिस के computer में कुछ restrictions लगे होते हैं जिससे आप इन्टरनेट पर कुछ चीजों को देख नही पाते हैं इसके अलावा geographic location या country के अनुसार कंपनी या सरकार द्वारा भी कई websites पर ban लगे होते हैं इन सारी security restrictions और filters को bypass करने के लिए proxy का use किया जा सकता है।
  • सिस्टम की सुरक्षा बढाने के लिए:  किसी भी organization के लिए अपने server hack होने और data loss होने खतरा हमेशा बना रहता है। इस मामले में proxy काफी हद तक कुछ benefit provide करता है। आप अपने प्रॉक्सी सर्वर को configure करके client और server के साथ हो रहे communication को encrypt कर सकते हैं जिससे कोई third party उसे read न कर सके। आप malicious websites को block भी कर सकते हैं। Proxy server आपके सर्वर और outside traffic के बीच एक extra security layer जोड़ देता है। Hackers आपकी प्रॉक्सी सर्वर तक पहुँच तो सकते हैं लेकिन आपके actual server जहाँ सारा data store है वहां पहुँचने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि प्रॉक्सी सर्वर लगा लेने और IP बदल लेने से ही आपका system हैक होने से पूरी तरह बचा रहेगा यह मुमकिन नही है लेकिन प्रॉक्सी से आप कुछ हद तक सुरक्षा तो बढ़ा ही सकते हैं।
प्रॉक्सी सर्वर कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Proxy Server in Hindi)
  1. Forward Proxy: यह client के request को target server में forward कर देता है जिससे दोनों के बीच communication हो सके। यहाँ पर client proxy sever को यह specify करता है की उसे कौन सा resource चाहिए और इस रिक्वेस्ट को प्रॉक्सी उस टारगेट सर्वर तक पहुँचा देता है जहाँ वह resource उपलब्ध होता है। 
  2. Open Proxy: Open proxy भी एक प्रकार का forwarding proxy होता है जो की publicly available होता है जिससे कोई भी internet user अपना ip hide करके anonymous browsing कर सकता है। नीचे open proxy के कुछ प्रकार दिए गये हैं:
    1. Anonymous Proxy: यह simply client के IP को छिपा देता है ताकि टारगेट सर्वर को client के origin के बारे में पता न चल सके। लेकिन इससे target server को proxy की identiy मिल जाती है।
    2. Distorting Proxy: यह website को अपनी identity तो बताता है लेकिन client के लिए false IP address pass करता है।
    3. High Anonymity Proxy: इस प्रकार की प्रॉक्सी को track कर पाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि यह वेबसाइट को न तो अपनी identity देता है और न ही client की IP pass करता है और बार-बार IP बदलता रहता है। यह इन्टरनेट पर अपनी पहचान छिपाने का सबसे सुरक्षित तरीका है इसका एक उदाहरण TOR network है।
  3. Reverse Proxy: यह ऊपर दिए गये सभी proxies से उल्टा होता है यहाँ पर client को यह पता नही होता की वह proxy से communicate कर रहा है उसे लगता है की वह सीधे actual server से contect कर रहा है जबकि सारे request और response proxy से हो कर गुजरते हैं। इसका उपयोग बड़ी-बड़ी companies जैसे की Google आदि द्वारा अपने server की security improve करने, load को कम करने, और speed बढ़ाने के लिए किया जाता है।

प्रॉक्सी सर्वर से क्या खतरा हो सकता है? (Risks of Proxy Server in Hindi)
प्रॉक्सी का उपयोग करके आप अपनी पहचान छिपाकर इन्टरनेट पर घूम-फिर सकते हैं और कई तरह के फायदे ले सकते हैं।

लेकिन ध्यान रहे आप जिस प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग कर रहें हैं उसके पास आपके सारे information हो सकते हैं इसलिए इसके उपयोग से आपको कई प्रकार के खतरे का भी सामना करना पड़ सकता है।

आपका connection सुरक्षित है या नही यह निर्भर करता है की आपका प्रॉक्सी सर्वर किस प्रकार से configure किया गया है और उसे कौन monitor कर रहा है।

इसके उपयोग से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं इस बारे में हमने नीचे बताने की कोशिश की है:
  • Data चोरी होने का खतरा: आप किसी वेबसाइट को अपना data दे रहें हैं तो यह डाटा आपके device और website के सर्वर के बीच मौजूद proxy server से हो कर गुजरेगा इस data में आपके sensitive information जैसे user name और password भी हो सकते हैं। ऐसे में यदि आप किसी गलत proxy का चुनाव करते हैं तो आप समझ सकते हैं की आपको कितना नुकसान हो सकता है।
  • Spam और virus attack का खतरा: ऐसा भी हो सकता है जब आप प्रॉक्सी सर्वर से जुड़ें तो आपके screen पर कई सारे ads दिखाई दें कई बार पैसे कमाने के लिए ये proxy servers आपके system में spam और viraus program भी install करने की कोशिश कर सकते हैं।    
  • Identity Theft: आप अपनी identity छिपा कर internet पर मौजूद किसी भी वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं यदि दुसरे शब्दों में कहें तो आप अपने system की IP के बजाय किसी दुसरे की IP address use कर रहे होते हैं। लेकिन आपकी IP और अन्य identity के बारे में उस प्रॉक्सी को पता होता है। जिस प्रकार आप किसी दुसरे की IP use कर रहे होते हैं ठीक ऐसे ही यदि आपकी identity का उपयोग इंटरनेट पर किसी illegal activity के लिए किया जाय तो इससे आपको काफी परेशानी हो सकती है।
प्रॉक्सी सर्वर का कैसे उपयोग करें? (How to use Proxy Server in Hindi?)
चलिए अब जानते हैं की यदि आपको प्रॉक्सी सर्वर से अपने system को connect करना है तो इसके लिए क्या करना होगा।

Anonymous browing के लिए आप नीचे दिए गये दो आसान तरीकों से proxy server का उपयोग कर सकते हैं:

1. Web based proxy का उपयोग करके:
यह सबसे आसान तरीका होता है, इसमें आपको किसी proxy website का उपयोग करना होता है।

इसके लिए सबसे पहले Google में "Best free online proxy" लिखकर सर्च करें आपको ऐसे कई वेबसाइट मिलेंगे जो मुफ्त में प्रॉक्सी की सुविधा प्रदान करते हैं।

यह बहुत ही आसान तरीका होता है की आप किसी proxy website का उपयोग करें जहाँ पर सिर्फ आपको एक textbox में उस website का address डालना होता है जिसे आप visit करना चाहते हैं।

उदाहरण के लिए आप नीचे एक screenshot देख सकते हैं:

Free proxy website

2. Web browser का उपयोग करके:
इस method में आप अपने ब्राउज़र का उपयोग करते हैं लेकिन यहाँ पर आपको किसी भी प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्ट होने के लिए आपको सबसे पहले उसकी IP address और port number की जानकारी होनी चाहिए इसके लिए आप गूगल में सर्च कर सकते हैं।

IP और port मिलने के बाद आप अपने browser की setting में जाएँ और नीचे दिए गये तरीके से proxy setting को configure करें।

Google Chrome में proxy कैसे use करें?
  • सबसे पहले आप settings में जाएँ 
  • "Advanced" पर क्लिक करें
  • नीचे स्क्रॉल करें और "System" वाले section में जाएँ 
  • "Open proxy settings" पर click करें 
  • "LAN Settings" के button को दबाएँ 
  • "Use a proxy server for your LAN" के checkbox को enable करें
  • Address में proxy का IP address और port वाले बॉक्स में port number डालें
  • Save करके Apply करें
  • अब आप Google Chrome में anonymous browsing कर सकते हैं 
Firefox में proxy कैसे use करें?
  • Options (Windows) या Preference (Mac) में जाएँ 
  • "Advanced" पर click करें 
  • "Network" tab में जाएँ 
  • "Connection" section में जाकर "Settings" पर क्लिक करें 
  • "Manual Proxy Configuration" को select करें 
  • अब proxy का address और port number enter करें 
  • "Use this proxy server for all server protocols" को enable करें 
  • सेटिंग को save करें 

Conclusion
जैसा की आपने ऊपर पढ़ा की proxy server के कई सारे फायदे हैं लेकिन इसके कुछ disadvantages भी हैं लेकिन ऐसा भी नही है की सारे प्रॉक्सी में ऊपर दिए गये सारे फायदे या नुकसान हो यह निर्भर करता है उसके configuration और administrator पर।

किसी भी प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग करने से पहले आपको उसकी सारी जानकारियाँ होनी चाहिए, आपको यह पता होना चाहिए की उस पर trust किया जा सकता है या नही।

हमारी आपसे यही सलाह है की किसी भी public proxy का उपयोग करते समय सावधानी से काम लें और अपने sensetive information जैसे user name, password, credit card detail आदि provide न करें।




हमें उम्मीद है आपको Proxy server की यह जानकारियाँ पसंद आई होंगी। ऐसे ही और भी जानकारियों के लिए आप हमारी इस वेबसाइट WebinHindi पर आते रहें। आप नीचे comment box में अपने विचार या सुझाव भी रख सकते हैं।

Monday, 6 August 2018

Top 40 CSS Interview Questions and Answers in Hindi

CSS Interview Questions in Hindi- आज हम आपके लिए CSS के top 40 questions और उनके answers ले कर आये हैं जो की अधिकतर web designers और developers से interview या exam में पूछे जाते हैं। हमने इसे हिंदी में सिर्फ इसलिए तैयार किया है ताकि इसे आसानी से समझा जा सके। यदि आपका कोई इंटरव्यू नही है तो भी आप इसे पढ़ सकते हैं इससे आपको CSS के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी। हमें उम्मीद है CSS से जुड़े ये सारे सवाल और जवाब आपके जरूर काम आयेंगे।

CSS interview questions in Hindi


CSS Interview Questions in Hindi - सीएसएस से जुड़े सवाल और उनके जवाब हिंदी में


1. CSS क्या है?
CSS का full form Cascading Style Sheets है। इसका उपयोग वेब डिजाईन में web page को design करने के लिए किया जाता है। CSS के जरिये HTML element पर style apply किया जाता है। CSS के जरिये कई सारे web pages के layout को एक साथ control किया जा सकता है।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS क्या है? इसके क्या फायदे हैं?

2. CSS को अपने web page पर कितने तरीके से apply किया जा सकता है?
आप तीन तरीके से CSS को अपने पेज पर integrate कर सकते हैं:
  1. Inline method
  2. Internal method
  3. External method

3. CSS के क्या advantages हैं?
  • Website की loading speed fast हो जाती है
  • Design और content को separate किया जा सकता है 
  • Design को manage करना आसान होता है
  • डिजाईन को consistent रखने में मदद मिलती है 
  • Offline browsing किया जा सकता है 

4. External style sheet use करने के क्या-क्या फायदे और नुकसान हैं?
Advantages:
  • एक ही style sheet को अलग-अलग कई documents पर use किया जा सकता है। 
  • एक ही फाइल से आप अलग-अलग page के design को control कर सकते हैं। 
  • Large website को manage करना आसान होता है। 
  • एक बार यह file cache में लोड हो जाए तो अगली बार वेबसाइट की स्पीड बढ़ जाती है।  
Disadvantages:
  • Website को extra file download करना पड़ता है। 
  • जब तब external style sheet load नही हो जाता पेज पर styles apply नही होंगे।  
  • अगर बहुत ही कम CSS codes use हो रहें हैं तो इसके लिए external style sheet बनाने का कोई फायदा नही है। 


5. External style sheet को link करने के का क्या syntax है?
<link rel="stylesheet" href="cssfile.css" style="text/css">


6. Embedded style sheet के लिए कौनसा syntax use होता है? 
Embedded style sheet यानि internal CSS में CSS के कोड को HTML page के <head> section में <style> tag के अंदर लिखा जाता है जैसे:
<head>
<style>
p{
color: red;
}
h1{
background-color: green;
}
</style>
</head>

7. CSS में selector क्या है यह कितने प्रकार का होता है?
CSS में selector यह बताता हम किस element पर style apply करना चाहते हैं। कुछ प्रमुख selectors इस प्रकार हैं:
  • Tag selector
  • Universal selector
  • Class selector
  • ID selector
  • Descendant selector
  • Adjacent sibling selector:
  • Child selector
  • Attribute selectors
और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में code कैसे लिखें? Selectors क्या होते हैं?

8. Class selector और ID selector में क्या अंतर है?
  • Class को define करने के लिए dot (.) का use करते हैं जबकि id के लिए hash (#) use होता है। 
  • Class को किसी html element पर apply करने के लिए class attribute use होता है जबकि id के लिए id attribute का उपयोग होता है।
  • Class को multiple elements पर apply कर सकते हैं जबकि id को सिर्फ एक ही एलिमेंट पर apply करना चाहिए।

9. Attribute selector का क्या काम है?
हम किसी element को उसके attribute के द्वारा भी select कर सकते हैं इसके लिए attribute selector use किया जाता है।
Example:

[href]{color:green;}


10. Universal selector क्या है?
किसी पेज के सभी elements को select करने के लिए इसका use होता है।
*{
margin:0;
padding:0;
}

11. Descendant selector को समझाईये?
अगर किसी ऐसे एलिमेंट पर स्टाइल अप्लाई करना हो जो की किसी दुसरे element के अंदर हो तब इसका use होता है। example के लिए यदि <p> के अंदर <b> element है और हमें इस <b> पर स्टाइल apply करना है तो इसके लिए कुछ इस प्रकार कोड लिखेंगे:
p b{ color: green; }

12. CSS में comments कैसे लिखते हैं? कमेंट लिखने का syntax कुछ ऐसा होता है:
/* your comment here. */

13. किसी element के background में color set करने के लिए कौनसी property use की जाती है? इसके लिए background-color property use किया जाता है।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में Background Properties क्या हैं? इसे कैसे use करें

14. किसी element के background में image set करने के लिए कौनसी property use की जाती है? इस काम के लिए background-image property use होता है।

15. Background image की position को कैसे control किया जाता है? background-position property से हम बैकग्राउंड इमेज के position को change कर सकते हैं।

16. किसी element को rounded shape में कैसे बदलें? आप border-radius में जरुरत के हिसाब से value दे कर किसी भी element के corner को rounded बना सकते हैं।

17. कौन से property से letters के बीच के space को control किया जा सकता है? Letters के बीच space देने के लिए letter-spacing का use किया जाता है।

18. CSS में text-decoration property का क्या काम है? इससे आप किसी text पर underline, overline, strike-through लगा सकते हैं।

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS में Text Formatting कैसे करें

19. CSS में text-transform property का क्या उपयोग है? Text को uppercase, lowercase आदि में बदलने के लिए इसका उपयोग होता है।

20. CSS में float property का क्या काम है? Float के जरिये आप किसी एलिमेंट को horizontally align कर सकते हैं।

21. Position property की क्या-क्या value हो सकते हैं? इसके 4 value हो सकते हैं:
  1. static
  2. relative
  3. absolute
  4. fixed
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Positioning - Elements की Position कैसे set करें?

22. CSS में Font face कैसे change किया जाता है? Text का font face change करने के लिए font-family use होता है।

23. Pseudo elements क्या हैं? Pseudo elements के जरिये आप किसी element के particular part को style कर सकते हैं। जैसे यदि आप किसी paragraph के पहले लाइन को किसी अलग color में दिखाना चाहते हैं या किसी एलिमेंट के पहले या बाद में कुछ text या symbol add करना चाहते हैं तो Pseudo element यह काम कर सकते हैं।
p::first-line { ... }
.button::after { ... }

24. Pseudo classes क्या हैं? यह Pseudo element जैसा ही है बस अंतर यह है की इससे किसी element पर style तब apply किया जाता है जब वह किसी निश्चित state पर हो। example के लिए किसी hyperlink को आप अलग-अलग states जैसे जब उसपर mouse hover किया गया हो, जब उस पर क्लिक किया जाय, जब वह active state पर हो आदि के अनुसार अलग-अलग कलर दे सकते हैं।
.link:hover { ... }
.link:active { ... }

25. Web page में किसी link का color कैसे change करें?
a:link{ color: red;}

26. !important का क्या काम है? !important के जरिये आप किसी property की value को override कर सकते हैं।
उदाहरण:

a{

color:red;

}

p a{ color:blue !important;}

27. Web safe fonts और fallback fonts क्या हैं? सभी ऑपरेटिंग सिस्टम और ब्राउज़रों में सभी fonts install नही होते। web safe fonts वे common fonts हैं जो लगभग सभी system में उपलब्ध रहते हैं आप इन्हें उपयोग कर सकते हैं। लेकिन यदि आप कोई ऐसा font use कर रहे हैं जो सभी के पास नही होता तो इस स्थिति में आपको fallback fonts जरुर specify करना चाहिए ताकि पहला font अगर न installed न हो तो उसकी जगह fallback font display हो सके।

28. CSS box model क्या है? किसी वेब पेज के सारे HTML elements rectangular shape में होते हैं और इनको design करने के लिए CSS में box model का उपयोग होता है इसके 4 parts होते हैं:
  1. Margin
  2. Padding
  3. Border
  4. Content
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Box Model और उनके Properties Hindi में

29. Z-index का use क्यों किया जाता है?
कई बार हमें कुछ elements को एक के ऊपर एक display करना होता है इसके लिए position property use होता है और किस element किसके बाद दिखाना यह z-index से तय किया जाता है जिसकी z-index value सबसे highest होती है वह सबसे ऊपर दिखाई देता है

30. किसी element को inline या block element बनाने के लिए कौन सी property use की जाती है?
इसके लिए display:block; और display:inline; का use होगा।

31. Inline और block element में क्या अंतर है?
  • Inline element: element की जितनी width होती है यह उतना ही space लेता है। ex: <span>, <a>
  • Block element: element उस line की पूरी width का use करता है इसके बार एक line break आ जाता है यानी उस line पर सिर्फ वही content दिखाई देता है। जैसे: <h1>, <div>

32. CSS के जरिये किसी element को hide करने के लिए क्या किया जाता है? इसके लिए तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं:
  1. display:none;
  2. visibility:hidden;
  3. opacity:0;

33. Box shadow और text shadow का code कैसे लिखें? इसके लिए कुछ इस प्रकार कोड लिखें:
box-shadow: 7px 5px 3px #fffff;
text-shadow: 7px 5px 3px #fffff;

34. किसी element की opacity कैसे change करें? इसके लिए opacity property use करें इसकी value 0 से 1 तक होती है। 0 value वह content hide होजाता है जबकि 1 से वह पूरी तरह दिखाई देता है।

35. Cell padding और cell spacing में क्या अंतर है?
  • Cell-padding: इससे content और cell के border के बीच space दिया जा सकता है।
  • Cell-spacing: cells के बीच में space देने के लिए उपयोग होता है।

36. Media query क्या है? इसका क्या काम है? CSS में media query का उपयोग responsive design बनाने के लिए किया जाता है। इसका काम कुछ इस प्रकार होता है:
  • Device की height और width पता करना 
  • Viewport की height और width पता करना 
  • Orientation check करना 
  • Resolution check करना 
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: CSS Media Queries - Inroduction in Hindi

37. किसी element से border को कैसे remove करें  इसके लिए border:none; उपयोग करें।

38. Cursor के type को बदलने के लिए क्या करें? इसके लिए cursor property use करें।

39. CSS image sprite क्या है? किसी website में कई सारे अलग-अलग images use करने से उसकी loading speed कम हो जाती है। इस लिए Image sprite का उपयोग करते हैं। इससे कई सारे images को एक ही image में add कर दिया जाता है।

40. Hyperlink से underline कैसे हटायें?
a{
text-decoration:none;
}


उम्मीद है ये CSS interview questions and answers आपके लिए उपयोगी साबित होंगे और आपको इससे अपनी इंटरव्यू की तैयारी करने में मदद मिलेगी। आपको आपके आने वाले इंटरव्यू या exam के लिए हमारी ओर से शुभकामनाएं।